कक्षा ४ हिंदी अध्याय 12 शतरंज की भूल-भुलैया के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
केवल नाम वाले शब्दों (संज्ञा) को एक-दूसरे से मिलाते हुए मंत्री को राजा तक पहुँचाइए। ध्यान रहे कि आपको संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण तथा क्रिया को आपस में नहीं मिलाना है।
मंत्री केरल दस वे प्रभु घोड़ा उस पहला कृष्णदेव राय मीठा दूसरा वीणा शेर हाथी माता तेनाली -रामन हम जहाज महल इस बंदर घर पुस्तक तुम यमुना मेरा एक सिपाही मैं आदमी यह नर्मदा पीला पढ़ना पिता आप दरबार पढ़ना गंगा नीला लिखना ऊँट इस अशर्फी भवन नदी हमारा मुझे राजा ▲ यहाँ से — मंत्री राजा तक ▼
पृष्ठ 153 की भूल-भुलैया। ऊपर बाएँ खाने में ‘मंत्री’ है और नीचे दाएँ खाने में ‘राजा’।
उत्तर

पहले हर शब्द को पहचान लीजिए। तभी रास्ता दिखने लगेगा।

  • संज्ञा — किसी व्यक्ति, जगह, वस्तु या भाव का नाम। ये हैं — मंत्री, केरल, प्रभु, घोड़ा, कृष्णदेव राय, वीणा, शेर, हाथी, माता, तेनालीरामन, जहाज, महल, बंदर, घर, पुस्तक, यमुना, सिपाही, आदमी, नर्मदा, पिता, दरबार, गंगा, ऊँट, अशर्फी, भवन, नदी, राजा।
  • सर्वनाम — संज्ञा की जगह आने वाला शब्द। ये हैं — वे, उस, हम, इस, तुम, मेरा, मैं, यह, आप, हमारा, मुझे।
  • विशेषण — संज्ञा की विशेषता बताने वाला शब्द। ये हैं — दस, पहला, मीठा, दूसरा, एक, पीला, नीला।
  • क्रिया — काम बताने वाला शब्द। ये हैं — पढ़ना, लिखना।

अब केवल संज्ञा वाले खानों से होकर रास्ता बनाइए। एक सही रास्ता यह है —

मंत्री केरल दस वे प्रभु घोड़ा उस पहला कृष्णदेव राय मीठा दूसरा वीणा शेर हाथी माता तेनाली -रामन हम जहाज महल इस बंदर घर पुस्तक तुम यमुना मेरा एक सिपाही मैं आदमी यह नर्मदा पीला पढ़ना पिता आप दरबार पढ़ना गंगा नीला लिखना ऊँट इस अशर्फी भवन नदी हमारा मुझे राजा ▲ यहाँ से — मंत्री राजा तक ▼
मंत्री से राजा तक का रास्ता — बीच के सब खाने संज्ञा हैं।
मंत्री → केरल → कृष्णदेव राय → तेनालीरामन → पुस्तक → आदमी → दरबार → अशर्फी → भवन → नदी →
गंगा → नर्मदा → यमुना → जहाज → महल → वीणा → शेर → हाथी → बंदर → सिपाही → पिता → ऊँट → राजा
रास्ता ऐसा ही क्यों: ‘केरल’ के आगे ‘दस’ है, जो विशेषण है। इसलिए ऊपर की पंक्ति में सीधे आगे नहीं बढ़ सकते — नीचे उतरना पड़ता है। इसी तरह ‘नदी’ के आगे ‘हमारा’ सर्वनाम है, इसलिए वहाँ से फिर ऊपर चढ़ना पड़ता है।
संकेत: संज्ञा वाले और भी रास्ते बन सकते हैं। जैसे ‘वीणा’ से ऊपर ‘प्रभु’ और ‘घोड़ा’ होकर ‘हाथी’ तक। आपका रास्ता अलग हो तो भी ठीक है — बस हर खाना संज्ञा का होना चाहिए।
क्या यह उपयोगी रहा?