कक्षा ४ हिंदी अध्याय 13 बातचीत के लिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
आपने आकाश में अनेक तारे देखे होंगे। ऐसा कौन-सा तारा है जो हमें सुबह-सुबह जगाने का काम करता है? हमें इस तारे से कौन-से लाभ होते हैं?
उत्तर

वह तारा है — सूर्य। सुबह सूर्य निकलता है और उसकी धूप से हम जाग जाते हैं।

पाठ में अध्यापक जी ने यही बताया है — “उत्तम! सूर्य एक तारा है।” (पृष्ठ 154)

सूर्य से हमें ये लाभ होते हैं —

  • दिन में उजाला मिलता है। उसी उजाले में हम पढ़ते और खेलते हैं।
  • गरमी मिलती है। ज्योति कहती है — “सूरज पृथ्वी से बहुत दूर है, फिर भी कितनी गरमी देता है!”
  • सर्दियों में धूप बहुत आराम देती है। सुमन की नानी पूरे दिन धूप में बैठी रहती हैं।
  • सूर्य की किरणों से हमें विटामिन डी मिलता है। (पृष्ठ 168)
  • सूर्य के प्रकाश से हमें सौर ऊर्जा मिलती है, जो कभी समाप्त नहीं होती। (पृष्ठ 169)
ऐसा क्यों: सूर्य अपनी चमक स्वयं देता है, इसलिए वह तारा है। चाँद अपनी चमक स्वयं नहीं देता, इसीलिए अध्यापक जी ने सुमन की बात नहीं मानी कि सूरज एक ग्रह है।
संकेत: सूर्य की ओर कभी सीधे मत देखिए। अध्यापक जी कहते हैं — “सूर्य को कभी भी प्रत्यक्ष देखने का प्रयास मत करना बच्चो। यह आँखों के लिए ठीक भी नहीं है।” (पृष्ठ 159)
प्र2.
भारत में मनाए जाने वाले ऐसे त्योहारों या मेलों के बारे में अपनी कक्षा में चर्चा कीजिए जिनका संबंध सूर्य अथवा चंद्रमा से है।
उत्तर

यह कक्षा में मिलकर करने वाला काम है। इसका उत्तर हर बच्चे का अपना होगा, क्योंकि हर घर और हर प्रदेश के त्योहार अलग हैं।

चर्चा इस तरह कीजिए —

  1. पहले घर में पूछिए कि आपके यहाँ कौन-से त्योहार मनाए जाते हैं।
  2. हर त्योहार के आगे लिखिए — यह सूर्य से जुड़ा है या चंद्रमा से।
  3. कक्षा में एक-एक करके बताइए। एक ही त्योहार के अलग-अलग प्रदेशों में अलग नाम भी सुनिए।

नमूना उत्तर:

त्योहार या मेलाकिससे संबंधक्या होता है
छठसूर्यलोग नदी या तालाब के जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
मकर संक्रांतिसूर्यतिल-गुड़ बाँटे जाते हैं और पतंगें उड़ाई जाती हैं।
पोंगलसूर्यनई फ़सल से बना पोंगल सूर्य को चढ़ाया जाता है।
करवा चौथचंद्रमाचाँद देखकर ही व्रत पूरा किया जाता है।
ईदचंद्रमाचाँद दिखने पर ही ईद मनाई जाती है।
शरद पूर्णिमाचंद्रमापूरे चाँद की रात में खीर रखी जाती है।
संकेत: पृष्ठ 169 के चित्र को फिर से देखिए। उसमें भी लोग जल में खड़े होकर सूर्य को जल चढ़ा रहे हैं।
प्र3.
आपने कक्षा तीन की पाठ्यपुस्तक ‘वीणा, भाग 1’ में चंद्रयान पर पाठ पढ़ा है न! अपने सहपाठियों को चंद्रयान के बारे में कुछ याद करके बताइए।
उत्तर

यह याद करके बोलने वाला काम है। जो आपने कक्षा तीन में पढ़ा था, वही अपने शब्दों में सुनाइए।

बोलते समय ये बातें रखिए —

  1. चंद्रयान क्या है — चाँद के बारे में जानने के लिए भेजा गया यान।
  2. वह कहाँ गया — चाँद तक।
  3. उसने क्या किया — चाँद के चित्र और जानकारी भेजी।
  4. आपको उसमें सबसे अच्छी बात कौन-सी लगी।

नमूना उत्तर: “चंद्रयान हमारे देश का भेजा हुआ अंतरिक्ष यान है। वह चाँद के बारे में जानने के लिए भेजा गया था। इसी पाठ में अध्यापक जी बताते हैं कि चंद्रयान-3 सफल रहा। अब उसी तरह का एक यान सूर्य के लिए भी भेजा गया है, जिसका नाम आदित्य-एल 1 है।”

यह प्रश्न यहाँ क्यों है: पाठ की शुरुआत में ही अध्यापक जी कहते हैं — “पिछली कक्षा में हमने चाँद और चंद्रयान के बारे में जाना था।” पुरानी जानी हुई बात से जोड़ने पर नई बात जल्दी समझ आती है।
संकेत: इस पाठ में चंद्रयान के बारे में केवल इतना ही दिया है — वह चाँद के लिए भेजा गया यान है, चंद्रयान-3 सफल रहा, और आदित्य-एल 1 उसी प्रकार का यान है। बाकी बातें अपनी कक्षा तीन की पुस्तक से याद कीजिए।
प्र4.
चंद्रयान-3 की सफलता के बाद सूर्य का अध्ययन करने वाले यान आदित्य-एल 1 के विषय में आपने जो भी सुना, पढ़ा या देखा है, बताइए।
उत्तर

अपनी सुनी-देखी बात बताइए। नीचे वे बातें दी हैं जो इसी पाठ में पढ़ी हैं — इन्हें भी अपनी बात में जोड़ लीजिए।

बातपाठ में कहाँ
आदित्य-एल 1 चंद्रयान के प्रकार का ही एक यान है।पृष्ठ 156
इसका काम सूर्य के बारे में जानकारी जुटाना है।पृष्ठ 156
इसका प्रक्षेपण 2 सितंबर 2023 को इसरो ने किया था।पृष्ठ 158
यह लगभग 5 वर्ष तक सूर्य के चारों ओर घूमता हुआ चित्र खींचता रहेगा।पृष्ठ 158
इसने सूर्य के ग्यारह रंगों वाले चित्र भेजे हैं।पृष्ठ 159
सूर्य पर आने वाली आँधियों की जानकारी इसके उपकरणों से मिलेगी।पृष्ठ 160

नमूना उत्तर: “मैंने टी.वी. पर देखा था कि आदित्य-एल 1 को रॉकेट से अंतरिक्ष में भेजा गया। मुझे यह जानकर अच्छा लगा कि यह सूर्य पर नहीं जाता, बल्कि एक सुरक्षित दूरी पर रुककर उसके चित्र भेजता है। उसके भेजे हुए ग्यारह रंगों वाले चित्र मुझे सबसे सुंदर लगे।”

संकेत: जो बात आपने सुनी हो पर पक्का न हो, उसे “मैंने सुना है कि…” कहकर बताइए — जैसे पाठ में वाणी कहती है।
प्र5.
नीचे दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए और बताइए कि — (क) इसमें क्या दिखाया गया है?
पाठ के पृष्ठ 161 पर छपा चित्र — हरी पहाड़ी और फूलों के ऊपर आकाश में बना एक बड़ा रंगीन धनुष। बाईं ओर सूरज चमक रहा है और दाईं ओर बादल से बूँदें गिर रही हैं।
उत्तर

इस चित्र में इंद्रधनुष दिखाया गया है।

चित्र में और क्या-क्या है —

  • बाईं ओर चमकता हुआ सूरज।
  • दाईं ओर बादल, जिनसे बूँदें गिर रही हैं।
  • नीचे हरी पहाड़ियाँ, रंग-बिरंगे फूल और उड़ती हुई तितलियाँ।
  • आकाश में धनुष जैसा मुड़ा हुआ रंगों का एक चौड़ा पट्टा।
पाठ के पृष्ठ 161 पर छपा चित्र — हरी पहाड़ी और फूलों के ऊपर आकाश में बना एक बड़ा रंगीन धनुष। बाईं ओर सूरज चमक रहा है और दाईं ओर बादल से बूँदें गिर रही हैं।
इसे इंद्रधनुष क्यों कहते हैं: इसका आकार धनुष जैसा होता है और इसमें कई रंग होते हैं, इसीलिए इसका नाम इंद्र-धनुष पड़ा।
प्र6.
क्या आपने इसे कभी देखा है? इसमें कितने रंग होते हैं? अपनी लेखन-पुस्तिका में उन रंगों के नाम क्रम से लिखिए।
पाठ के पृष्ठ 161 पर छपा चित्र — हरी पहाड़ी और फूलों के ऊपर आकाश में बना एक बड़ा रंगीन धनुष। बाईं ओर सूरज चमक रहा है और दाईं ओर बादल से बूँदें गिर रही हैं।
उत्तर

हाँ, बारिश रुकने के बाद आकाश में इंद्रधनुष दिखाई देता है। यह उत्तर आपका अपना होगा — जिसने देखा हो, वह बताए कि कब और कहाँ देखा।

इंद्रधनुष में सात रंग होते हैं।

ऊपर से नीचे के क्रम में रंगों के नाम —

1. लाल
2. नारंगी
3. पीला
4. हरा
5. नीला
6. जामुनी
7. बैंगनी
पाठ के पृष्ठ 161 पर छपा चित्र — हरी पहाड़ी और फूलों के ऊपर आकाश में बना एक बड़ा रंगीन धनुष। बाईं ओर सूरज चमक रहा है और दाईं ओर बादल से बूँदें गिर रही हैं।
याद रखने की तरकीब: पहले अक्षर जोड़कर पढ़िए — ला-ना-पी-ह-नी-जा-बै। सबसे ऊपर लाल रहता है और सबसे नीचे बैंगनी।
नमूना उत्तर: “हाँ, पिछली बरसात में स्कूल से लौटते समय मैंने इंद्रधनुष देखा था। वह बहुत बड़ा और गोल-सा था।”
प्र7.
आकाश में ऐसा कब और कैसे होता है?
पाठ के पृष्ठ 161 पर छपा चित्र — हरी पहाड़ी और फूलों के ऊपर आकाश में बना एक बड़ा रंगीन धनुष। बाईं ओर सूरज चमक रहा है और दाईं ओर बादल से बूँदें गिर रही हैं।
उत्तर

कब: बारिश रुकने के तुरंत बाद, जब आकाश में हल्की बूँदें बची हों और उसी समय सूरज भी निकल आया हो।

कैसे: सूरज की धूप हवा में लटकी पानी की छोटी-छोटी बूँदों पर पड़ती है। हर बूँद उस धूप को सात रंगों में बाँट देती है। सारे रंग मिलकर आकाश में धनुष जैसा बड़ा पट्टा बना देते हैं।

पाठ के पृष्ठ 161 पर छपा चित्र — हरी पहाड़ी और फूलों के ऊपर आकाश में बना एक बड़ा रंगीन धनुष। बाईं ओर सूरज चमक रहा है और दाईं ओर बादल से बूँदें गिर रही हैं।
ध्यान देने की बात: इंद्रधनुष देखते समय सूरज हमारी पीठ की ओर रहता है और बारिश सामने की ओर। चित्र में भी सूरज एक ओर है और बूँदें गिराता बादल दूसरी ओर।
संकेत: घर पर देख सकते हैं — धूप में खड़े होकर पाइप से पानी की महीन फुहार छोड़िए। पीठ सूरज की ओर रखिए। फुहार में छोटा-सा इंद्रधनुष दिखाई देगा।
क्या यह उपयोगी रहा?