कक्षा ४ हिंदी अध्याय 13 सोचिए और लिखिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
हमारे वैज्ञानिकों ने आदित्य-एल 1 का निर्माण क्यों किया?
उत्तर

हमारे वैज्ञानिकों ने आदित्य-एल 1 का निर्माण सूर्य के रहस्यों का पता लगाने के लिए किया।

अध्यापक जी कहते हैं — “जैसे चंद्रमा के रहस्य हैं, ठीक उसी प्रकार सूर्य के भी रहस्य हैं। इन्हीं रहस्यों का उद्घाटन करने के लिए हमारे वैज्ञानिकों ने आदित्य-एल 1 का निर्माण किया है।” (पृष्ठ 156)

यह यान ये काम करता है —

  • सूर्य किस समय कैसा होता है, यह देखता है।
  • सूर्य के भीतर जलने वाली आग का ताप कितना है, यह पता करता है।
  • उस ताप का प्रभाव आस-पास और हमारी पृथ्वी पर पड़ता है या नहीं, यह जानता है।
  • सूर्य पर आने वाली आँधियों की जानकारी भेजता है। (पृष्ठ 160)
यह ज़रूरी क्यों है: सूर्य तक कोई व्यक्ति जा नहीं सकता, क्योंकि वह बहुत दूर और बहुत गरम है। इसलिए उसकी जानकारी लाने के लिए यान भेजा गया। यान वहीं से चित्र खींचकर भेजता है और वैज्ञानिक उन चित्रों का अध्ययन करते हैं।
प्र2.
“आदित्य-एल 1 चंद्रयान के प्रकार का ही एक यान है।” अध्यापक ने ऐसा अपने विद्यार्थियों से क्यों कहा?
उत्तर

अध्यापक जी ने ऐसा इसलिए कहा ताकि बच्चे जानी हुई बात से जोड़कर नई बात जल्दी समझ जाएँ

कारण —

  1. बच्चे पिछली कक्षा में चाँद और चंद्रयान पढ़ चुके थे। अध्यापक जी ने शुरू में ही यह कहा था।
  2. वाणी ने स्वयं पूछा — “क्या यह चंद्रयान के प्रकार का ही तो नहीं है?” अध्यापक जी ने उसकी बात ठीक ठहराई।
  3. दोनों अंतरिक्ष यान हैं। अंतर बस इतना है — चंद्रयान चाँद के लिए भेजा गया, आदित्य-एल 1 सूर्य के लिए।
चंद्रयानआदित्य-एल 1
किसके बारे मेंचाँदसूर्य
क्या करता हैचाँद की जानकारी भेजता हैसूर्य के चित्र और जानकारी भेजता है
पढ़ाने की यह तरकीब क्यों काम करती है: जो चीज़ हम पहले से जानते हैं, उससे मिलाकर बताई गई नई चीज़ मन में तुरंत बैठ जाती है।
प्र3.
आदित्य-एल 1 में ‘एल 1’ क्या है और उसका क्या कार्य है?
उत्तर

‘एल 1’ का अर्थ है — लगरांज 1। यह अंतरिक्ष का एक विशिष्ट स्थान यानी एक बिंदु है।

यह बिंदु कहाँ है: सूर्य और पृथ्वी के केंद्रों को जोड़ने वाली रेखा पर। चित्र में यह सूर्य और पृथ्वी के बीच दिखाया गया है।

इसका कार्य: इस बिंदु पर सूर्य और पृथ्वी की आकर्षण शक्तियाँ इस तरह संतुलित रहती हैं कि वहाँ रखी कोई भी वस्तु पृथ्वी के साथ-साथ ही सूर्य की परिक्रमा करती जाती है। इसीलिए आदित्य यान वहीं टिका रहता है और अपने स्थान से सूर्य के चित्र खींचता रहता है।

एल 1 एल 2 एल 3 एल 4 एल 5 सूर्य पृथ्वी आदित्य-एल 1
पाठ के पृष्ठ 170 पर छपा चित्र — बीच में सूर्य, उसके चारों ओर एक बड़ा गोल पथ और उस पथ पर पृथ्वी। एल 1 से एल 5 तक पाँच बिंदु और आदित्य-एल 1 की जगह दिखाई गई है।
नाम कैसे पड़ा: ‘लगरांज’ 18वीं सदी में इटली का एक गणितज्ञ था। उसी ने इस बिंदु के बारे में बताया था, इसलिए बिंदु उसी के नाम से जाना जाता है। उसने ऐसे चार और बिंदुओं का पता लगाया, इसलिए इन पाँच बिंदुओं को एल 1, 2, 3, 4, 5 कहते हैं। (पृष्ठ 158)
संकेत: ‘संतुलित’ का अर्थ है — दोनों ओर से बराबर खिंचाव। जैसे रस्साकशी में दोनों टोलियाँ बराबर ताकत से खींचें तो रस्सी अपनी जगह पर ही रहती है।
प्र4.
“अध्यापक जी! मैंने सुना है कि सूर्य सात घोड़ों के रथ पर आकाश में यात्रा करने वाला एक राजा है।” वाणी ने अध्यापक से ऐसा क्यों कहा होगा?
उत्तर

वाणी ने ऐसा इसलिए कहा होगा क्योंकि उसने यह बात घर-परिवार या कथा-कहानियों में सुनी होगी

कारण —

  1. वाणी स्वयं कहती है — “मैंने सुना है।” वह इसे अपनी जानी हुई बात नहीं बता रही।
  2. हमारे यहाँ कथाओं और चित्रों में सूर्य को सात घोड़ों के रथ पर बैठा देवता दिखाया जाता है। वही चित्र वाणी के मन में था।
  3. गौरव ने भी तुरंत कहा — “हाँ, मैंने भी कुछ ऐसा ही सुना है।” यानी यह बात बहुत घरों में कही-सुनी जाती है।
अध्यापक जी ने क्या बताया: उन्होंने किसी बच्चे को डाँटा नहीं। सबकी बात सुनकर उन्होंने बताया — “सूर्य एक तारा है।” कहानी अपनी जगह ठीक है, पर पढ़ाई में हम वही मानते हैं जो जाँचकर पता चला हो।
संकेत: सुनी-सुनाई बात कहते समय “मैंने सुना है कि…” कहना अच्छी आदत है। इससे सुनने वाले को पता रहता है कि यह पक्की जानकारी नहीं है।
प्र5.
निम्नलिखित वाक्यों में नीचे दिए गए शब्दों का प्रयोग करते हुए रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए — (ओर, भी, ही, और, बहुत) i. हम …… बड़े होकर वैज्ञानिक बनेंगे। ii. रवि अध्यापक की …… अचरज से देखता है। iii. आदित्य-एल 1 ने सूर्य के कुछ अद्भुत चित्र भेजे हैं, उन्हें यदि आप लोग देखेंगे तो देखते …… रह जाएँगे। iv. भारत के ओडिशा के पुरी जिले में सूर्य देवता का एक …… सुंदर मंदिर बना हुआ है। v. अध्यापक ने भास्कर से कहा कि इस कक्षा में दो …… आदित्य हैं।
उत्तर

पाँचों शब्द एक-एक बार प्रयोग होंगे।

क्रमपूरा वाक्यभरा गया शब्द
i.हम भी बड़े होकर वैज्ञानिक बनेंगे।भी
ii.रवि अध्यापक की ओर अचरज से देखता है।ओर
iii.…उन्हें यदि आप लोग देखेंगे तो देखते ही रह जाएँगे।ही
iv.…सूर्य देवता का एक बहुत सुंदर मंदिर बना हुआ है।बहुत
v.…इस कक्षा में दो और आदित्य हैं।और
‘ओर’ और ‘और’ का अंतर: ओर का अर्थ है दिशा — किसी की तरफ़। और का अर्थ है — तथा, एक से ज़्यादा। दोनों की आवाज़ मिलती-जुलती है, पर अर्थ अलग है।
मेरा अपना वाक्य — “मैं विद्यालय की ओर चला और रास्ते में मुझे मेरा मित्र मिला।”
जाँच कर लीजिए: ये वाक्य पाठ से ही लिए गए हैं। पृष्ठ 155 पर “(अध्यापक की ओर अचरज से देखते हुए)”, पृष्ठ 156 पर “देखते ही रह जाएँगे” और “इस कक्षा में दो और आदित्य हैं” छपा है।
प्र6.
‘आदित्य’ का अर्थ सूर्य होता है। इसी प्रकार आदित्य के कुछ नाम आप भी खोजकर लिखिए। नीचे एक नाम दिया गया है, शेष नाम आप लिखिए —
सूर्यदिनेश…………………………………………………………………………
पाठ के पृष्ठ 163 पर छपा चित्र — बीच में सूर्य और उसके चारों ओर आठ खाली खाने। एक खाने में ‘दिनेश’ पहले से लिखा है।
उत्तर

चित्र में एक नाम पहले से लिखा है — दिनेश। बाकी सात खानों में सूर्य के दूसरे नाम भरने हैं।

सूर्यदिनेश…………………………………………………………………………
पाठ के पृष्ठ 163 पर छपा चित्र — बीच में सूर्य और उसके चारों ओर आठ खाली खाने। एक खाने में ‘दिनेश’ पहले से लिखा है।

पूरा किया हुआ उत्तर —

सूर्यदिनेशभास्कररविसूरजदिवाकरप्रभाकरमार्तंडअंशुमाली
पूरा किया हुआ चित्र — सूर्य के आठ नाम।
नामपाठ में आया है या नहीं
दिनेशहाँ — कक्षा के एक विद्यार्थी का नाम
भास्करहाँ — अध्यापक जी ने स्वयं बताया (पृष्ठ 156)
रविहाँ — कक्षा के एक विद्यार्थी का नाम
सूरजहाँ — सुमन और रफ़त इसी शब्द का प्रयोग करते हैं
दिवाकर, प्रभाकर, मार्तंड, अंशुमालीनहीं — ये आपको खोजकर लिखने हैं
मज़े की बात: इसी कक्षा में तीन बच्चों के नाम का अर्थ सूर्य ही है — भास्कर, दिनेश और रवि। इसीलिए अध्यापक जी ने भास्कर से कहा — “आदित्य तुम ही तो हो।”
संकेत: इनमें से कोई भी सात नाम लिख सकते हैं। घर में या शब्दकोश में और नाम भी खोजिए, जैसे — सविता, अर्क, पतंग।
क्या यह उपयोगी रहा?