कक्षा ४ हिंदी अध्याय 5 चेरापूँजी के मेहमान के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
लेखक का घर पानी से क्यों भर गया था?
उत्तर

लेखक का घर बादल के कारण पानी-पानी हो गया था।

घर की खिड़की खुली रह गई थी। बरसात के दिनों में बादल बहुत नीचे तैर रहे थे। वे खुली खिड़की से घर के अंदर आ गए और सब कुछ गीला कर गए।

रचना में कांग की पंक्ति है — “खिड़की खुली रखेगा तो बादल तो घर में आएगा ही न।”

क्यों: चेरापूँजी (सोहरा) बहुत ऊँचाई पर है और वहाँ सबसे ज्यादा बारिश होती है। वहाँ बादल जमीन के पास तक आ जाते हैं। इसलिए खुली खिड़की से बादल घर में आ सकता है।
प्र2.
लेखक और सेंगमा ने पहले क्या-क्या सोचा था? उनकी बात गलत क्यों निकली?
उत्तर

पहले दोनों ने दो बातें सोचीं —

  1. लेखक ने सोचा कि सेंगमा से कोई नल खुला रह गया होगा।
  2. सेंगमा ने कहा — “सर, कहीं पानी की टंकी तो लीक नहीं कर रही?”

दोनों बातें गलत निकलीं। रचना में लिखा है — “मैंने सारे नल देखे। सभी अच्छी तरह से बंद थे।” टंकी भी देखी गई, पर कुछ समझ नहीं आया।

क्यों गलत निकलीं: दोनों ने घर के भीतर ही कारण ढूँढ़ा। असली कारण बाहर था — खुली खिड़की और नीचे तैरते बादल। जब तक कांग ने खिड़की के बारे में नहीं पूछा, तब तक बात समझ नहीं आई।
प्र3.
कांग ने घर देखकर क्या पूछा और उन्होंने क्या बताया?
उत्तर

कांग लेखक का टिफिन लेकर आई थीं। उन्होंने पहले घर को देखा, फिर मुस्कुराते हुए पूछा — “खिड़की खुली थी क्या बाबा?” लेखक ने कहा, “हाँ।”

तब वे हँसीं और बोलीं, “खिड़की खुली रखेगा तो बादल तो घर में आएगा ही न।” उन्होंने आगे बताया — “बरसाती दिनों में बादल बहुत नीचे तैरते हैं। ऐसे में खिड़की-दरवाजे खुले मिल जाएँ तो वे घर को अपना समझकर चले आते हैं और सब कुछ गीला कर जाते हैं।”

कांग को पता कैसे था: वे उसी जगह की रहने वाली थीं। अपने आस-पास को रोज देखने वाला व्यक्ति उसकी बातें अच्छी तरह जानता है।
संकेत: रचना का शीर्षक ‘चेरापूँजी के मेहमान’ इसीलिए है — यहाँ बादल ही बिन बुलाए मेहमान बनकर घर आ गए।
प्र4.
‘आसमान गिरा’ कहानी और ‘चेरापूँजी के मेहमान’ रचना में क्या बात एक जैसी है?
उत्तर

दोनों में एक ही बात एक जैसी है — पहले सबने गलत कारण सोच लिया, बाद में सच पता चला।

आसमान गिराचेरापूँजी के मेहमान
पहले क्या सोचाआसमान गिर रहा हैनल खुला रह गया या टंकी लीक है
सच क्या थापेड़ से बड़ा फल गिरा थाखुली खिड़की से बादल घर में आ गए
सच किसने बतायाशेर ने — “चलो, चलकर देखें।”कांग ने — “खिड़की खुली थी क्या बाबा?”
अंत मेंसभी हँसने लगेकांग हँसीं और बात समझाई
दोनों की सीख: जब कुछ समझ न आए तो घबराइए मत। रुककर देखिए और सही प्रश्न पूछिए। सच अक्सर बहुत सीधा-सा निकलता है।
क्या यह उपयोगी रहा?