कक्षा ४ हिंदी अध्याय 8 पाठ के भीतर के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
(क) ओणम के भोज में कौन-कौन से भोज्य पदार्थ बनाए जाते हैं? किसी एक भोज्य पदार्थ के बारे में विस्तार से लिखिए।
उत्तर

ओणम के भोज में चावल, सब्जियाँ, खीर, पापड़ और कई प्रकार के स्वादिष्ट फल होते हैं।

पाठ की पंक्ति है — “ओणम के भोज में चावल, सब्जियाँ, खीर, पापड़ और कई प्रकार के स्वादिष्ट फल होते हैं।”

पाठ यह भी बताता है कि ओणम के उपलक्ष्य में विशेष प्रीतिभोज आयोजित किए जाते हैं। प्रीतिभोज के बाद लोग खेल-कूद, कविता-प्रसंग, संगीत या नृत्य में हिस्सा लेते हैं।

एक भोज्य पदार्थ — खीर (नमूना उत्तर):

  • खीर एक मीठा पकवान है। यह चावल और दूध से बनती है।
  • दूध को धीमी आँच पर गाढ़ा किया जाता है। उसमें थोड़े-से चावल डाले जाते हैं।
  • चावल गल जाने पर चीनी मिलाई जाती है।
  • ऊपर से मेवे डालकर इसे परोसा जाता है।
  • खीर सब उम्र के लोगों को पसंद आती है, इसलिए त्योहार के भोज में यह जरूर बनती है।
संकेत: पुस्तक केवल पकवानों के नाम देती है, बनाने की विधि नहीं। इसलिए ऊपर का विवरण नमूने के रूप में दिया गया है। आप अपने घर के किसी बड़े से पूछकर अपनी भाषा में लिख सकते हैं।
प्र2.
(ख) आपके राज्य में कौन-से त्योहार विशेष रूप से मनाए जाते हैं? उन त्योहारों की कौन-सी बातें ओणम से मिलती-जुलती हैं?
उत्तर

यह उत्तर आपके अपने राज्य पर निर्भर करता है। इसे दो हिस्सों में लिखिए —

  1. पहले अपने राज्य के दो-तीन खास त्योहारों के नाम लिखिए।
  2. फिर ओणम से मिलती-जुलती बातें छाँटिए — जैसे रंगोली बनाना, नए कपड़े पहनना, मिल-जुलकर भोज करना, खेल या नृत्य होना, फसल से जुड़ा होना।

नमूना उत्तर: मेरे राज्य में दीपावली और होली विशेष रूप से मनाई जाती हैं। इनकी कई बातें ओणम से मिलती-जुलती हैं —

ओणम मेंहमारे त्योहार में
आँगन में पूक्कलम (फूलों की रंगोली) बनती हैदीपावली पर द्वार के आगे रंगोली बनाई जाती है
घर का हर सदस्य नए कपड़े पहनता हैहमारे यहाँ भी सब नए कपड़े पहनते हैं
विशेष प्रीतिभोज होता हैघर में पकवान बनते हैं और सब साथ खाते हैं
खेल-कूद, संगीत और नृत्य होता हैहोली पर गीत गाए जाते हैं और नाच होता है
यह खेतों की उपज से जुड़ा त्योहार हैदीपावली भी फसल कटने के बाद आती है
क्यों मिलती-जुलती हैं: हर त्योहार का मूल भाव एक ही है — मिलकर खुश होना और मेहनत के बाद आराम का दिन मनाना।
प्र3.
(ग) ओणम में गाए जाने वाले लोकगीत में महाबली के शासन की किन विशेषताओं का उल्लेख है?
उत्तर

लोकगीत में महाबली के शासन की ये विशेषताएँ बताई गई हैं —

  • सब लोग एक समान थे — कोई ऊँचा या नीचा नहीं था।
  • दुख और दरिद्रता का नाम तक नहीं था।
  • न डाका पड़ता था, न किसी के साथ धोखा होता था।
  • कोई झूठे वचन नहीं बोलता था।
  • तराजू जाली नहीं थी और नाप में कमी नहीं की जाती थी।
  • छल-कपट का कोई प्रपंच नहीं था।
  • हर कहीं प्रेम और प्रसन्नता छाई रहती थी।

गीत की पंक्तियाँ हैं —

“महाबली के राज में, / सब जन एक समान। / दुख-दरिद्रता का नाम नहीं, / डाका नहीं, धोखा नहीं, / झूठे वचन कोई नहीं, / जाली तराजू नहीं, नाप में कमती नहीं, / छल-कपट का प्रपंच नहीं, / हर कहीं प्रेम-प्रसन्नता छा रही।”

क्यों यह गीत आज भी गाया जाता है: पाठ कहता है कि यह लोकगीत “लोगों के होठों पर अब भी जीवित है।” लोग इसे गाकर याद करते हैं कि अच्छा राज कैसा होता है।
शब्द समझिए: जाली तराजू माने गलत तराजू, जिससे कम तौला जाए। कमती माने कमी। प्रपंच माने छल-कपट का जाल।
प्र4.
(घ) पाठ में आए किस उल्लेख के आधार पर कहा जा सकता है कि महाबली अपनी प्रजा से बहुत ही प्रेम करते थे?
उत्तर

सबसे बड़ा प्रमाण उनकी अंतिम याचना है।

पाठ में लिखा है — “महाबली ने पाताल जाने के पहले एक याचना की कि वर्ष में केवल एक बार उन्हें अपनी प्रजा से मिलने के लिए धरती पर आने की अनुमति दी जाए।”

क्यों यह प्रेम दिखाता है: महाबली अपना पूरा राज्य खो चुके थे। वे चाहते तो अपने लिए धन या राज माँग सकते थे। पर उन्होंने केवल इतना माँगा कि अपनी प्रजा से मिल सकें। जिसे अपनी प्रजा सबसे प्यारी हो, वही ऐसी माँग करता है।

एक और पंक्ति भी यही बात कहती है — “महाबली के राज में लोग पूरी तरह प्रसन्न थे।” राजा तभी प्रजा को प्रसन्न रख पाता है जब वह उससे प्रेम करता हो।

प्र5.
(ङ) पाठ में आई किन बातों से पता चलता है कि प्रकृति भी ओणम के स्वागत की तैयारी कर रही है?
उत्तर

पाठ में प्रकृति की ये तैयारियाँ बताई गई हैं —

  • वर्षा के बादल छँट जाते हैं और ठंडी-ठंडी तेज हवाएँ थम जाती हैं।
  • केरल का प्राकृतिक सौंदर्य निखर उठता है।
  • सूरज निकलते ही पश्चिमी तट पर समुद्र की लहरें चमकने लगती हैं।
  • समुद्र-तट की रेत के कण दमकने लगते हैं।
  • हल्की-हल्की बयार के झोंकों से नारियल के पेड़ों के पत्ते लहलहाने लगते हैं।
  • नदी का निर्मल और स्वच्छ जल वातावरण को सुंदर बना देता है।
  • तरह-तरह के चहचहाते पक्षी आसमान में उड़ते हुए अठखेलियाँ करते हैं।
  • रंग-बिरंगी तितलियाँ खिले फूलों पर मँडराती दिखाई देती हैं।

इन्हीं को देखकर लेखक कहता है — “ऐसा लगता है मानो प्रकृति केरलवासियों के महोत्सव ओणम के स्वागत की पूरी तैयारी कर चुकी है।”

क्यों ऐसा लगता है: जब हम किसी मेहमान का स्वागत करते हैं तो घर साफ करते हैं और सजाते हैं। यहाँ प्रकृति भी ठीक वैसा ही करती दिखती है — आसमान साफ, पानी स्वच्छ, पेड़ हरे और फूल खिले हुए।
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