कक्षा ५ गणित अध्याय 13 आइए करके देखें (प्रश्न 6–7) के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
6. पता लगाइए कि 4 कदमों की छलाँग द्वारा नीचे दी गई संख्याओं में से किन संख्याओं पर पहुँचा जा सकता है?
01016273648
पृष्ठ 169, प्रश्न 6 — संख्या-रेखा जिस पर 0, 10, 16, 27, 36 और 48 अंकित हैं।

4, संख्याओं ____________ का उभयनिष्ठ गुणनखंड है।

उत्तर

4 कदमों की छलाँग 16, 36 और 48 तक पहुँचती है। 10 और 27 तक नहीं पहुँचती।

4, संख्याओं 16, 36 व 48 का उभयनिष्ठ गुणनखंड है।
0 से 4 की छलाँगें01016273648
लाल बिंदु 4 की छलाँगों के पड़ाव हैं। वे 16, 36 और 48 पर पड़ते हैं, पर 10 और 27 के ऊपर से निकल जाते हैं।
संख्या4 का भागपहुँचा जा सकता है?
1010 ÷ 4 = 2, शेष 2नहीं
1616 ÷ 4 = 4, शेष 0हाँ
2727 ÷ 4 = 6, शेष 3नहीं
3636 ÷ 4 = 9, शेष 0हाँ
4848 ÷ 4 = 12, शेष 0हाँ
ऐसा क्यों होता है: 4 की छलाँग 4, 8, 12, 16, 20, 24, 28, 32, 36, 40, 44, 48 पर उतरती है — यानी 4 के पहाड़े पर। 10, 8 और 12 के बीच है तथा 27, 24 और 28 के बीच, इसलिए छलाँगें उनके ऊपर से निकल जाती हैं। साथ ही 27 विषम संख्या है, और 4 की छलाँग कभी विषम संख्या पर नहीं उतरती।
प्र2.
7. (क) 12 और 16
उत्तर

12 व 16 के उभयनिष्ठ गुणनखंड: 1, 2, 4.

12 के गुणनखंड1, 2, 3, 4, 6, 12
16 के गुणनखंड1, 2, 4, 8, 16
उभयनिष्ठ गुणनखंड1, 2, 4
  1. 12 के सभी गुणनखंड लिखिए।
  2. 16 के सभी गुणनखंड लिखिए।
  3. दोनों सूचियों में जो संख्याएँ समान हैं, उन्हें छाँटिए। ये हैं 1, 2, 4।
ऐसा क्यों होता है: दोनों संख्याएँ 4-4 से बनी हैं: 12 = 4 × 3 और 16 = 4 × 4। इसलिए 4 दोनों को विभाजित करता है, और 4 के अपने गुणनखंड 1 व 2 भी। पर 3 केवल 12 को बाँटता है और 8 केवल 16 को।
प्र3.
7. (ख) 8 और 12
उत्तर

8 व 12 के उभयनिष्ठ गुणनखंड: 1, 2, 4.

8 के गुणनखंड1, 2, 4, 8
12 के गुणनखंड1, 2, 3, 4, 6, 12
उभयनिष्ठ गुणनखंड1, 2, 4
  1. 8 के सभी गुणनखंड लिखिए।
  2. 12 के सभी गुणनखंड लिखिए।
  3. दोनों सूचियों में जो संख्याएँ समान हैं, उन्हें छाँटिए। ये हैं 1, 2, 4।
ऐसा क्यों होता है: 8 = 4 × 2 और 12 = 4 × 3। इसलिए सबसे बड़ा उभयनिष्ठ गुणनखंड 4 है, और उभयनिष्ठ गुणनखंड ठीक 4 के गुणनखंड ही हैं — 1, 2 और 4।
प्र4.
7. (ग) 4 और 16
उत्तर

4 व 16 के उभयनिष्ठ गुणनखंड: 1, 2, 4.

4 के गुणनखंड1, 2, 4
16 के गुणनखंड1, 2, 4, 8, 16
उभयनिष्ठ गुणनखंड1, 2, 4
  1. 4 के सभी गुणनखंड लिखिए।
  2. 16 के सभी गुणनखंड लिखिए।
  3. दोनों सूचियों में जो संख्याएँ समान हैं, उन्हें छाँटिए। ये हैं 1, 2, 4।
ऐसा क्यों होता है: 4 स्वयं 16 का गुणनखंड है, क्योंकि 16 = 4 × 4। जब छोटी संख्या बड़ी संख्या को विभाजित कर दे, तब उभयनिष्ठ गुणनखंड छोटी संख्या के सारे गुणनखंड ही होते हैं।
प्र5.
7. (घ) 2 और 9
उत्तर

2 व 9 के उभयनिष्ठ गुणनखंड: 1.

2 के गुणनखंड1, 2
9 के गुणनखंड1, 3, 9
उभयनिष्ठ गुणनखंड1
  1. 2 के सभी गुणनखंड लिखिए।
  2. 9 के सभी गुणनखंड लिखिए।
  3. दोनों सूचियों में जो संख्याएँ समान हैं, उन्हें छाँटिए। ये हैं 1।
ऐसा क्यों होता है: 2 सम है और 9 विषम, इसलिए 2, 9 को नहीं बाँट सकता। और 9 के बाकी गुणनखंड 3 व 9, 2 को बाँटने के लिए बहुत बड़े हैं। इसलिए केवल 1 बचता है।
ध्यान दीजिए: जब 1 ही एकमात्र उभयनिष्ठ गुणनखंड हो, तो दोनों संख्याओं में और कुछ भी साझा नहीं होता।
प्र6.
7. (ङ) 5 और 5
उत्तर

5 व 5 के उभयनिष्ठ गुणनखंड: 1, 5.

5 के गुणनखंड1, 5
5 के गुणनखंड1, 5
उभयनिष्ठ गुणनखंड1, 5
  1. 5 के सभी गुणनखंड लिखिए।
  2. 5 के सभी गुणनखंड लिखिए।
  3. दोनों सूचियों में जो संख्याएँ समान हैं, उन्हें छाँटिए। ये हैं 1, 5।
ऐसा क्यों होता है: यहाँ दोनों संख्याएँ एक ही हैं। किसी संख्या के अपने साथ उभयनिष्ठ गुणनखंड उसके सारे गुणनखंड ही होते हैं। 5 अभाज्य संख्या है, इसलिए उसके केवल दो गुणनखंड हैं — 1 और 5।
पुस्तकों में अंतर: गणित मेला (अंग्रेज़ी संस्करण) में यही मद “3 and 5” छपा है, जबकि गणित मेला (हिंदी) में यह “5 और 5” है। यदि आपके शिक्षक 3 व 5 पूछें तो उत्तर होगा — केवल 1, क्योंकि 3 और 5 दोनों अभाज्य संख्याएँ हैं।
प्र7.
7. (च) 12 और 15
उत्तर

12 व 15 के उभयनिष्ठ गुणनखंड: 1, 3.

12 के गुणनखंड1, 2, 3, 4, 6, 12
15 के गुणनखंड1, 3, 5, 15
उभयनिष्ठ गुणनखंड1, 3
  1. 12 के सभी गुणनखंड लिखिए।
  2. 15 के सभी गुणनखंड लिखिए।
  3. दोनों सूचियों में जो संख्याएँ समान हैं, उन्हें छाँटिए। ये हैं 1, 3।
ऐसा क्यों होता है: दोनों संख्याएँ 3 के पहाड़े में हैं: 12 = 3 × 4 और 15 = 3 × 5। इसलिए 3 उभयनिष्ठ गुणनखंड है। पर 12 सम है और 15 विषम, इसलिए 2 उभयनिष्ठ नहीं है।
प्र8.
7. (छ) 20 और 5
उत्तर

20 व 5 के उभयनिष्ठ गुणनखंड: 1, 5.

20 के गुणनखंड1, 2, 4, 5, 10, 20
5 के गुणनखंड1, 5
उभयनिष्ठ गुणनखंड1, 5
  1. 20 के सभी गुणनखंड लिखिए।
  2. 5 के सभी गुणनखंड लिखिए।
  3. दोनों सूचियों में जो संख्याएँ समान हैं, उन्हें छाँटिए। ये हैं 1, 5।
ऐसा क्यों होता है: 5, 20 को पूरा-पूरा विभाजित करता है क्योंकि 20 = 5 × 4। इसलिए उभयनिष्ठ गुणनखंड 5 के सारे गुणनखंड हैं, यानी 1 और 5।
प्र9.
7. (ज) 9 और 21
उत्तर

9 व 21 के उभयनिष्ठ गुणनखंड: 1, 3.

9 के गुणनखंड1, 3, 9
21 के गुणनखंड1, 3, 7, 21
उभयनिष्ठ गुणनखंड1, 3
  1. 9 के सभी गुणनखंड लिखिए।
  2. 21 के सभी गुणनखंड लिखिए।
  3. दोनों सूचियों में जो संख्याएँ समान हैं, उन्हें छाँटिए। ये हैं 1, 3।
ऐसा क्यों होता है: 9 = 3 × 3 और 21 = 3 × 7। दोनों में केवल 3 साझा है, इसलिए उभयनिष्ठ गुणनखंड 1 और 3 हैं।
प्र10.
7. (झ) 6 और 27
उत्तर

6 व 27 के उभयनिष्ठ गुणनखंड: 1, 3.

6 के गुणनखंड1, 2, 3, 6
27 के गुणनखंड1, 3, 9, 27
उभयनिष्ठ गुणनखंड1, 3
  1. 6 के सभी गुणनखंड लिखिए।
  2. 27 के सभी गुणनखंड लिखिए।
  3. दोनों सूचियों में जो संख्याएँ समान हैं, उन्हें छाँटिए। ये हैं 1, 3।
ऐसा क्यों होता है: 6 = 3 × 2 और 27 = 3 × 9। दोनों में 3 साझा है। पर 6 सम है और 27 विषम, इसलिए 2 साझा नहीं है।
प्र11.
विभिन्न संख्या-युग्मों के उभयनिष्ठ गुणनखंडों के बारे में आपने क्या ध्यान दिया? कक्षा में चर्चा कीजिए।
उत्तर

नमूना उत्तर: हर संख्या-युग्म का कम-से-कम एक उभयनिष्ठ गुणनखंड होता है — संख्या 1। कुछ युग्मों में इसके अलावा कुछ नहीं होता। उभयनिष्ठ गुणनखंडों की सूची सदा छोटी होती है और सदा खत्म हो जाती है; वह दोनों में की छोटी संख्या से आगे कभी नहीं जाती।

युग्म का प्रकारइस अभ्यास से उदाहरणउभयनिष्ठ गुणनखंड
छोटी संख्या बड़ी को विभाजित करती है4 व 16; 20 व 5छोटी संख्या के सारे गुणनखंड
1 से बड़ा गुणनखंड साझा है12 व 16; 12 व 15; 9 व 21; 6 व 271 और वह साझा गुणनखंड (तथा उसके गुणनखंड)
1 के अलावा कुछ साझा नहीं2 व 9केवल 1

चार बातें ध्यान देने योग्य:

  1. 1 हर युग्म का उभयनिष्ठ गुणनखंड है। 1 कदम की छलाँग हर संख्या पर उतरती है।
  2. उभयनिष्ठ गुणनखंडों की सूची सदा खत्म होती है — उभयनिष्ठ गुणजों की तरह अनंत नहीं।
  3. कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड छोटी संख्या से बड़ा नहीं होता। 9 व 21 में 9 से बड़ी कोई संख्या उभयनिष्ठ गुणनखंड नहीं हो सकती।
  4. पूरी सूची, सबसे बड़े उभयनिष्ठ गुणनखंड के गुणनखंडों से बनी होती है। 12 व 16 में सबसे बड़ा 4 है, और सूची 1, 2, 4 ठीक 4 के गुणनखंड हैं।
ऐसा क्यों होता है: उभयनिष्ठ गुणनखंड को दोनों संख्याओं में समाना पड़ता है। छोटी संख्या ही सीमा तय कर देती है, क्योंकि किसी संख्या से बड़ी कोई संख्या उसे विभाजित नहीं कर सकती।
क्या यह उपयोगी रहा?