कक्षा ५ गणित अध्याय 13 आइए करके देखें के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
(क) 10
उत्तर

10 के गुणनखंड: 1, 2, 5, 10। कुल 4 गुणनखंड।

2 × 5 = 101 × 10 = 10
10 के व्यूह। हर आयत गुणनखंडों का एक जोड़ा देता है।
1 × 10 = 10 → गुणनखंड 110
2 × 5 = 10 → गुणनखंड 25

10 के सभी गुणनखंड = 1, 2, 5, 10
ऐसा क्यों होता है: 10 गोटियों को 10 की एक पंक्ति में या 5-5 की 2 पंक्तियों में सजाया जा सकता है। 3 या 4 बराबर पंक्तियाँ नहीं बनतीं, इसलिए 3 और 4, 10 के गुणनखंड नहीं हैं।
स्वयं जाँचिए: 2 × 5 = 10 और 1 × 10 = 10 — दोनों जोड़े 10 देते हैं ✓
प्र2.
(ख) 14
उत्तर

14 के गुणनखंड: 1, 2, 7, 14। कुल 4 गुणनखंड।

2 × 7 = 141 × 14 = 14
14 के व्यूह। हर आयत गुणनखंडों का एक जोड़ा देता है।
1 × 14 = 14 → गुणनखंड 114
2 × 7 = 14 → गुणनखंड 27

14 के सभी गुणनखंड = 1, 2, 7, 14
ऐसा क्यों होता है: 14 सम संख्या है, इसलिए 7-7 की 2 पंक्तियाँ बन जाती हैं। इसके बाद 3, 4, 5 और 6 — हर बार कुछ गोटियाँ बच जाती हैं।
प्र3.
(ग) 13
उत्तर

13 के गुणनखंड: 1, 13। कुल 2 गुणनखंड।

1 × 13 = 13
13 के लिए केवल एक ही आयत बनता है — एक पंक्ति।
1 × 13 = 13 → गुणनखंड 113

13 के सभी गुणनखंड = 1, 13
ऐसा क्यों होता है: 13 गोटियाँ केवल एक ही पंक्ति में सज सकती हैं। 2 पंक्तियाँ बनाइए तो 6 और 7 मिलती हैं, जो बराबर नहीं हैं। 3, 4, 5, 6 — हर बार कुछ गोटियाँ बच जाती हैं। इसलिए 13 के केवल दो गुणनखंड हैं।
क्या आप जानते हैं? जिस संख्या के ठीक दो गुणनखंड हों — 1 और वह स्वयं — उसे अभाज्य संख्या कहते हैं। 13 अभाज्य है।
प्र4.
(घ) 20
उत्तर

20 के गुणनखंड: 1, 2, 4, 5, 10, 20। कुल 6 गुणनखंड।

4 × 5 = 202 × 10 = 20
20 के व्यूह। हर आयत गुणनखंडों का एक जोड़ा देता है।
1 × 20 = 20 → गुणनखंड 120
2 × 10 = 20 → गुणनखंड 210
4 × 5 = 20 → गुणनखंड 45

20 के सभी गुणनखंड = 1, 2, 4, 5, 10, 20
ऐसा क्यों होता है: एक-एक करके जाँचिए। 20 ÷ 1 = 20 ✓, 20 ÷ 2 = 10 ✓, 20 ÷ 3 में 2 शेष ✗, 20 ÷ 4 = 5 ✓, 20 ÷ 5 = 4 ✓। 4 × 5 के बाद जोड़े दोहराने लगते हैं, इसलिए वहीं रुक जाइए।
प्र5.
(ङ) 25
उत्तर

25 के गुणनखंड: 1, 5, 25। कुल 3 गुणनखंड।

5 × 5 = 25
25 गोटियों से पूरा वर्ग बनता है: 5-5 की 5 पंक्तियाँ।
1 × 25 = 25 → गुणनखंड 125
5 × 5 = 25 → गुणनखंड 55

25 के सभी गुणनखंड = 1, 5, 25

दूसरा आयत 25 गोटियों की एक पंक्ति है, जिससे गुणनखंड 1 और 25 मिलते हैं।

ऐसा क्यों होता है: 25 से पूरा वर्ग बनता है — 5-5 की 5 पंक्तियाँ। जब किसी संख्या से वर्ग बनता है तो उस जोड़े के दोनों गुणनखंड एक ही होते हैं, इसलिए उसे एक ही बार गिना जाता है। यही कारण है कि 25 के गुणनखंड विषम संख्या में, यानी तीन हैं।
यह भी कीजिए: और कौन-सी संख्याओं से पूरा वर्ग बनता है? 4 (2 × 2), 9 (3 × 3), 16 (4 × 4), 36 (6 × 6)।
प्र6.
(च) 32
उत्तर

32 के गुणनखंड: 1, 2, 4, 8, 16, 32। कुल 6 गुणनखंड।

4 × 8 = 322 × 16 = 32
32 के व्यूह। हर आयत गुणनखंडों का एक जोड़ा देता है।
1 × 32 = 32 → गुणनखंड 132
2 × 16 = 32 → गुणनखंड 216
4 × 8 = 32 → गुणनखंड 48

32 के सभी गुणनखंड = 1, 2, 4, 8, 16, 32
ऐसा क्यों होता है: 32 बार-बार आधा होता जाता है — 32, 16, 8, 4, 2, 1। ये सभी गुणनखंड हैं। 1 के अलावा कोई विषम संख्या 32 को नहीं बाँटती, क्योंकि 32 केवल 2 से बना है: 2 × 2 × 2 × 2 × 2 = 32।
प्र7.
(छ) 37
उत्तर

37 के गुणनखंड: 1, 37। कुल 2 गुणनखंड।

1 × 37 = 37
37 गोटियों से केवल एक ही आयत बनता है — एक लंबी पंक्ति।
1 × 37 = 37 → गुणनखंड 137

37 के सभी गुणनखंड = 1, 37
ऐसा क्यों होता है: 2, 3, 4, 5, 6 पंक्तियाँ बनाकर देखिए — हर बार कुछ गोटियाँ बच जाती हैं। केवल एक लंबी पंक्ति ही बनती है।
क्या आप जानते हैं? 37 भी 13 की तरह अभाज्य संख्या है।
प्र8.
(ज) 46
उत्तर

46 के गुणनखंड: 1, 2, 23, 46। कुल 4 गुणनखंड।

2 × 23 = 46
46 गोटियाँ — 23-23 की 2 पंक्तियाँ। दूसरा आयत 46 की एक पंक्ति है।
1 × 46 = 46 → गुणनखंड 146
2 × 23 = 46 → गुणनखंड 223

46 के सभी गुणनखंड = 1, 2, 23, 46
ऐसा क्यों होता है: 46 सम है, इसलिए 23-23 की 2 पंक्तियाँ बनती हैं। इसके बाद 3 से लेकर 22 तक कुछ भी नहीं चलता, क्योंकि 23 स्वयं अभाज्य संख्या है।
प्र9.
(झ) 54
उत्तर

54 के गुणनखंड: 1, 2, 3, 6, 9, 18, 27, 54। कुल 8 गुणनखंड।

6 × 9 = 543 × 18 = 54
54 के व्यूह। हर आयत गुणनखंडों का एक जोड़ा देता है।
1 × 54 = 54 → गुणनखंड 154
2 × 27 = 54 → गुणनखंड 227
3 × 18 = 54 → गुणनखंड 318
6 × 9 = 54 → गुणनखंड 69

54 के सभी गुणनखंड = 1, 2, 3, 6, 9, 18, 27, 54
ऐसा क्यों होता है: 54 सम है, इसलिए 2 गुणनखंड है। 5 + 4 = 9 और 9, 3 के पहाड़े में आता है, इसलिए 3 भी गुणनखंड है। जोड़े बनाने पर 1 × 54, 2 × 27, 3 × 18 और 6 × 9 मिलते हैं — कुल आठ गुणनखंड।
स्वयं जाँचिए: 6 × 9 = 54 ✓ और 3 × 18 = 54 ✓
प्र10.
संख्याएँ जैसे 13 व 37, अभाज्य संख्याएँ कहलाती हैं। क्यों?
उत्तर

क्योंकि 13 और 37 के ठीक दो-दो ही गुणनखंड हैं — 1 और वह संख्या स्वयं। इनके अलावा कोई संख्या इन्हें नहीं बाँटती।

यह व्यूह में साफ दिखता है। ज्यादातर संख्याओं के एक से अधिक आयत बनते हैं। 13 और 37 का केवल एक ही आयत बनता है — एक लंबी पंक्ति।

संख्याकौन-कौन से आयत बनते हैंगुणनखंडअभाज्य?
101 × 10, 2 × 51, 2, 5, 10नहीं — चार गुणनखंड
13केवल 1 × 131, 13हाँ
141 × 14, 2 × 71, 2, 7, 14नहीं
37केवल 1 × 371, 37हाँ
ऐसा क्यों होता है: 13 अभाज्य है या नहीं, यह जाँचने के लिए 13 गोटियों को बराबर समूहों में बाँटिए। 2-2 के समूह बनाने पर 1 बच जाती है। 3-3 के समूह बनाने पर भी 1 बचती है। 4, 5, 6 — सबमें कुछ न कुछ बचता है। 2 से 12 तक कोई भी संख्या 13 को नहीं बाँटती, इसलिए केवल 1 और 13 ही गुणनखंड बचते हैं।
ध्यान दीजिए: 40 तक की अभाज्य संख्याएँ हैं — 2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19, 23, 29, 31 और 37। 1 अभाज्य नहीं है, क्योंकि उसका केवल एक गुणनखंड है, दो नहीं।
क्या यह उपयोगी रहा?