कक्षा ५ गणित अध्याय 4 सबसे लंबा भू-मार्ग के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
उत्तर-दक्षिण गलियारे पर स्थित किसी एक स्थान की दूरी श्रीनगर से 1,855 किलोमीटर और कन्याकुमारी से दूरी 1,862 किलोमीटर थी। 2019 में उत्तर-दक्षिण गलियारे की कुल लंबाई क्या थी?
उत्तर

उत्तर-दक्षिण गलियारे की कुल लंबाई 3,717 किलोमीटर थी।

मानचित्र पर अंकित स्थान पूरे मार्ग को दो भागों में बाँट देता है। एक भाग श्रीनगर तक जाता है, दूसरा कन्याकुमारी तक। दोनों भागों को मिलाने से पूरा मार्ग मिल जाता है।

कुल लंबाई = 1,855 किलोमीटर + 1,862 किलोमीटर
  1. इकाई: 5 + 2 = 7। 7 लिखिए।
  2. दहाई: 5 + 6 = 11। 1 लिखिए और 1 सैकड़ा हासिल।
  3. सैकड़ा: 8 + 8 = 16, और हासिल का 1 मिलाकर 17। 7 लिखिए और 1 हजार हासिल।
  4. हजार: 1 + 1 = 2, और हासिल का 1 मिलाकर 3। 3 लिखिए।
ह.सै.द.इ.
1 (हासिल)1 (हासिल)
1855
+ 1862
3717
उत्तर-दक्षिण गलियारे की कुल लंबाई = 3,717 किलोमीटर
पुस्तक में ध्यान देने योग्य बात: पाठ के साथ छपे मानचित्र पर उत्तरी भाग के लिए 1885 कि.मी. लिखा है, पर अनुच्छेद में 1,855 किलोमीटर दिया गया है और पृष्ठ 47 की हल की गई गणना भी 1,855 ही लेती है। अत: 1,855 किलोमीटर ही लीजिए — मानचित्र का अंक छपाई की भूल है।
प्र2.
क्या आपको याद है कि बड़ी संख्याओं का योग कैसे किया जाता है?
उत्तर

हाँ — बड़ी संख्या का योग ठीक उसी विधि से होता है जैसे छोटी संख्या का। केवल स्तंभों की गिनती बदलती है।

  1. संख्याओं को एक के नीचे एक इस प्रकार लिखिए कि इकाई के नीचे इकाई, दहाई के नीचे दहाई, सैकड़ा के नीचे सैकड़ा और हजार के नीचे हजार आए।
  2. सबसे पहले इकाई का स्तंभ जोड़िए।
  3. यदि किसी स्तंभ में 10 या अधिक आ जाए तो वहाँ केवल इकाई अंक रखिए और 1 बाईं ओर के स्तंभ में हासिल ले जाइए।
  4. एक-एक स्तंभ बाईं ओर बढ़ते जाइए जब तक अंतिम स्तंभ पूरा न हो जाए।
विधि क्यों नहीं बदलती: दस इकाई सदैव एक दहाई बनती हैं, दस दहाई सदैव एक सैकड़ा और दस सैकड़ा सदैव एक हजार। दस छोटी इकाइयों के बदले एक बड़ी इकाई लेने का नियम हर स्थान पर एक ही है, इसलिए संख्या जितनी लंबी हो, वही विधि आगे चलती रहती है।
1,855 + 1,862
इकाई: 5 + 2 = 7
दहाई: 5 + 6 = 11 → 1 लिखिए, 1 हासिल
सैकड़ा: 8 + 8 + 1 = 17 → 7 लिखिए, 1 हासिल
हजार: 1 + 1 + 1 = 3
3,717
प्र3.
महेश और उसके परिवार ने श्रीनगर से कन्याकुमारी तक गाड़ी से यात्रा करने का निर्णय लिया। वे यात्रा के समय ईंधन और सड़क शुल्क पर ₹21,880 और अन्य खर्चों पर ₹38,900 व्यय करते हैं। उन्होंने कुल कितनी राशि व्यय की?
उत्तर

महेश ने कुल ₹60,780 व्यय किए।

दो राशियाँ दी गई हैं और हमें उन्हें एक साथ मिलाना है। इसलिए योग करेंगे।

कुल व्यय = ₹21,880 + ₹38,900
  1. इकाई: 0 + 0 = 0।
  2. दहाई: 8 + 0 = 8।
  3. सैकड़ा: 8 + 9 = 17। 7 लिखिए और 1 हजार हासिल।
  4. हजार: 1 + 8 = 9, और हासिल का 1 मिलाकर 10। 0 लिखिए और 1 दस हजार हासिल।
  5. दस हजार: 2 + 3 = 5, और हासिल का 1 मिलाकर 6। 6 लिखिए।
दस ह.ह.सै.द.इ.
1 (हासिल)1 (हासिल)
21880
+ 38900
60780
कुल व्यय की गई राशि = ₹60,780
स्वयं जाँचिए: 60,780 − 38,900 = 21,880, जो ईंधन और सड़क शुल्क की राशि है ✓
प्र4.
आपके द्वारा योग किए गए अंकों के प्राप्त (हासिल) को अपने मन में स्मरण रखें। (उदाहरण: 267 + 54)
उत्तर

जब अंक ठीक से पंक्तिबद्ध हो जाएँ तो ऊपर दस ह., ह., सै., द. और इ. लिखने की आवश्यकता नहीं रहती। आँख स्वयं स्तंभ देख लेती है।

  2 6 7
+   5 4
———
  3 2 1
  1. संख्याओं को दाईं ओर से पंक्तिबद्ध कीजिए। 7 और 4 एक ही स्तंभ में हों, तथा 6 और 5 एक ही स्तंभ में। 2 अकेला रहता है।
  2. इकाई: 7 + 4 = 11। 1 लिखिए और 1 दहाई हासिल।
  3. दहाई: 6 + 5 = 11, और हासिल का 1 मिलाकर 12। 2 लिखिए और 1 सैकड़ा हासिल।
  4. सैकड़ा: 2 और हासिल का 1 मिलाकर 3। 3 लिखिए।
267 + 54 = 321
दाईं ओर से पंक्तिबद्ध करना क्यों आवश्यक है: अकेला अंक कुछ नहीं बताता — 5 का अर्थ पाँच भी हो सकता है, पचास भी और पाँच सौ भी। स्तंभ ही बताता है कि वह क्या है। यदि 54 एक स्तंभ बाईं ओर खिसक जाए तो आप भूल से 540 जोड़ बैठेंगे।
सुझाव: भिन्न लंबाई की संख्याओं में ही सबसे अधिक भूल होती है। सदैव इकाई की ओर से लिखना आरंभ कीजिए, बाईं ओर से नहीं।
क्या यह उपयोगी रहा?