सम संख्याएँ हैं — (ख) 498, (ग) 724, (घ) 100, (झ) 846 और (ट) 222। इन्हीं पाँच पर गोला लगाइए।
एक ही नज़र में पहचानने का तरीका: केवल अंतिम अंक देखिए। यदि संख्या 0, 2, 4, 6 अथवा 8 पर समाप्त होती है तो वह सम है। यदि 1, 3, 5, 7 अथवा 9 पर समाप्त होती है तो विषम है।
संख्या
अंतिम अंक
सम अथवा विषम
(क) 297
7
विषम
(ख) 498
8
सम
(ग) 724
4
सम
(घ) 100
0
सम
(ङ) 199
9
विषम
(च) 789
9
विषम
(छ) 49
9
विषम
(ज) 6,893
3
विषम
(झ) 846
6
सम
(ञ) 111
1
विषम
(ट) 222
2
सम
(ठ) 1,023
3
विषम
केवल अंतिम अंक ही क्यों देखते हैं: दहाई, सैकड़ा और हजार को सदैव दो बराबर समूहों में बाँटा जा सकता है — 10 का 5 और 5, 100 का 50 और 50। इसलिए वे कभी कुछ शेष नहीं छोड़ते। केवल इकाई का अंक ही एक गोटी शेष छोड़ सकता है, और वही तय करता है कि संख्या सम है या विषम।
प्र2.
दिए गए प्रबंध को ध्यान से देखिए।प्रश्न के साथ छपे हुए दोनों युग्म-क्रम। 18 में 2 का योग करें। प्रबंध में क्या कोई परिवर्तन होगा अथवा नहीं होगा? 23 में 2 का योग करें। प्रबंध में क्या कोई परिवर्तन होगा अथवा नहीं होगा?
उत्तर
दोनों स्थितियों में प्रबंध में एक और पूरा युग्म जुड़ जाता है। शेष कुछ बचता है या नहीं — यह नहीं बदलता।
सम संख्या में 2 जोड़ने पर केवल एक और पूरा युग्म बनता है, इसलिए वह सम ही रहती है।
18 में 2 जोड़िए
18, 9 पूरे युग्मों में सजा है और कोई गोटी अकेली नहीं बची। इसीलिए 18 सम है।
2 नई गोटियाँ अंत में एक और युग्म बना देती हैं।
अब 20, 10 पूरे युग्म हैं। कुछ शेष नहीं बचता।
क्या बदला: युग्मों की संख्या 9 से 10 हो गई। क्या नहीं बदला: अब भी कोई गोटी अकेली नहीं है — 20 भी सम है, जैसे 18 था।
23 में 2 जोड़िए
23, 11 पूरे युग्मों में सजा है और 1 गोटी शेष बचती है। इसीलिए 23 विषम है।
2 नई गोटियाँ एक और युग्म बना देती हैं।
अब 25, 12 पूरे युग्म हैं और 1 गोटी फिर भी शेष है।
क्या बदला: युग्मों की संख्या 11 से 12 हो गई। क्या नहीं बदला: अकेली गोटी अब भी वहीं है — 25 भी विषम है, जैसे 23 था।
मुख्य बात: 2 जोड़ने से सदैव ठीक एक पूरा युग्म जुड़ता है। यह न तो किसी अकेली गोटी को साथी दे सकता है, न कोई नई अकेली गोटी बना सकता है। इसलिए सम संख्या सम ही रहती है और विषम संख्या विषम ही।
प्र3.
निम्नलिखित प्रत्येक स्थिति में योगफल के विषय में आपकी क्या प्रतिक्रिया है? क्या आपको लगता है कि यह योगफल इस प्रकार के सभी संख्या युग्मों के लिए सत्य होगा? अपने प्रेक्षणों की व्याख्या कीजिए। आप युग्मों के क्रम का उपयोग अपने विचारों की अभिव्यक्ति में कर सकते हैं।प्रश्न के साथ छपे हुए दोनों युग्म-क्रम। (क) 12 और 6 एक सम संख्याओं का युग्म है। ऐसे 5 सम संख्याओं के युग्मों का चयन कीजिए। प्रत्येक युग्म की संख्याओं का योग कीजिए। (ख) 13 और 9 एक विषम संख्याओं का युग्म है। ऐसे 5 विषम संख्याओं के युग्मों का चयन कीजिए। प्रत्येक युग्म की संख्याओं का योग कीजिए। (ग) 7 और 12 एक सम और एक विषम संख्याओं का युग्म है। ऐसे 5 सम और विषम संख्याओं के युग्मों का चयन कीजिए। प्रत्येक युग्म की संख्याओं का योग कीजिए।
उत्तर
(क) सम + सम सदैव सम होता है। (ख) विषम + विषम सदैव सम होता है। (ग) विषम + सम सदैव विषम होता है। हाँ, ये सभी ऐसे युग्मों के लिए बिना किसी अपवाद के सत्य हैं।
(क) सम संख्याओं के पाँच युग्म
युग्म
योगफल
सम अथवा विषम
12 और 6
18
सम
8 और 4
12
सम
20 और 10
30
सम
14 और 16
30
सम
2 और 18
20
सम
हर सम संख्या केवल पूरे युग्मों से बनी होती है। ऐसे दो समूहों को मिलाने पर भी केवल पूरे युग्म ही रहते हैं — इसलिए योगफल सम होता है।
(ख) विषम संख्याओं के पाँच युग्म
युग्म
योगफल
सम अथवा विषम
13 और 9
22
सम
7 और 5
12
सम
11 और 3
14
सम
15 और 21
36
सम
1 और 9
10
सम
हर विषम संख्या एक गोटी अकेली छोड़ती है। दो विषम संख्याओं को मिलाने पर दोनों अकेली गोटियाँ एक-दूसरे से मिलकर एक युग्म बना लेती हैं। कुछ शेष नहीं बचता, इसलिए योगफल सम होता है।
दो विषम संख्याएँ एक-एक गोटी अकेली छोड़ती हैं; वे दोनों मिलकर युग्म बना लेती हैं, इसलिए योगफल सम होता है।
(ग) एक विषम और एक सम संख्या के पाँच युग्म
युग्म
योगफल
सम अथवा विषम
7 और 12
19
विषम
3 और 8
11
विषम
9 और 6
15
विषम
15 और 4
19
विषम
11 और 20
31
विषम
सम संख्या केवल पूरे युग्म लाती है। विषम संख्या पूरे युग्मों के साथ एक अकेली गोटी भी लाती है। उस गोटी के लिए दूसरी अकेली गोटी है ही नहीं, इसलिए वह अंत तक अकेली रहती है — योगफल विषम होता है।
स्वयं जाँचिए: कोई भी युग्म लीजिए — 100 और 46 से 146 (सम), 101 और 47 से 148 (सम), 101 और 46 से 147 (विषम)। नियम कभी नहीं टूटता।