कक्षा ५ गणित अध्याय 9 गणितीय कथन के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
1. पता लगाइए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं अथवा असत्य। सत्य कथन वह होगा जहाँ '=' चिह्न के दोनों पक्षों का मान समान होता है। (क) 8 × 9 = 70 + 2 (ख) 20 − 6 = 7 × 3 (ग) 48 ÷ 3 = 4 × 4 (घ) 89 − 9 = 90 + 0 (ङ) 25 + 10 = 45 − 10
उत्तर

हर पक्ष को अलग-अलग हल कीजिए, फिर तुलना कीजिए।

भागकथनबायाँ पक्षदायाँ पक्षसत्य या असत्य
(क)8 × 9 = 70 + 27272सत्य
(ख)20 − 6 = 7 × 31421असत्य
(ग)48 ÷ 3 = 4 × 41616सत्य
(घ)89 − 9 = 90 + 08090असत्य
(ङ)25 + 10 = 45 − 103535सत्य
'=' चिह्न का सचमुच अर्थ क्या है: इसका अर्थ "अब उत्तर आ रहा है" नहीं है। इसका अर्थ है "दोनों पक्षों का मान ठीक-ठीक बराबर है"। इसलिए 8 × 9 = 70 + 2 एक बिलकुल ठीक वाक्य है — दोनों पक्षों का मान 72 है।
असत्य कथनों को कैसे ठीक करें:
(ख) 20 − 6 = 7 × 2, अथवा 20 + 1 = 7 × 3।
(घ) 89 − 9 = 90 − 10, अथवा 89 + 1 = 90 + 0।
प्र2.
2. निम्नलिखित कथनों को इस प्रकार पूर्ण कीजिए कि वे सत्य हों। (क) 7 × 6 = ____ + 17 (ख) 87 + 6 = ____ × 31 (ग) 63 + ____ = 74 − 4 (घ) ____ ÷ 9 = 16 ÷ 2
उत्तर

(क) 25  (ख) 3  (ग) 7  (घ) 72

विधि हर बार वही है — जो पक्ष हल हो सकता है उसे पहले हल कीजिए, फिर दूसरे पक्ष को उसके बराबर बनाइए।

(क) 7 × 6 = ____ + 17

बायाँ पक्ष: 7 × 6 = 42
अत: रिक्त स्थान + 17 का मान 42 होना चाहिए
रिक्त स्थान = 42 − 17 = 25
जाँच: 25 + 17 = 42 ✓

(ख) 87 + 6 = ____ × 31

बायाँ पक्ष: 87 + 6 = 93
अत: रिक्त स्थान × 31 का मान 93 होना चाहिए
रिक्त स्थान = 93 ÷ 31 = 3
जाँच: 3 × 31 = 93 ✓

(ग) 63 + ____ = 74 − 4

दायाँ पक्ष: 74 − 4 = 70
अत: 63 + रिक्त स्थान का मान 70 होना चाहिए
रिक्त स्थान = 70 − 63 = 7
जाँच: 63 + 7 = 70 ✓

(घ) ____ ÷ 9 = 16 ÷ 2

दायाँ पक्ष: 16 ÷ 2 = 8
अत: रिक्त स्थान ÷ 9 का मान 8 होना चाहिए
रिक्त स्थान = 9 × 8 = 72
जाँच: 72 ÷ 9 = 8 ✓
संकेत: सदैव उस पक्ष को पहले पूरा कीजिए जिसमें कोई रिक्त स्थान नहीं है। उससे आपको एक लक्ष्य-संख्या मिल जाती है, और फिर केवल एक छोटा चरण बचता है।
प्र3.
3. (क) "जब दो विषम संख्याओं को जोड़ा जाता है तब योगफल सम आता है।" उपर्युक्त कथन के लिए 5 उदाहरणों का पता लगाइए। क्या आप कोई एक उदाहरण देकर यह दिखा सकते हैं कि यह कथन असत्य भी हो सकता है?
उत्तर

यह कथन सदैव सत्य है। नीचे पाँच उदाहरण हैं, और कोई भी उदाहरण इसे असत्य नहीं कर सकता।

विषम संख्याविषम संख्यायोगफलविषम या सम?
358सम
7916सम
111324सम
178सम
253156सम

क्या कोई उदाहरण इसे असत्य कर सकता है? नहीं — और कारण यह है।

9 विषम है: जोड़े बनते हैं, एक बचता है 7 विषम है: जोड़े बनते हैं, एक बचता है दोनों बचे हुए (लाल) मिलकर एक और जोड़ा बना लेते हैं। अत: 9 + 7 = 16 पूरे जोड़ों में आता है — यह सम है।
विषम संख्या यानी जोड़े और एक अकेली गोटी। दो अकेली गोटियाँ मिलकर जोड़ा बना लेती हैं, अत: कुछ नहीं बचता।
यह सदैव सत्य क्यों है: हर विषम संख्या जोड़ों का ढेर है जिसमें एक गोटी अकेली रह जाती है। दो विषम संख्याएँ मिलाइए तो दोनों अकेली गोटियाँ आपस में मिलकर एक जोड़ा बना लेती हैं। कोई अकेला नहीं बचता, अत: योगफल सम होता है।
दूसरे भाग का उत्तर: इसे असत्य करने वाला कोई उदाहरण नहीं है। जितने चाहे आज़माइए — 99 + 1 = 100, 501 + 499 = 1000 — योगफल हर बार सम ही आता है।
प्र4.
3. (ख) "एक संख्या को 2 से गुणा करने पर एक विषम संख्या प्राप्त हो सकती है।" इस कथन के लिए कुछ उदाहरण दीजिए। क्या आपने कोई उदाहरण ढूँढ़ा?
उत्तर

यह कथन कभी सत्य नहीं है। ऐसा कोई उदाहरण है ही नहीं।

संख्या× 2परिणामविषम या सम?
33 × 26सम
77 × 214सम
1010 × 220सम
2525 × 250सम
9999 × 2198सम
कोई उदाहरण क्यों नहीं मिल सकता: 2 से गुणा करने का अर्थ है समान आकार के दो समूह बनाना। संख्या कोई भी हो, उत्तर ठीक दो बराबर आधे भागों में बँट जाता है — और जो संख्या दो बराबर पूर्ण आधों में बँट जाए, उसी को "सम" कहते हैं।
इसे देखने का दूसरा ढंग: इकाई का अंक देखिए। 0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 को दुगुना करने पर 0, 2, 4, 6, 8, 0, 2, 4, 6, 8 मिलते हैं। ये सभी अंत सम हैं, अत: पूरी संख्या सम होगी।
प्र5.
3. (ग) "एक संख्या को आधा करने पर सदैव एक सम संख्या प्राप्त होती है।" इस कथन के लिए 3 उदाहरण दीजिए। क्या आप 3 ऐसे उदाहरण बता सकते हैं जब यह सत्य न हो?
उत्तर

यह कथन कभी-कभी सत्य है। कभी आधा सम आता है, कभी विषम।

तीन उदाहरण जहाँ यह सत्य है:

संख्याउसका आधाविषम या सम?
84सम ✓
168सम ✓
2010सम ✓

तीन उदाहरण जहाँ यह सत्य नहीं है:

संख्याउसका आधाविषम या सम?
63विषम ✗
105विषम ✗
147विषम ✗
अंतर किससे पड़ता है: यदि संख्या को दो बार आधा किया जा सके (जैसे 8 → 4 → 2, या 20 → 10 → 5), तो पहला आधा सम आता है। यदि केवल एक बार आधा हो सके (जैसे 6 → 3), तो आधा विषम आता है।
एक उदाहरण ही नियम तोड़ देता है। कथन में "सदैव" शब्द एक बहुत बड़ा दावा है। 6 का आधा 3 है, और 3 विषम है — यही एक उदाहरण दिखा देता है कि दावा सदैव सत्य नहीं है।
प्र6.
4. निम्नलिखित कथनों के लिए उपयुक्त कक्ष में सही का चिह्न लगाइए (सदैव सत्य / कभी-कभी सत्य / कभी सत्य नहीं): एक संख्या में 10 जोड़ने पर दस का एक गुणज प्राप्त होता है। व्यवकलन (घटाव) में संख्याओं का क्रम बदलने पर कोई परिवर्तन नहीं होता है। गुणन में एक संख्या को दुगुना करने पर और दूसरी संख्या को आधा करने पर गुणनफल समान रहता है। एक विषम संख्या से गुणा करने पर एक सम संख्या प्राप्त होती है। एक संख्या को 5 से गुणा करने पर वह संख्या प्राप्त होती है जिनमें इकाई स्थान पर '0' होता है।
उत्तर
कथनसदैव सत्यकभी-कभी सत्यकभी सत्य नहीं
एक संख्या में 10 जोड़ने पर दस का एक गुणज प्राप्त होता है।
व्यवकलन में संख्याओं का क्रम बदलने पर कोई परिवर्तन नहीं होता है।
गुणन में एक संख्या को दुगुना और दूसरी को आधा करने पर गुणनफल समान रहता है।
एक विषम संख्या से गुणा करने पर एक सम संख्या प्राप्त होती है।
एक संख्या को 5 से गुणा करने पर इकाई स्थान पर '0' आता है।

1. संख्या में 10 जोड़ने पर दस का गुणज — कभी-कभी सत्य।

20 + 10 = 30, और 30 दस का गुणज है ✓
3 + 10 = 13, और 13 दस का गुणज नहीं है ✗

यह तभी होता है जब आप दस के गुणज से आरंभ करें।

2. व्यवकलन में क्रम बदलने पर कोई परिवर्तन नहीं — कभी-कभी सत्य।

9 − 4 = 5  परंतु  4 − 9 का मान 5 नहीं है ✗
7 − 7 = 0  और  7 − 7 = 0 ✓

क्रम केवल तभी नहीं मायने रखता जब दोनों संख्याएँ समान हों। किसी भी अन्य जोड़ी में क्रम सब कुछ बदल देता है। (योग अलग है — 4 + 9 और 9 + 4 सदैव बराबर हैं।)

3. एक को दुगुना और दूसरी को आधा करने पर गुणनफल समान — सदैव सत्य।

6 × 8 = 48
6 को दुगुना, 8 को आधा: 12 × 4 = 48 ✓
फिर दुगुना, फिर आधा: 24 × 2 = 48 ✓
एक बार और: 48 × 1 = 48 ✓
यह सदैव क्यों काम करता है: 8-8 गोटियों की 6 पंक्तियाँ सोचिए। हर पंक्ति को बीच से काटकर आधे भाग नीचे रख दीजिए — अब 4-4 गोटियों की 12 पंक्तियाँ हैं। एक भी गोटी न जोड़ी गई न हटाई गई, अत: कुल बदल ही नहीं सकता।

4. विषम संख्या से गुणा करने पर सम संख्या — कभी-कभी सत्य।

3 × 4 = 12, जो सम है ✓
3 × 5 = 15, जो विषम है ✗

यह दूसरी संख्या पर निर्भर करता है। विषम × सम सदैव सम होता है; विषम × विषम सदैव विषम।

5. 5 से गुणा करने पर इकाई में 0 — कभी-कभी सत्य।

5 × 4 = 20, अंत में 0 ✓
5 × 6 = 30, अंत में 0 ✓
5 × 3 = 15, अंत में 5 ✗
5 × 7 = 35, अंत में 5 ✗

5 से गुणा करने पर अंत सदैव 0 या 5 आता है। 0 तभी आता है जब दूसरी संख्या सम हो।

ऐसा कोई भी कथन स्वयं कैसे तय करें: एक ऐसा उदाहरण खोजिए जो सत्य हो और एक ऐसा जो असत्य। बहुत बार आज़माने पर भी कोई असत्य उदाहरण न मिले तो वह "सदैव सत्य" की ओर संकेत है — पर फिर उसका कारण भी खोजिए, जैसा हमने कथन 3 के लिए किया।
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