1. संख्या में 10 जोड़ने पर दस का गुणज — कभी-कभी सत्य।
20 + 10 = 30, और 30 दस का गुणज है ✓
3 + 10 = 13, और 13 दस का गुणज नहीं है ✗
यह तभी होता है जब आप दस के गुणज से आरंभ करें।
2. व्यवकलन में क्रम बदलने पर कोई परिवर्तन नहीं — कभी-कभी सत्य।
9 − 4 = 5 परंतु 4 − 9 का मान 5 नहीं है ✗
7 − 7 = 0 और 7 − 7 = 0 ✓
क्रम केवल तभी नहीं मायने रखता जब दोनों संख्याएँ समान हों। किसी भी अन्य जोड़ी में क्रम सब कुछ बदल देता है। (योग अलग है — 4 + 9 और 9 + 4 सदैव बराबर हैं।)
3. एक को दुगुना और दूसरी को आधा करने पर गुणनफल समान — सदैव सत्य।
6 × 8 = 48
6 को दुगुना, 8 को आधा: 12 × 4 = 48 ✓
फिर दुगुना, फिर आधा: 24 × 2 = 48 ✓
एक बार और: 48 × 1 = 48 ✓
यह सदैव क्यों काम करता है: 8-8 गोटियों की 6 पंक्तियाँ सोचिए। हर पंक्ति को बीच से काटकर आधे भाग नीचे रख दीजिए — अब 4-4 गोटियों की 12 पंक्तियाँ हैं। एक भी गोटी न जोड़ी गई न हटाई गई, अत: कुल बदल ही नहीं सकता।
4. विषम संख्या से गुणा करने पर सम संख्या — कभी-कभी सत्य।
3 × 4 = 12, जो सम है ✓
3 × 5 = 15, जो विषम है ✗
यह दूसरी संख्या पर निर्भर करता है। विषम × सम सदैव सम होता है; विषम × विषम सदैव विषम।
5. 5 से गुणा करने पर इकाई में 0 — कभी-कभी सत्य।
5 × 4 = 20, अंत में 0 ✓
5 × 6 = 30, अंत में 0 ✓
5 × 3 = 15, अंत में 5 ✗
5 × 7 = 35, अंत में 5 ✗
5 से गुणा करने पर अंत सदैव 0 या 5 आता है। 0 तभी आता है जब दूसरी संख्या सम हो।
ऐसा कोई भी कथन स्वयं कैसे तय करें: एक ऐसा उदाहरण खोजिए जो सत्य हो और एक ऐसा जो असत्य। बहुत बार आज़माने पर भी कोई असत्य उदाहरण न मिले तो वह "सदैव सत्य" की ओर संकेत है — पर फिर उसका कारण भी खोजिए, जैसा हमने कथन 3 के लिए किया।