धागे का एक सिरा दक्षिण अमेरिका पर लगाइए, उसे अटलांटिक महासागर पार कराकर पुर्तगाल तक लाइए, फिर अफ़्रीका के दक्षिणी सिरे के नीचे से घुमाकर हिंद महासागर पार कराते हुए भारत के पश्चिमी तट पर लाइए। पूरा होने पर आप देखेंगे कि मिर्च ने आधी से अधिक पृथ्वी की यात्रा की।
कैसे अंकित करें — चरण दर चरण:
- लगभग 60 सेंटीमीटर लंबा चटक लाल ऊन का धागा लीजिए — लाल, ताकि वह पक्षी वाले धागे से अलग पहचाना जा सके।
- ग्लोब पर दक्षिण अमेरिका ढूँढ़िए और एक सिरा वहाँ लगाइए।
- धागे को उत्तर-पूर्व की ओर अटलांटिक महासागर पार कराते हुए यूरोप के पश्चिमी किनारे पर पुर्तगाल तक लाइए। मिर्च लाने वाले यात्री यहीं से आए थे।
- अब उसे अफ़्रीका के पश्चिमी तट के साथ दक्षिण की ओर, और अफ़्रीका के दक्षिणी सिरे के नीचे से घुमाइए।
- वहाँ से उत्तर-पूर्व की ओर हिंद महासागर पार कराते हुए दूसरा सिरा भारत के पश्चिमी तट पर लगाइए।
- पीछे हटकर देखिए कि धागे ने कितना जल पार किया और कितनी कम भूमि।
| यात्रा का चरण | यह क्या बताता है |
|---|---|
| दक्षिण अमेरिका → पुर्तगाल | मिर्च पहले यूरोप पहुँची। वह सीधे भारत नहीं आई |
| पुर्तगाल → अफ़्रीका के चारों ओर | उस समय कोई छोटा मार्ग नहीं था। जहाज़ों को अफ़्रीका के दक्षिणी सिरे का पूरा चक्कर लगाना पड़ता था |
| हिंद महासागर पार → भारत का पश्चिमी तट | जहाज़ पश्चिमी तट पर उतरते थे, इसीलिए मिर्च वहीं से भीतर की ओर फैली |
| पूरा मार्ग | लगभग पूरा जल-मार्ग, और इसमें महीनों लगते थे। यह 400 से 500 वर्ष पहले की, पालवाले जहाज़ों की बात है |