एक सप्ताह तक भोजन बनता भी रहेगा, पेट भी भरेगा और पौष्टिक भी रहेगा — पर स्वाद फीका लगेगा और अधिकांश व्यंजनों का लाल रंग चला जाएगा। न कोई बीमार पड़ेगा, न कोई भूखा रहेगा। हम बस वही करेंगे जो मिर्च के आने से पहले भारत करता था — काली मिर्च का उपयोग।
दिन-प्रतिदिन क्या बदलेगा:
- पहला दिन। दाल, सब्ज़ी और सांभर फीके लगेंगे। सब बार-बार कहेंगे, “कुछ कमी लग रही है।”
- दूसरा दिन। रंग चला जाएगा। राजमा, छोले, मछली की तरी और अधिकांश ग्रेवी का लाल रंग मिर्च से आता है। वे हल्के भूरे या पीले दिखेंगे।
- तीसरा दिन। रसोइए तीखापन लाने के लिए काली मिर्च, अदरक, लहसुन, राई और हींग का अधिक उपयोग करने लगेंगे।
- सप्ताह के मध्य तक। थाली से अचार, चटनी और पापड़ ग़ायब हो जाएँगे, क्योंकि लगभग इन सबका मुख्य घटक लाल मिर्च है।
- पूरे सप्ताह। जिन व्यंजनों में मिर्च लगती ही नहीं, उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा — सादा चावल, दही, दूध, सभी मिठाइयाँ, पोहा, उपमा, अधिकांश नाश्ते और बीमार व्यक्ति के लिए बना भोजन।
- घर के बाहर। मिर्च उगाने वाले किसानों और बेचने वाले व्यापारियों की एक सप्ताह की कमाई चली जाएगी। उनके लिए यह छोटी बात नहीं है।
| क्या कम पड़ेगा | उसके स्थान पर क्या काम आ सकता है |
|---|---|
| मुँह में तीखापन | काली मिर्च, अदरक, राई, लहसुन |
| ग्रेवी का लाल रंग | टमाटर, चुकंदर, या पीले रंग के लिए थोड़ी हल्दी |
| अचार और चटनी | खट्टे-मीठे — आँवला, इमली, गुड़ वाला आम |
| चाट का चटपटापन | अधिक नींबू, काला नमक और चाट मसाला |