प्र1.
क्या आप किसी योगासन का नाम बता सकते हैं जिसका अभ्यास आपने किया है अथवा किसी को करते देखा है? आपके अनुसार इस योगाभ्यास के क्या लाभ हैं?
उत्तर
ऐसे एक आसन का नाम लिखिए जो आपने सचमुच किया है या किसी को करते देखा है, और सीधे-सादे शब्दों में बताइए कि वह शरीर या मन के लिए क्या करता है। ईमानदारी से बताया गया एक आसन दस नामों की सूची से अधिक मूल्यवान है।
नमूना उत्तर: मैंने वृक्षासन किया है। इसमें एक पैर पर खड़े होकर दूसरे पैर का तलवा जाँघ के भीतरी भाग से लगाते हैं और दोनों हाथ शाखाओं की तरह सिर के ऊपर जोड़ लेते हैं। पहली बार मैं तुरंत डगमगाकर गिर गया था। एक सप्ताह के अभ्यास के बाद मैं बीस तक गिनते हुए टिक पाया। मेरे विचार से यह संतुलन बढ़ाता है और एकाग्रता भी, क्योंकि जैसे ही मन इधर-उधर भटकता है, मैं झुकने लगता हूँ।
जिन आसनों को आपने देखा होगा — इनमें से कोई एक चुनिए
| आसन | क्या करते हैं | किसमें सहायक है |
|---|---|---|
| ताड़ासन | पैर मिलाकर सीधे तनकर खड़े होना और हाथ ऊपर उठाना | सीधे खड़े होना; अपनी मुद्रा के प्रति सजगता |
| वृक्षासन | एक पैर पर खड़े होकर दूसरे का तलवा जाँघ से लगाना, हाथ सिर के ऊपर | संतुलन और एकाग्रता |
| भुजंगासन | पेट के बल लेटकर हाथों के बल छाती उठाना, जैसे साँप फन उठाता है | जकड़ी हुई कमर खुलती है और छाती फैलती है |
| सुखासन / पद्मासन | पालथी मारकर कमर सीधी रखकर बैठना और धीरे-धीरे साँस लेना | बिना हिले-डुले बैठना; मन का शांत होना |
| बालासन | घुटनों के बल बैठकर आगे झुकना, माथा ज़मीन पर और हाथ आगे फैले हुए | आसनों के बीच विश्राम; कमर का खिंचाव कम होता है |
| सूर्य नमस्कार | बारह क्रियाओं का एक क्रम, एक के बाद एक | पूरे शरीर को गर्माता है और साँस चलाता है |
| शवासन | पीठ के बल सीधे लेटकर, आँखें बंद करके पूरे शरीर को ढीला छोड़ना | विश्राम; धड़कन धीमी होती है; इसे सदा अंत में किया जाता है |
| अनुलोम-विलोम | एक नासिका से धीरे-धीरे साँस लेना और दूसरी से छोड़ना | क्रोध या घबराहट में मन को शांत करता है |
योग केवल व्यायाम क्यों नहीं है: दौड़ या क्रिकेट में आप शरीर को जितना हो सके उतना धकेलते हैं। योग में आप धीरे चलते हैं, स्थिर रुकते हैं और अपनी साँस देखते रहते हैं। इसलिए यह वह चीज़ सिखाता है जो दौड़ नहीं सिखाती — शांत और स्थिर रह पाना। अध्याय कहता है कि योग स्वयं और प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाए रखने का माध्यम था; व्यवहार में इन शब्दों का यही अर्थ है।
दो सावधानियाँ: योग खाली पेट कीजिए, और किसी भी खिंचाव को दर्द होने तक मत खींचिए। आसन में हल्का तनाव लगना चाहिए, चिरने जैसा दर्द नहीं। हो सके तो आरंभ के कुछ सप्ताह किसी शिक्षक से सीखिए।