प्र1.
1. आपके अनुसार भारत और मैक्सिको की संस्कृति में उत्सवों के अवसर पर गेंदे का प्रयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर
क्योंकि दोनों देशों में गेंदा एक ही तीन काम करता है — उसका रंग सूर्य और अग्नि जैसा है, वह सरलता से उगता है और ठीक उत्सव के समय भारी संख्या में खिलता है, और वह इतना मज़बूत होता है कि उसकी मालाएँ बनाई जा सकें और पंखुड़ियाँ बिखेरी जा सकें। पृथ्वी के दो छोरों पर बसी दो संस्कृतियों ने एक ही फूल को, एक ही कारणों से चुना।
कारणों को एक-एक करके देखिए:
- रंग। गेंदा चटक नारंगी और पीला होता है — सूर्य का, अग्नि का और दीपक की लौ का रंग। अध्याय कहता है कि इन रंगों ने हमें सौहार्द, उत्सव और आध्यात्मिकता का स्मरण दिलाया। किसी भी देश में उत्सव की भावना यही होती है।
- यह सरलता से उगता है। पौधा नखरे नहीं करता। गमले में, खेत में या आँगन में साधारण मिट्टी में उग जाता है और एक ही पौधा बहुत-से फूल देता है।
- यह सही समय पर खिलता है। भारत में यह दीपावली के आस-पास पूरे यौवन पर होता है; मैक्सिको में भी लगभग उन्हीं सप्ताहों में, जब वहाँ पूर्वजों के स्मरण का पर्व होता है। जो फूल ऋतु से बाहर खिले, वह उत्सव के काम का नहीं।
- तोड़ने के बाद भी टिकता है। इसके फूल कसे और मज़बूत होते हैं। पौधे से अलग होकर भी वे एक-दो दिन ताज़े रहते हैं, इसीलिए उन्हें पिरोया जा सकता है, द्वार पर टाँगा जा सकता है और जुलूस में ले जाया जा सकता है।
- यह सस्ता है। निर्धन परिवार और संपन्न परिवार — दोनों इससे सजावट कर सकते हैं। उत्सव का फूल वही हो सकता है जो सबकी पहुँच में हो।
- इसकी गंध। इसकी तीखी, विशिष्ट गंध पहचानने में भूल नहीं होती, और दोनों देशों में उस गंध का अर्थ हो गया है — ‘आज कोई विशेष दिन है’।
| भारत में | मैक्सिको में | |
|---|---|---|
| कहाँ दिखता है | मंदिर, घर, विवाह, द्वार, मालाएँ, दीपावली | उत्सवों की सजावट में, विशेषकर उस पर्व पर जब परिवार अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं |
| कैसे उपयोग होता है | मालाओं में पिरोकर, द्वार पर टाँगकर, रंगोली में बिखेरकर, पूजा में अर्पित करके | पंखुड़ियाँ बिखेरकर मार्ग बनाया जाता है और सजावट पर ढेर लगाया जाता है |
| रंग का अर्थ | सौहार्द, उत्सव, आध्यात्मिकता | गर्मजोशी और स्वागत — चटक रंग मार्ग दिखाने और स्वागत करने का प्रतीक है |
| कहाँ उगता है | पूरे भारत के खेतों, गमलों और आँगनों में | इसका मूल घर — गेंदा मैक्सिको का है |
इस कहानी की सबसे रोचक बात: भारत ने मैक्सिको से फूल चढ़ाने का विचार नहीं लिया। भारत हज़ारों वर्षों से फूल अर्पित करता आ रहा था। मैक्सिको से आया केवल एक विशेष फूल — और वह हमारे उत्सवों में इतना ठीक बैठा कि कुछ सौ वर्षों में लोग भूल ही गए कि वह कभी कहीं और से आया था। जब बाहर से आई कोई वस्तु पहले से मौजूद किसी आवश्यकता को पूरा कर देती है, तो वह बहुत शीघ्र पराई नहीं रह जाती।
घर में पता कीजिए: पूछिए कि गेंदे के इतना सामान्य होने से पहले आपके परिवार में पूजा में कौन-से फूल चढ़ाए जाते थे। चंपा, चमेली, कनेर, हरसिंगार, कमल और गुड़हल जैसे नाम सुनाई देंगे — ये सब भारतीय फूल हैं और आज भी मैक्सिको से आए गेंदे के साथ-साथ चढ़ाए जाते हैं।