प्र1.
रहस्य #1— मेरा उत्तपम दूषित कैसे हुआ?
उत्तर
सूक्ष्मजीव नामक बहुत छोटे सजीव उत्तपम पर पनप गए और उसे दूषित कर दिया। दिशा को जो रंग-बिरंगे धब्बे दिखे, वे फफूँद थे। फफूँद कोई एक जीव नहीं है — वह हजारों सूक्ष्मजीवों की एक बस्ती है जो एक साथ रहते हैं। एक सूक्ष्मजीव हमें नहीं दिखता, पर उनकी पूरी बस्ती दिख जाती है।
बंद डिब्बे के भीतर क्या हुआ, चरण दर चरण देखिए।
- उत्तपम नरम और नम था। नमी अर्थात् भोजन में उपस्थित जल।
- डिब्बा बंद था, फिर भी उसके भीतर वायु थी।
- डिब्बा तीन दिन — शुक्र, शनि और रविवार — गरम कमरे में पड़ा रहा।
- नमी, वायु और गर्मी — यही तीन चीज़ें सूक्ष्मजीवों को चाहिए। इसलिए भोजन पर पहले से मौजूद कुछ सूक्ष्मजीव बढ़ने लगे।
- सोमवार तक उनकी संख्या इतनी हो गई कि वे रंगीन धब्बों के रूप में दिखने लगे और भोजन से दुर्गंध आने लगी।
| दिशा ने क्या देखा | वह वास्तव में क्या था |
|---|---|
| डिब्बा खोलते ही दुर्गंध | सूक्ष्मजीवों ने भोजन को तोड़कर नए दुर्गंधयुक्त पदार्थ बना दिए थे |
| उत्तपम पर रंग-बिरंगे धब्बे | फफूँद — हजारों सूक्ष्मजीवों की बस्ती |
| भोजन अब ताजे उत्तपम जैसा नहीं दिख रहा था | सूक्ष्मजीवों ने उसका रंग, स्वाद और बनावट बदल दी थी |
ऐसा क्यों होता है: सूक्ष्मजीव सजीव हैं, इसलिए उन्हें भी खाना चाहिए। हमारा भोजन उनका भी भोजन है। जैसे-जैसे वे उसे खाते हैं, वैसे-वैसे वे उसे बदलते जाते हैं — इसीलिए स्वाद और गंध बदल जाते हैं। गरम, नम और रखा हुआ भोजन उनके पनपने के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है।
ध्यान रखिए: जिस भोजन पर फफूँद लग गई हो, उसे कभी नहीं खाना चाहिए — धब्बा खुरचकर हटा देने पर भी नहीं। उसे फेंक दीजिए, डिब्बे को साबुन और गरम पानी से धोइए और अच्छी तरह सुखाइए।