प्र1.
अन्वेषण— आपके मुँह के अंदर भोजन का क्या होता है? — वह सोचने लगी, “खाने के बाद भोजन का क्या होता है?”
उत्तर
मुँह के भीतर भोजन दाँतों से कटता, फटता, कुचला और पीसा जाता है, जीभ उसे मिलाती है, लार उसे गीला करती है, और वह नरम गूदा बन जाता है जिसे आसानी से निगला जा सकता है। पाचन वास्तव में मुँह में ही आरंभ हो जाता है।
रोटी के एक निवाले के साथ चलिए।
- आगे के दाँत (कृन्तक) एक टुकड़ा काटते हैं।
- जीभ उस टुकड़े को पीछे के दाँतों तक पहुँचाती है।
- अग्रचर्वणक और चर्वणक दाढ़ उसे कुचलकर और पीसकर छोटे-छोटे कणों में बदल देती हैं।
- लार — मुँह में बनने वाला पतला रस — भोजन को गीला कर देती है।
- लार भोजन को तोड़ना भी आरंभ कर देती है। इसीलिए रोटी या चावल देर तक चबाने पर थोड़ा मीठा लगने लगता है।
- जीभ गीले कणों को लपेटकर एक नरम, चिकना गूदा बना देती है।
- अब वह इतना चिकना है कि सुरक्षित रूप से निगला जा सके और आसानी से नीचे उतर जाए।
काटना → चबाना → लार मिलना → गूदा → निगलना
चबाना इतना महत्वपूर्ण क्यों है: आमाशय के पास दाँत नहीं होते। हम जो कुछ बिना चबाए निगल लेते हैं, आमाशय को वैसा ही सँभालना पड़ता है। चबाने से भोजन छोटे टुकड़ों में टूट जाता है, इसलिए आमाशय का काम आसान हो जाता है और पाचन जल्दी और बेहतर होता है। यही दिशा की कॉपी में खोज #10 है।
स्वयं करके देखिए: सादी रोटी का छोटा टुकड़ा मुँह में लीजिए और बिना निगले तीस बार धीरे-धीरे चबाइए। दो बातें देखिए — वह नरम लेई जैसा बन जाता है, और थोड़ा मीठा लगने लगता है। यह मिठास लार का काम है।