प्र1.
दिशा आश्चर्यचकित हुई कि भोजन को देर तक चबाने पर अधिक लार निकलती है!
उत्तर
हाँ। जितनी देर आप चबाएँगे, उतनी अधिक लार निकलेगी। अन्ना ने भी यही कहा — भोजन को अच्छी तरह चबाने पर लार स्रावित होती है, जो भोजन को पचाने में सहायता करती है।
स्वयं जाँचिए:
- कोई सूखी वस्तु का छोटा टुकड़ा लीजिए — सादा बिस्कुट, मुरमुरा या रोटी का टुकड़ा।
- उसे धीरे-धीरे चबाइए और बीस तक गिनिए।
- ध्यान दीजिए कि सूखा टुकड़ा मुँह में गीला और नरम कैसे हो गया।
- यह गीलापन भोजन से नहीं आया। यह आपकी अपनी लार है।
- अब भूख लगने पर गरम भोजन की गंध लीजिए। कुछ खाए बिना ही आपके मुँह में पानी आ जाता है।
| लार क्या करती है | उससे क्या लाभ होता है |
|---|---|
| भोजन को गीला करती है | सूखा भोजन नरम और आसानी से चबाने योग्य हो जाता है |
| कणों को आपस में जोड़ती है | चिकना गूदा बनता है जिसे सुरक्षित रूप से निगला जा सकता है |
| भोजन को तोड़ना आरंभ करती है | पाचन आमाशय तक पहुँचने से पहले मुँह में ही आरंभ हो जाता है |
| मुँह को कुछ हद तक साफ करती है | दाँतों पर लगे भोजन के कण धुल जाते हैं |
खोज #10: भोजन को अच्छे से चबाने से वह छोटे-छोटे भागों में टूट जाता है और लार स्रावित होती है। यह लार पाचन में सहायता करती है।
शरीर ऐसा क्यों करता है: मुँह वह पहला स्थान है जहाँ भोजन पहुँचता है, इसलिए काम आसान बनाने के लिए यही सबसे अच्छी जगह है। चबाना काटने का काम करता है और लार गीला करने तथा पहला पाचन आरंभ करने का। जो भोजन बिना चबाए निगल लिया जाए उसे इनमें से कुछ नहीं मिलता — और तब आमाशय को कठिनाई होती है।
एक आसान आदत: दो निवालों के बीच चम्मच नीचे रख दीजिए, या छोटे निवाले लीजिए। दोनों से आप बिना प्रयास किए अधिक देर तक चबाएँगे।