कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 4 चर्चा कीजिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
यदि हम अपशिष्ट को अलग-अलग नहीं रखते हैं तो क्या होता है?
उत्तर

यदि हम उसे अलग नहीं रखते तो सब कुछ एक साथ बेकार हो जाता है — और उसे सँभालने वालों के लिए ख़तरनाक भी।

  1. सूखा अपशिष्ट ख़राब हो जाता है। गीले छिलकों में पड़ा समाचार-पत्र भीगकर बदबूदार हो जाता है। वह पुनर्चक्रित नहीं हो सकता। इस तरह जो कागज़ नया कागज़ बन सकता था, वह ढेर में चला जाता है।
  2. गीला अपशिष्ट भी ख़राब हो जाता है। जिस ढेर में प्लास्टिक और काँच हो उससे खाद नहीं बन सकती। इस तरह जो छिलके बगीचे की मिट्टी बन सकते थे, वे भी व्यर्थ जाते हैं।
  3. स्वच्छता कर्मचारियों को चोट लगती है। वे मिला-जुला कचरा हाथ से छाँटते हैं। गीले कचरे की थैली में छिपा काँच, ब्लेड, सुई या बैटरी उन्हें काट सकती है या हानि पहुँचा सकती है।
  4. बदबू और बीमारी फैलती है। मिला-जुला कचरा खुले में सड़ता है, मक्खियाँ, चूहे और आवारा कुत्ते आते हैं, और गीले भाग में मच्छर पनपते हैं।
  5. कूड़े का पहाड़ बढ़ता है। सब कुछ शहर के बाहर एक विशाल ढेर में पहुँच जाता है। उन ढेरों में आग लगती है और उसका धुआँ हानिकारक होता है। वर्षा उनसे गंदा जल बहाकर भूमि और नालों में ले जाती है।
  6. ख़र्च बढ़ता है। जिसे हम कूड़ेदान के पास एक सेकंड में अलग कर सकते थे, उसे बाद में अलग करने के लिए किसी को वेतन देना पड़ता है।
एक ही कूड़ेदान में मिलाया कागज़ — ख़राब छिलके — खाद नहीं बनेगी काँच — छिपी हुई चोट बदबू, मक्खियाँ, मच्छर सब कुछ → कूड़े का ढेर कूड़ेदान पर ही अलग किया कागज़ → नया कागज़ छिलके → खाद काँच → लपेटा हुआ, सुरक्षित न बदबू, न मक्खियाँ बहुत थोड़ा → ढेर तक
वही कचरा, कूड़ेदान पर एक सेकंड का अंतर, और परिणाम बिल्कुल अलग।
एक बात जो याद रखनी है: कचरा अपने आप में गंदा नहीं होता। केले का छिलका गंदा नहीं है और समाचार-पत्र भी गंदा नहीं है। वे बेकार कूड़ा ठीक उसी क्षण बनते हैं जब उन्हें आपस में मिला दिया जाता है। अलग रखने से वे उपयोगी बने रहते हैं।
प्र2.
हम स्वच्छता कर्मचारियों के काम को सरल और सुरक्षित बनाने के लिए क्या कर सकते हैं? अपनी कक्षा में एक स्वच्छता कर्मचारी को आमंत्रित करने के लिए अपने शिक्षक से अनुरोध कीजिए। उनसे जानने का प्रयास करें कि वे क्या कार्य करते हैं, उन्हें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और अपशिष्ट प्रबंधन में हम कैसे अच्छे नागरिक की भूमिका निभा सकते हैं।
उत्तर

संक्षिप्त उत्तर — कचरा उसी रूप में दीजिए जिस रूप में आप स्वयं लेना चाहेंगे। बाकी सब बातें इसी से निकलती हैं।

दस काम जो हम सचमुच कर सकते हैं

  1. गीला और सूखा अलग कीजिए — हाथ से निकलने से पहले ही।
  2. नुकीली वस्तुएँ लपेटिए। टूटा काँच, ब्लेड, फूटा बल्ब — मोटे समाचार-पत्र में लपेटकर ऊपर “काँच” लिख दीजिए।
  3. बैटरी, दवाइयाँ और ई-कचरा दोनों कूड़ेदानों से बाहर रखिए। ये विषैले होते हैं। इन्हें अलग चिह्नित डिब्बे में रखिए।
  4. गीला कचरा ज़मीन पर या खिड़की से बाहर मत फेंकिए।
  5. कूड़ेदान का ढक्कन लगा रहने दीजिए, ताकि कुछ बिखरे नहीं और कोई पशु उसे खींचे नहीं।
  6. कूड़ेदान को ऊपर तक मत भरिए। जो कूड़ेदान बंद ही न हो, उसे हाथ से ख़ाली करना पड़ता है।
  7. कूड़ा फैलाइए ही मत। ज़मीन पर पड़ा हर रैपर किसी की कमर झुकाता है।
  8. शौचालय का उपयोग करके उसे स्वच्छ छोड़िए। फ़्लश कीजिए और उसमें रैपर मत डालिए।
  9. उनका अभिवादन कीजिए और उनका नाम जानिए। नमस्ते कहिए। धन्यवाद कहिए। यह छोटी बात नहीं है।
  10. पूछिए कि उनके पास दस्ताने, जूते और मास्क हैं या नहीं — और न हों तो शिक्षक को बताइए।

कक्षा में आने वाले अतिथि से पूछने योग्य प्रश्न

  • आपका काम कितने बजे आरंभ होता है और आप कितना क्षेत्र सँभालते हैं?
  • काम का सबसे कठिन भाग कौन-सा है?
  • कचरे में आपको ऐसा क्या मिलता है जो वहाँ कभी नहीं होना चाहिए था?
  • क्या काम करते हुए कभी आपको चोट लगी है?
  • आप इस विद्यालय के हर विद्यार्थी से एक बात कहना चाहें तो क्या कहेंगे?

नमूना उत्तर — हमारी कक्षा ने क्या सीखा: “सुनीता दीदी ने बताया कि वे सुबह छह बजे काम शुरू करती हैं और हमारे आने से पहले पूरा मैदान बुहार देती हैं, और जो वे उठाती हैं उसका अधिकांश खेल के मैदान से आए चॉकलेट के रैपर होते हैं। उन्होंने कहा कि सबसे कठिन काम बुहारना नहीं है — सबसे कठिन हैं मिले-जुले कूड़ेदान, क्योंकि उन्हें गीला और सूखा हाथ से अलग करना पड़ता है। एक बार गीले कूड़ेदान में किसी के डाले काँच के टूटे चूड़े से उनकी उँगली कट गई थी। जब हमने पूछा कि वे हमसे क्या चाहती हैं, तो उन्होंने कहा — ‘बस दो बातें। कूड़ेदान में डालिए, और सही कूड़ेदान में डालिए।’ इसके बाद हमारी कक्षा ने दो काम किए — हमने कार्यालय से खेल के मैदान के किनारे एक कूड़ेदान माँगा, और यह नियम बनाया कि भोजन के बाद अपनी कक्षा के रैपर हम स्वयं उठाएँगे। और हमने उनका नाम सीखा, जो हममें से किसी को पता ही नहीं था।”

सम्मान इस अध्याय का भाग क्यों है: विद्यालय तभी आनंदमय स्थान है जब वह उसमें रहने वाले हर व्यक्ति के लिए आनंदमय हो — उन लोगों के लिए भी जो उसे स्वच्छ रखते हैं। उनके काम के कारण ही हमारा काम संभव होता है। श्रम की गरिमा का यही अर्थ है — दया नहीं, सम्मान, और ऐसा व्यवहार जो वह सम्मान दिखाए।
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