प्र1.
गीले कचरे का प्रबंधन कैसे किया जाता है? 1. विद्यालय में
उत्तर
विद्यालय के लिए सबसे अच्छा उत्तर है — खाद का गड्ढा। तब गीला कचरा परिसर से बाहर जाता ही नहीं और उद्यान के लिए खाद बनकर लौट आता है।
विद्यालय का खाद का गड्ढा कैसे काम करता है
- छायादार कोने में एक गड्ढा खोदिए — लगभग घुटने जितना गहरा और दोनों हाथ फैलाने जितना चौड़ा। नीचे छेद किया हुआ बड़ा ड्रम भी उतना ही अच्छा है।
- तल पर सूखे पत्तों की एक परत बिछाइए।
- प्रतिदिन गीला कचरा डालिए — मध्याह्न भोजन के सब्ज़ी के छिलके, बची हुई जूठन, गिरे हुए पत्ते, चाय की पत्ती।
- हर दिन डालने के बाद ऊपर मिट्टी या सूखे पत्तों की पतली परत डालिए। यही वह चरण है जिसे लोग भूल जाते हैं, और यही बदबू और मक्खियों को रोकता है।
- सूखा दिखे तो थोड़ा जल छिड़किए। यह निचोड़े हुए स्पंज जैसा नम रहना चाहिए, कीचड़ जैसा गीला कभी नहीं।
- सप्ताह में एक बार खुरपी से ढेर को पलटिए, ताकि हवा भीतर जाए।
- लगभग दो-तीन महीने में गड्ढे का तल गहरी, भुरभुरी, सोंधी मिट्टी बन जाता है। वही खाद है।
- उसे छानकर विद्यालय के वृक्षों और सब्ज़ी की क्यारियों में डालिए।
यह मिट्टी में क्यों बदल जाता है: सूक्ष्मजीव — बहुत छोटे जीव — और केंचुए जैसे जीव नरम कचरे को खाकर उसे तोड़ते हैं। उन्हें तीन चीज़ें चाहिए — हवा, थोड़ी नमी, और गीले (हरे छिलके) तथा सूखे (भूरे पत्ते) का मेल। इतना दे दीजिए तो पूरा काम वे मुफ़्त में कर देते हैं।
| खाद के गड्ढे में क्या जाए | क्या कभी न जाए |
|---|---|
| फल-सब्ज़ी के छिलके, बचा पका भोजन, चाय की पत्ती, अंडे के छिलके, गिरे पत्ते, खरपतवार, फूल | प्लास्टिक और रैपर, काँच, धातु, बैटरी, चॉक, रंगीन चमकीला कागज़ — इनमें से कुछ भी सड़ता नहीं और ये खाद ख़राब कर देते हैं |
नमूना उत्तर: “हमारे विद्यालय में मध्याह्न भोजन की रसोई के छिलके और मैदान से बुहारे गए पत्ते रसोई के पीछे बने खाद के गड्ढे में जाते हैं। कक्षा 5 हर शुक्रवार उस पर मिट्टी डालती है और खुरपी से पलटती है। पिछले महीने हमने एक पूरी टोकरी खाद निकालकर अमरूद के पेड़ों में डाली। जिस विद्यालय में गड्ढा न हो, वहाँ गीला कचरा हरे कूड़ेदान में जाता है और नगरपालिका की गाड़ी उसे ले जाती है।”