कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 4 गीले कचरे का प्रबंधन कैसे किया जाता है? के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
गीले कचरे का प्रबंधन कैसे किया जाता है? 1. विद्यालय में
उत्तर

विद्यालय के लिए सबसे अच्छा उत्तर है — खाद का गड्ढा। तब गीला कचरा परिसर से बाहर जाता ही नहीं और उद्यान के लिए खाद बनकर लौट आता है।

विद्यालय का खाद का गड्ढा कैसे काम करता है

  1. छायादार कोने में एक गड्ढा खोदिए — लगभग घुटने जितना गहरा और दोनों हाथ फैलाने जितना चौड़ा। नीचे छेद किया हुआ बड़ा ड्रम भी उतना ही अच्छा है।
  2. तल पर सूखे पत्तों की एक परत बिछाइए।
  3. प्रतिदिन गीला कचरा डालिए — मध्याह्न भोजन के सब्ज़ी के छिलके, बची हुई जूठन, गिरे हुए पत्ते, चाय की पत्ती।
  4. हर दिन डालने के बाद ऊपर मिट्टी या सूखे पत्तों की पतली परत डालिए। यही वह चरण है जिसे लोग भूल जाते हैं, और यही बदबू और मक्खियों को रोकता है।
  5. सूखा दिखे तो थोड़ा जल छिड़किए। यह निचोड़े हुए स्पंज जैसा नम रहना चाहिए, कीचड़ जैसा गीला कभी नहीं।
  6. सप्ताह में एक बार खुरपी से ढेर को पलटिए, ताकि हवा भीतर जाए।
  7. लगभग दो-तीन महीने में गड्ढे का तल गहरी, भुरभुरी, सोंधी मिट्टी बन जाता है। वही खाद है।
  8. उसे छानकर विद्यालय के वृक्षों और सब्ज़ी की क्यारियों में डालिए।
यह मिट्टी में क्यों बदल जाता है: सूक्ष्मजीव — बहुत छोटे जीव — और केंचुए जैसे जीव नरम कचरे को खाकर उसे तोड़ते हैं। उन्हें तीन चीज़ें चाहिए — हवा, थोड़ी नमी, और गीले (हरे छिलके) तथा सूखे (भूरे पत्ते) का मेल। इतना दे दीजिए तो पूरा काम वे मुफ़्त में कर देते हैं।
खाद के गड्ढे में क्या जाएक्या कभी न जाए
फल-सब्ज़ी के छिलके, बचा पका भोजन, चाय की पत्ती, अंडे के छिलके, गिरे पत्ते, खरपतवार, फूलप्लास्टिक और रैपर, काँच, धातु, बैटरी, चॉक, रंगीन चमकीला कागज़ — इनमें से कुछ भी सड़ता नहीं और ये खाद ख़राब कर देते हैं

नमूना उत्तर: “हमारे विद्यालय में मध्याह्न भोजन की रसोई के छिलके और मैदान से बुहारे गए पत्ते रसोई के पीछे बने खाद के गड्ढे में जाते हैं। कक्षा 5 हर शुक्रवार उस पर मिट्टी डालती है और खुरपी से पलटती है। पिछले महीने हमने एक पूरी टोकरी खाद निकालकर अमरूद के पेड़ों में डाली। जिस विद्यालय में गड्ढा न हो, वहाँ गीला कचरा हरे कूड़ेदान में जाता है और नगरपालिका की गाड़ी उसे ले जाती है।”

प्र2.
गीले कचरे का प्रबंधन कैसे किया जाता है? 2. घर में
उत्तर

घर में गीले कचरे का प्रबंधन चार तरीकों से होता है — और अधिकांश भारतीय घर इनमें से एक से अधिक तरीके अपनाते हैं।

  1. वह पशुओं को खिला दिया जाता है। सब्ज़ी के छिलके, रोटी और बचा हुआ भात गाय, भैंस, बकरी, गली के कुत्ते या पक्षियों को दे दिए जाते हैं। गाँवों में यही सबसे प्रचलित तरीका है और लगभग कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता।
  2. उससे खाद बनाई जाती है। एक गमला, छेद वाली बाल्टी या आँगन में एक गड्ढा। छिलके भीतर, ऊपर मुट्ठी भर सूखी मिट्टी। दो महीने में तुलसी और मनीप्लांट के लिए खाद तैयार।
  3. वह हरे कूड़ेदान में एकत्रित होता है। शहरों में हर सुबह घंटी बजाती नगरपालिका की गाड़ी आती है। गीला हरे में और सूखा नीले में जाता है, और गाड़ी उसे खाद या प्रसंस्करण केंद्र तक ले जाती है।
  4. वह कचरा बनने से पहले ही काम में आ जाता है। सब्ज़ी का पानी तरी बन जाता है या गमलों में डाल दिया जाता है। बासी भात अगली सुबह का व्यंजन बन जाता है। यही सबसे अच्छा तरीका है, क्योंकि इसमें कचरा बनता ही नहीं।
गीला कचरा प्लास्टिक की थैली में बाँधकर क्यों नहीं देना चाहिए: बंद थैली के भीतर हवा नहीं होती, इसलिए कचरा ठीक से सड़ नहीं पाता। वह केवल सड़ाँध मारता है, और प्लास्टिक भी उसके साथ ढेर तक पहुँच जाता है। यदि थैली आवश्यक ही हो तो कागज़ की लीजिए, या कूड़ेदान में समाचार-पत्र बिछा दीजिए।
घर पर पता कीजिए: पूछिए कि आपकी रसोई के कचरे का क्या होता है — क्या कुछ पशु को दिया जाता है, गमले में डाला जाता है, या फेंक दिया जाता है? जो पता चले उसे लिखिए और कक्षा में मित्रों के उत्तरों से मिलाइए — आप देखेंगे कि एक ही गली के घर इसे बहुत अलग-अलग तरीक़ों से सँभालते हैं।
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