विद्यालय में ठीक वही वस्तुएँ बहुत बनती हैं जिनकी पुनर्चक्रणकर्ता को आवश्यकता होती है — सबसे अधिक कागज़।
| विद्यालय क्या देता है | वह कहाँ से आता है | उससे क्या बनता है |
|---|---|---|
| पुराने समाचार-पत्र और पत्रिकाएँ | पुस्तकालय और शिक्षक-कक्ष | पुनर्चक्रित कागज़, कागज़ की थैलियाँ, गत्ता |
| उपयोग की गई उत्तर-पुस्तिकाएँ और पुराने रजिस्टर | कार्यालय, अभिलेख की अवधि पूरी होने पर | पुनर्चक्रित कागज़ |
| गत्ते के डिब्बे | पुस्तकें, चॉक और गणवेश जिनमें आए थे | नए डिब्बे और पैकिंग बोर्ड |
| प्लास्टिक की पानी की बोतलें | समारोह और खेल दिवस | प्लास्टिक के दाने, कपड़े के लिए रेशा |
| टूटा फ़र्नीचर, लोहे की छड़ें, टिन की चादरें | मरम्मत और पुरानी कक्षाएँ | पिघलाकर नई धातु की वस्तुएँ |
| पुराने पंखे, ट्यूबलाइट, तार, कंप्यूटर | बदले गए उपकरण (यह ई-कचरा है) | यह ई-कचरा संग्राहक को जाता है — साधारण कूड़ेदान में कभी नहीं |
नमूना उत्तर: “हमारा विद्यालय पुस्तकालय के पुराने समाचार-पत्र, परीक्षा के बाद बची उत्तर-पुस्तिकाएँ और नई पुस्तकों के गत्ते के डिब्बे देता है। पिछले वर्ष कार्यालय ने दो टूटी कुर्सियाँ और कुछ लोहे की छड़ें भी कबाड़ीवाले को दी थीं। रद्दी से मिला धन विद्यालय के उद्यान के कोष में डाला गया।”