कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 4 पाठ्य प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
मोहित ने पूछा, “हरित विद्यालय क्या होता है?”
उत्तर

हरित विद्यालय वह विद्यालय है जो पढ़ाने के साथ-साथ धरती की देखभाल भी करता है। आशा के भाई ने उसे बताया था कि ऐसा विद्यालय चार काम करता है।

  1. वह अपने अपशिष्ट का प्रबंधन करता है। कचरे को गीले और सूखे में अलग किया जाता है। कोई उपयोगी वस्तु फेंकी नहीं जाती।
  2. वह जल संरक्षित करता है। नल कसकर बंद किए जाते हैं, रिसाव ठीक कराए जाते हैं और वर्षा जल नाली में जाने के बजाय एकत्रित किया जाता है।
  3. वह विद्युत का विवेकपूर्ण उपयोग करता है। खाली कक्ष में पंखे और बत्तियाँ बंद रहती हैं। कक्षाओं में खिड़कियों से आने वाले प्राकृतिक प्रकाश का उपयोग होता है।
  4. वह परिसर को हरा-भरा रखता है। अधिक पेड़-पौधे लगाए जाते हैं — और उतना ही महत्वपूर्ण यह है कि उनके बड़े होने तक उनकी देखभाल की जाती है।
अंतिम बात सबसे महत्वपूर्ण क्यों है: पौधा लगाने में दस मिनट लगते हैं। उसे जीवित रखने में दो वर्ष लगते हैं। हरित विद्यालय वह नहीं जहाँ सबसे अधिक पौधे लगाए गए। हरित विद्यालय वह है जहाँ लगाए गए पौधे आज भी बढ़ रहे हैं।
एक बात ध्यान दीजिए: इन चारों में से किसी के लिए धन नहीं चाहिए। इनके लिए ऐसे विद्यार्थी चाहिए जो टपकते नल, जलती हुई बत्ती या ख़ाली पड़े कूड़ेदान को देख लें — और फिर कुछ करें।
प्र2.
क्या हम अपने विद्यालय को भी हरित विद्यालय बना सकते हैं?
उत्तर

हाँ। कोई भी विद्यालय हरित विद्यालय बन सकता है, और इसकी शुरुआत विद्यार्थी स्वयं कर सकते हैं। इसके लिए नए भवन या नई मशीनों की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं।

कक्षा इस तरह आरंभ कर सकती है—

  1. पहले देखिए। आँखें खोलकर पूरे विद्यालय में घूमिए। जो दिखे उसे लिखिए — टपकता नल, ख़ाली कक्ष में चलता पंखा, कक्षा के पीछे बिखरा कूड़ा।
  2. एक समस्या चुनिए। सब कुछ एक साथ ठीक करने की कोशिश मत कीजिए। वह समस्या चुनिए जिसे आपकी कक्षा सचमुच हल कर सकती है।
  3. छोटा समूह बनाइए। उसे एक नाम और एक काम दीजिए — जल-प्रहरी, अपशिष्ट-योद्धा, हरित-संरक्षक।
  4. सबसे छोटा उपयोगी कदम उठाइए। दो अतिरिक्त कूड़ेदान। रिसाव वाले नलों की सूची कार्यालय को देना। प्रति कक्षा एक पेड़, और पानी देने की बारी की सूची।
  5. सबको बताइए। सूचना-पट्ट पर एक चार्ट, या प्रात:कालीन सभा में दो मिनट।
  6. एक महीने बाद फिर जाँचिए। क्या नल अब भी टपक रहा है? क्या कूड़ेदान का उपयोग हो रहा है? यदि नहीं, तो कारण पूछिए और दूसरा तरीका अपनाइए।
विद्यार्थी यह काम अच्छा क्यों कर सकते हैं: बच्चे दिन भर विद्यालय के हर कोने में रहते हैं। शिक्षक और प्रधानाचार्य कुछ ही कक्षों में रहते हैं। इसलिए शौचालय के पीछे टपकता नल और सीढ़ी के नीचे पड़ा कूड़ा सबसे पहले विद्यार्थी ही देखते हैं।
प्र3.
विद्यार्थियों की बात सुनकर उनके ‘हमारे आस-पास की दुनिया’ विषय के शिक्षक अनुपम बोले, “मुझे आपकी चर्चा अच्छी लगी। मैं जानना चाहता हूँ कि आप यह कैसे आरंभ करेंगे?”
उत्तर

हम आरंभ अपने ही विद्यालय को ध्यान से देखने और जो मिले उसे ठीक-ठीक लिखने से करेंगे। जब तक यह पता न हो कि समस्या कहाँ है, उसे ठीक नहीं किया जा सकता।

नमूना उत्तर: “सर, हम ऐसे आरंभ करेंगे। पहले हम पूरे विद्यालय में घूमेंगे और उसका मानचित्र बनाएँगे — मुख्य भवन, खेल का मैदान, उद्यान, पानी की टंकियाँ, विद्यालय द्वार और मार्ग। फिर हम पाँच विद्यालय अन्वेषक समूह बनाएँगे। हर समूह एक काम लेगा — जल, विद्युत, अपशिष्ट, हरियाली और यातायात। हर समूह पहले ही तय कर लेगा कि उसे क्या देखना है, ताकि हम केवल इधर-उधर न घूमते रहें। हम एक सप्ताह लेंगे और हर समूह अपनी बात लिखेगा — कितने नलों से रिसाव है, कितने कूड़ेदान हैं, कौन-सा कक्ष सबसे गर्म है, कितने वृक्ष हैं। फिर हम कक्षा में एक साथ बैठकर अपने निष्कर्ष साझा करेंगे। उसके बाद हम दो-तीन ऐसी समस्याएँ चुनेंगे जिन्हें हम इसी सत्र में स्वयं हल कर सकते हैं, और हर एक के लिए योजना बनाएँगे।”

‘पहले देखिए’ ही सही पहला कदम क्यों है: अनुमान से किया गया परिश्रम व्यर्थ जाता है। हो सकता है कोई कक्षा पूरा महीना पौधे लगाने में लगा दे, जबकि विद्यालय की सबसे बड़ी समस्या रात भर बहते तीन नल थे। अवलोकन बताता है कि आपका परिश्रम कहाँ सबसे अधिक काम आएगा। वैज्ञानिक भी इसी तरह काम करते हैं — देखो, लिखो, फिर करो।
अपने समूह के लिए सुझाव: बाहर निकलने से पहले तय कीजिए कि क्या देखना है, और एक कॉपी साथ ले जाइए। भावनाएँ नहीं, संख्याएँ लिखिए — “कुछ नल टपक रहे हैं” नहीं, बल्कि “4 नल टपक रहे हैं”। संख्याएँ लोगों को समझाती हैं।
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