कक्षा ५ हिंदी अध्याय 12 समझ और अनुभव के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
गंगा नदी के साथ तीर्थ स्थलों के जुड़ने के क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तर

सबसे बड़ा कारण यह है कि भारतवासी गंगा को पवित्र नदी मानते हैं। पाठ में लिखा है — “मुझे भारतवासी पवित्र नदी मानते हैं।” जिस नदी को लोग पवित्र मानते हैं, उसके किनारे मंदिर बनते हैं, और जहाँ मंदिर बनते हैं वहाँ तीर्थ बस जाता है।

कारण एक-एक करके देखिए —

  1. गंगा पवित्र मानी जाती है। लोग उसमें स्नान करना पुण्य का काम मानते हैं, इसलिए उसके किनारे भीड़ जुटती है।
  2. जल हमेशा मिलता है। तीर्थ में दूर-दूर से लोग आते हैं। उन सबको पीने, नहाने और खाना बनाने के लिए पानी चाहिए, जो नदी से आसानी से मिल जाता है।
  3. जगह शांत और सुंदर होती है। पाठ कहता है — “यहाँ का प्राकृतिक दृश्य और वातावरण बहुत शांत है।” शांत जगह पूजा और साधना के लिए ठीक रहती है।
  4. साधु-संत वहीं बसते हैं। “मेरे किनारों पर साधु-संतों और महात्माओं के आश्रम हैं।” जहाँ आश्रम बनते हैं, वहीं धीरे-धीरे तीर्थ बन जाता है।
  5. कथाओं से जुड़ाव है। गंगोत्री में राजा भगीरथ ने तपस्या की थी, इसलिए वह स्थान पवित्र माना गया। ऐसी कथाओं से जुड़े स्थान तीर्थ बन जाते हैं।
  6. आने-जाने का रास्ता रहता है। पुराने ज़माने में नदी के किनारे-किनारे ही रास्ते चलते थे और नाव से यात्रा होती थी। इसलिए यात्रियों का पहुँचना आसान था।
पाठ से प्रमाण: गंगा के किनारे बसे तीर्थ पाठ में गिनाए ही गए हैं — गंगोत्री, ऋषिकेश, हरिद्वार, प्रयागराज और वाराणसी। हरिद्वार और प्रयागराज में तो हर बारहवें वर्ष कुंभ का मेला लगता है, जिसमें “देश के कोने-कोने से लाखों लोग आते हैं।”
प्र2.
यदि नदियाँ दिन-प्रतिदिन प्रदूषित होती रहेंगी तो हम पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर

सबसे सीधा प्रभाव यह होगा कि हमें पीने के लिए साफ़ पानी नहीं मिलेगा और हम बीमार पड़ने लगेंगे। नदी का पानी केवल नदी का नहीं है — वह हमारे नल, हमारे खेत और हमारे भोजन तक पहुँचता है।

किस पर असरक्या होगा
हमारी सेहतगंदा पानी पीने से पेट की बीमारियाँ, उल्टी-दस्त और चर्म रोग होंगे। नदी में नहाने से भी बीमारी फैल सकती है।
पीने का पानीनगरों में नल का पानी नदी से ही आता है। नदी गंदी होगी तो उसे साफ़ करना कठिन और महँगा हो जाएगा।
खेतीगंदा पानी खेतों में जाएगा तो फ़सल कमज़ोर होगी और अनाज भी दूषित हो जाएगा।
मछलियाँ और जलचरगंदे पानी में मछलियाँ, कछुए और डॉल्फ़िन जीवित नहीं रह पातीं। मछुआरों की रोज़ी-रोटी छिन जाएगी।
पशु-पक्षीनदी का पानी पीने वाले जानवर और पक्षी भी बीमार पड़ेंगे।
तीर्थ और मेलेजिस जल को लोग पवित्र मानकर स्नान करते हैं, वह गंदा हो जाएगा। तीर्थों की शोभा और श्रद्धा, दोनों घटेंगी।
आने वाली पीढ़ीहमारे बाद के बच्चों को साफ़ नदी देखने को ही नहीं मिलेगी — केवल चित्रों में।
सोचने की बात: पाठ में गंगा कहती है — “बहुत से नगर मेरे तट पर बस गए हैं। कई कारखाने खुल गए हैं। इन सबको मैं ही पानी पहुँचाती हूँ।” यानी नदी हमें पानी देती है और हम उसे गंदगी लौटाते हैं। जो गंदगी हम नदी में डालते हैं, वह घूम-फिरकर हमारे ही घर, हमारे ही गिलास तक लौट आती है।
आशा: पाठ निराशा पर नहीं रुकता। गंगा कहती है — “मेरे जल को शुद्ध करने के प्रयास आरंभ हो गए हैं।” यदि हम सब आज से थोड़ा-थोड़ा ध्यान रखें, तो वह दिन दूर नहीं जब गंगा का जल फिर स्वच्छ और निर्मल होगा।
प्र3.
पाठ में ‘कानपुर’ को भारत का प्रसिद्ध औद्योगिक नगर कहा गया है। यहाँ ‘औद्योगिक नगर’ से क्या आशय है?
उत्तर

‘औद्योगिक नगर’ का आशय है — ऐसा नगर जहाँ बहुत से उद्योग यानी कारखाने हों और जहाँ के बहुत से लोग उन्हीं कारखानों में काम करते हों।

शब्द को तोड़कर देखिए — उद्योग यानी कारखाना, और औद्योगिक यानी उद्योग से जुड़ा हुआ। इसलिए ‘औद्योगिक नगर’ = कारखानों वाला नगर।

पाठ की पंक्तियाँ —

“कानपुर भारत का प्रसिद्ध औद्योगिक नगर है।
यहाँ कपड़े, चमड़े और लोहे के कारखाने हैं।
इन कारखानों को पानी मुझसे ही मिलता है।”
औद्योगिक नगर की पहचानकानपुर में यह कैसे दिखता है
वहाँ बहुत से कारखाने होते हैंकपड़े, चमड़े और लोहे के कारखाने
वहाँ चीज़ें बनाई जाती हैंकपड़ा बुना जाता है, चमड़े की वस्तुएँ और लोहे का सामान बनता है
बहुत लोगों को काम मिलता हैआस-पास के गाँवों से लोग काम करने आते हैं
कारखानों को बहुत पानी चाहिए होता है“इन कारखानों को पानी मुझसे ही मिलता है” — यानी गंगा से
दूसरा पहलू भी देखिए: औद्योगिक नगर से लोगों को काम और देश को सामान मिलता है — यह अच्छी बात है। पर उन्हीं कारखानों का गंदा पानी नदी में जाता है, जिससे गंगा का “चमकीला रंग मटमैला हो जाता है।” इसलिए ज़रूरी है कि कारखाने अपना गंदा पानी साफ़ करके ही नदी में छोड़ें।
तीन तरह के नगर पहचानिए: जहाँ कारखाने अधिक हों — औद्योगिक नगर (कानपुर)। जहाँ मंदिर और श्रद्धालु अधिक हों — तीर्थ नगर (हरिद्वार, वाराणसी)। जहाँ विद्यालय-विश्वविद्यालय अधिक हों — शिक्षा नगर। एक ही नगर एक से अधिक तरह का भी हो सकता है।
क्या यह उपयोगी रहा?