प्र1.
गंगा नदी के साथ तीर्थ स्थलों के जुड़ने के क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तर
सबसे बड़ा कारण यह है कि भारतवासी गंगा को पवित्र नदी मानते हैं। पाठ में लिखा है — “मुझे भारतवासी पवित्र नदी मानते हैं।” जिस नदी को लोग पवित्र मानते हैं, उसके किनारे मंदिर बनते हैं, और जहाँ मंदिर बनते हैं वहाँ तीर्थ बस जाता है।
कारण एक-एक करके देखिए —
- गंगा पवित्र मानी जाती है। लोग उसमें स्नान करना पुण्य का काम मानते हैं, इसलिए उसके किनारे भीड़ जुटती है।
- जल हमेशा मिलता है। तीर्थ में दूर-दूर से लोग आते हैं। उन सबको पीने, नहाने और खाना बनाने के लिए पानी चाहिए, जो नदी से आसानी से मिल जाता है।
- जगह शांत और सुंदर होती है। पाठ कहता है — “यहाँ का प्राकृतिक दृश्य और वातावरण बहुत शांत है।” शांत जगह पूजा और साधना के लिए ठीक रहती है।
- साधु-संत वहीं बसते हैं। “मेरे किनारों पर साधु-संतों और महात्माओं के आश्रम हैं।” जहाँ आश्रम बनते हैं, वहीं धीरे-धीरे तीर्थ बन जाता है।
- कथाओं से जुड़ाव है। गंगोत्री में राजा भगीरथ ने तपस्या की थी, इसलिए वह स्थान पवित्र माना गया। ऐसी कथाओं से जुड़े स्थान तीर्थ बन जाते हैं।
- आने-जाने का रास्ता रहता है। पुराने ज़माने में नदी के किनारे-किनारे ही रास्ते चलते थे और नाव से यात्रा होती थी। इसलिए यात्रियों का पहुँचना आसान था।
पाठ से प्रमाण: गंगा के किनारे बसे तीर्थ पाठ में गिनाए ही गए हैं — गंगोत्री, ऋषिकेश, हरिद्वार, प्रयागराज और वाराणसी। हरिद्वार और प्रयागराज में तो हर बारहवें वर्ष कुंभ का मेला लगता है, जिसमें “देश के कोने-कोने से लाखों लोग आते हैं।”