कक्षा ५ हिंदी अध्याय 8 भाषा की बात के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
कोष्ठक में से उचित शब्द का चयन कर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए — (क) आज ............ ही हम हाथियों पर चढ़कर उद्यान देखने गए। (भोर, सुबह)
उत्तर

सही शब्द है — सुबह

पूरा वाक्य —
“आज सुबह ही हम हाथियों पर चढ़कर उद्यान देखने गए।”

यही वाक्य पाठ में पृष्ठ 85 पर ज्यों-का-त्यों छपा है, इसलिए इसमें कोई संदेह नहीं रहता।

‘भोर’ यहाँ क्यों नहीं बैठता: ‘भोर’ का अर्थ है — सूरज निकलने से ठीक पहले का समय। पर हिंदी में हम कहते हैं “भोर में” या “भोर होते ही”, अकेला ‘भोर’ इस वाक्य में अटपटा लगता है। ‘सुबह’ शब्द ऐसे ही चल जाता है — “आज सुबह ही”। इसलिए वाक्य में ‘सुबह’ ही ठीक बैठता है।
पास की एक और पंक्ति: इसी अनुच्छेद में आगे लिखा है — “इसके लिए हमें बहुत सवेरे उठना पड़ा — तब सूरज भी नहीं निकला था।” यानी उठे तो वे भोर में ही थे, पर उद्यान की सैर ‘सुबह’ हुई।
प्र2.
(ख) हमने एक सींग वाला गैंडा ............ बार देखा। (पहले, पहली)
उत्तर

सही शब्द है — पहली

पूरा वाक्य —
“हमने एक सींग वाला गैंडा पहली बार देखा।”
‘पहली’ क्यों, ‘पहले’ क्यों नहीं: क्योंकि आगे शब्द है बार, और ‘बार’ स्त्रीलिंग है। स्त्रीलिंग शब्द के साथ विशेषण भी स्त्रीलिंग रूप में आता है। इसलिए — पहली बार, दूसरी बार, तीसरी बार। ‘पहले’ पुल्लिंग रूप है, जैसे — पहले दिन, पहले महीने।
सहीग़लतकारण
पहली बारपहले बार‘बार’ स्त्रीलिंग है
पहला दिनपहली दिन‘दिन’ पुल्लिंग है
दूसरी कक्षादूसरे कक्षा‘कक्षा’ स्त्रीलिंग है
तीसरा पाठतीसरी पाठ‘पाठ’ पुल्लिंग है
प्र3.
(ग) हमारी यात्रा कुछ ............ ही समाप्त हो गई। (धीरे, जल्दी)
उत्तर

सही शब्द है — जल्दी

पूरा वाक्य —
“हमारी यात्रा कुछ जल्दी ही समाप्त हो गई।”

पाठ में यही बात इस तरह लिखी है — “हमारी यात्रा शीघ्र समाप्त हो गई। मेरा मन अभी भरा नहीं था।” शीघ्र का अर्थ ही जल्दी है।

‘धीरे’ यहाँ क्यों नहीं बैठता: ‘धीरे’ का अर्थ है — मंद गति से। पर यहाँ बात गति की नहीं, समय की है — यात्रा कितनी देर चली। यात्रा जल्दी खत्म हो गई, तभी तो मन नहीं भरा और अगले दिन वे फिर निकल पड़े। ‘धीरे समाप्त हो गई’ कहने से अर्थ ही नहीं बनता।
प्र4.
(घ) ड्राइवर हमें एक बील यानी झील की ............ ले गया। (और, ओर)
उत्तर

सही शब्द है — ओर

पूरा वाक्य —
“ड्राइवर हमें एक बील यानी झील की ओर ले गया।”

इन दो शब्दों को हमेशा के लिए अलग-अलग पहचान लीजिए —

शब्दअर्थवाक्य
ओरदिशा, तरफ़नाव झील की ओर बढ़ रही थी।
औरतथा; दो चीज़ों को जोड़ने वाला शब्दबील पर सारस और बगुला बैठे थे।
पहचानने का आसान तरीका: वाक्य में उस शब्द की जगह ‘तरफ़’ रखकर देखिए। अगर बात बन जाए तो ओर लिखिए — “झील की तरफ़ ले गया” — बात बनती है, इसलिए ‘ओर’ सही है। और अगर ‘तथा’ रखकर बात बने तो और लिखिए।
बील क्या है: पाठ ने खुद बता दिया — “एक बील यानी झील”। असम में झील को ‘बील’ कहते हैं। लेखक ने पहले वहाँ का शब्द दिया, फिर उसका अर्थ — यह अच्छे लेखन का ढंग है।
प्र5.
(ङ) मार्गदर्शक (गाइड) ने बताया ............ उन्हें देखना कठिन है। (कि, की)
उत्तर

सही शब्द है — कि

पूरा वाक्य —
“मार्गदर्शक (गाइड) ने बताया कि उन्हें देखना कठिन है।”

पाठ में भी यही वाक्य है — “गाइड ने बताया कि उन्हें देखना कठिन है क्योंकि वे रात में ही निकलते हैं।”

शब्दकामवाक्य
किदो वाक्यों को जोड़ता है — प्रायः ‘कहा’, ‘बताया’, ‘सुना’, ‘लगा’ के बादमहावत ने कहा कि मादा गैंडा हिंसक हो जाती है।
कीसंबंध बताता है — किसका, किसकीयह गैंडे की खाल है।
पहचानने का आसान तरीका: ‘की’ से पहले हमेशा कोई नाम या वस्तु होती है और वह बताता है कि चीज़ किसकी है — जैसे “झील की ओर”, “मेरी की हुई मेहनत”। पर ‘कि’ के आगे पूरा नया वाक्य शुरू हो जाता है — “बताया कि उन्हें देखना कठिन है।” यही सबसे पक्की पहचान है।
एक शब्द और: यहाँ ‘गाइड’ के साथ हिंदी शब्द मार्गदर्शक दिया गया है — मार्ग यानी रास्ता, दर्शक यानी दिखाने वाला। यानी रास्ता दिखाने वाला।
प्र6.
“सामने जंगली हाथियों का एक झुंड दिखा।” यहाँ ‘झुंड’ शब्द का प्रयोग हाथियों के समूह के लिए किया गया है। भिन्न-भिन्न समूहों के लिए ऐसे ही कुछ अन्य शब्दों का प्रयोग किया जाता है, जैसे – अंगूरों का गुच्छा, जूतों की जोड़ी आदि। (क) नीचे दिए गए चित्रों का सही नामों के साथ मिलान कीजिए —
चित्रों और नामों का मिलान छत्ता गुच्छा भीड़ गट्ठर झुंड रेवड़ कक्षा
पृष्ठ 91 पर दिया गया मिलान अभ्यास। एक मिलान पुस्तक में पहले से कर दिया गया है।
उत्तर

पृष्ठ 91 पर बाईं ओर सात चित्र हैं और दाईं ओर सात नाम। हाथियों वाले चित्र का मिलान पुस्तक ने पहले ही ‘झुंड’ से जोड़कर दिखा दिया है। पूरा सही मिलान यह रहा —

क्रमचित्र में क्या हैसही समूहवाचक शब्दपूरा रूप
1छल्ले में लगी बहुत-सी चाबियाँगुच्छाचाबियों का गुच्छा
2साथ-साथ खड़े कई हाथीझुंडहाथियों का झुंड (यह मिलान पुस्तक में पहले से बना हुआ है)
3मेज़ पर पढ़ते हुए विद्यार्थीकक्षाविद्यार्थियों की कक्षा
4डाल पर लटका मधुमक्खियों का घरछत्तामधुमक्खियों का छत्ता
5एक साथ खड़े बहुत-से लोगभीड़लोगों की भीड़
6एक के ऊपर एक रखी लकड़ियाँगट्ठरलकड़ियों का गट्ठर
7चरती हुई भेड़ें और मेमनारेवड़भेड़ों का रेवड़
हर समूह का अपना शब्द क्यों: हिंदी में समूह के लिए एक ही शब्द नहीं चलता। जो चीज़ें डोरी या डंठल से बँधी हों, उनके लिए गुच्छा या गट्ठर; जो जीव साथ-साथ चलते हों, उनके लिए झुंड या रेवड़; जो लोग बेतरतीब जमा हों, उनके लिए भीड़; और जो बच्चे पढ़ने के लिए बैठे हों, उनके लिए कक्षा। सही शब्द चुनने से वाक्य सुंदर लगता है।
याद रखने की बात: ‘रेवड़’ खास तौर पर भेड़-बकरियों के लिए बोला जाता है, और ‘झुंड’ बड़े पशुओं तथा पक्षियों के लिए — जैसे पाठ में “हिरण और जंगली भैंसों के कई झुंड”, “पक्षियों के झुंड”, “जंगली हाथियों का एक झुंड”।
प्र7.
(ख) अब मिलान किए गए समूह वाले शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए। जैसे – मेले में लोगों की बहुत भीड़ थी।
उत्तर

सातों समूहवाचक शब्दों के वाक्य नीचे दिए हैं। समूहवाचक शब्द मोटे अक्षरों में है।

शब्दवाक्य
गुच्छामाँ ने अलमारी खोलने के लिए चाबियों का गुच्छा मुझे थमा दिया।
झुंडशाम होते ही पक्षियों का एक झुंड पेड़ पर लौट आया।
कक्षाहमारी कक्षा ने मिलकर विद्यालय के आँगन में पौधे लगाए।
छत्ताआम की डाल पर मधुमक्खियों का बड़ा छत्ता लटका है, इसलिए हम उधर नहीं जाते।
भीड़मेले में लोगों की बहुत भीड़ थी। (यह वाक्य पुस्तक ने उदाहरण के रूप में दिया है।)
गट्ठरदादी सिर पर लकड़ियों का गट्ठर रखकर खेत से लौटीं।
रेवड़चरवाहा भेड़ों का रेवड़ लेकर पहाड़ी की ओर चल पड़ा।

कुछ और समूहवाचक शब्द, जो रोज़ काम आते हैं —

समूहशब्दवाक्य
अंगूरगुच्छाबाज़ार से अंगूरों का एक गुच्छा लाइए।
जूतेजोड़ीमुझे नए जूतों की एक जोड़ी मिली है।
गाय-भैंसगल्ला / झुंडगायों का झुंड तालाब की ओर जा रहा है।
कागज़ढेरमेज़ पर कागज़ों का ढेर लगा था।
फूलगुलदस्ताअतिथि को फूलों का गुलदस्ता भेंट किया गया।
तारेसमूहआकाश में तारों का एक सुंदर समूह दिखाई देता है।
वाक्य बनाते समय: पहले सोचिए कि वह चीज़ किसकी है — “चाबियों का”, “भेड़ों का”, “मधुमक्खियों का”। फिर उसके आगे समूह वाला शब्द रखिए। इससे वाक्य अपने आप सही बन जाता है।
प्र8.
अब नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित वाक्यांशों के स्थान पर तालिका में से एक शब्द चुनकर वाक्यों को पुनः लिखिए — (क) काजीरंगा का सौंदर्य देखने योग्य है। (तालिका — साप्ताहिक, मृदुभाषी, अग्रज, प्रशंसनीय, दर्शनीय)
उत्तर

सही शब्द है — दर्शनीय

पहले —
काजीरंगा का सौंदर्य देखने योग्य है।

अब —
काजीरंगा का सौंदर्य दर्शनीय है।

दर्शनीय = जो देखने योग्य हो। यह ‘दर्शन’ शब्द से बना है, और दर्शन का अर्थ है — देखना।

यह काम क्यों सीखते हैं: पुस्तक ने पृष्ठ 92 पर खुद समझाया है — ‘घोड़ा घास खाता है’ और ‘घोड़ा शाकाहारी है’ — दोनों में एक ही बात है। ‘घास खाने वाला’ इन तीन शब्दों की जगह एक शब्द ‘शाकाहारी’ रख दिया गया, और अर्थ में कोई अंतर नहीं आया। इसी तरह ‘देखने योग्य’ की जगह ‘दर्शनीय’ रख देने से वाक्य छोटा और सुंदर हो जाता है।
अपना वाक्य बनाइए: हमारे शहर का किला भी बहुत दर्शनीय है।
प्र9.
(ख) रश्मि का कार्य प्रशंसा के योग्य है।
उत्तर

सही शब्द है — प्रशंसनीय

पहले —
रश्मि का कार्य प्रशंसा के योग्य है।

अब —
रश्मि का कार्य प्रशंसनीय है।

प्रशंसनीय = जो प्रशंसा के योग्य हो, यानी जिसकी तारीफ़ की जानी चाहिए। यह ‘प्रशंसा’ शब्द से बना है।

ध्यान दीजिए: ‘दर्शनीय’ और ‘प्रशंसनीय’ — दोनों के अंत में -नीय लगा है। हिंदी में ‘-नीय’ जोड़ने से प्रायः वही अर्थ बनता है — “जो ऐसा किए जाने योग्य हो”। जैसे — पठनीय (पढ़ने योग्य), आदरणीय (आदर के योग्य), स्मरणीय (याद रखने योग्य)।
अपना वाक्य बनाइए: सफ़ाई करने वालों का काम सचमुच प्रशंसनीय है।
प्र10.
(ग) गौरव को उसके सहपाठी मधुर बोलने वाला लड़का मानते हैं।
उत्तर

सही शब्द है — मृदुभाषी

पहले —
गौरव को उसके सहपाठी मधुर बोलने वाला लड़का मानते हैं।

अब —
गौरव को उसके सहपाठी मृदुभाषी मानते हैं।

मृदुभाषी = मीठा बोलने वाला। यह दो शब्दों से बना है — मृदु (कोमल, मीठा) + भाषी (बोलने वाला)।

सहपाठी = साथ पढ़ने वाला। सह यानी साथ, पाठी यानी पढ़ने वाला।

वाक्य में ‘लड़का’ का क्या हुआ: ‘मृदुभाषी’ शब्द अपने आप में ‘ऐसा व्यक्ति’ का अर्थ रखता है, इसलिए ‘लड़का’ लिखना ज़रूरी नहीं रह जाता। चाहें तो “गौरव को उसके सहपाठी मृदुभाषी लड़का मानते हैं” भी लिख सकते हैं — दोनों ठीक हैं। पर छोटा वाक्य अधिक सुंदर लगता है।
अपना वाक्य बनाइए: हमारे विद्यालय के चौकीदार बहुत मृदुभाषी हैं, इसलिए बच्चे उनसे बात करने में झिझकते नहीं।
प्र11.
(घ) विद्यालय में सप्ताह में एक बार श्रमदान किया जाता है।
उत्तर

सही शब्द है — साप्ताहिक

पहले —
विद्यालय में सप्ताह में एक बार श्रमदान किया जाता है।

अब —
विद्यालय में साप्ताहिक श्रमदान किया जाता है।

साप्ताहिक = जो हर सप्ताह हो, यानी सप्ताह में एक बार। यह ‘सप्ताह’ शब्द से बना है।

श्रमदान = अपना श्रम यानी मेहनत बिना पैसे लिए देना — जैसे मिलकर आँगन साफ़ करना, क्यारी बनाना।

कितनी बारएक शब्दवाक्य
हर दिनदैनिकहम दैनिक प्रार्थना में भाग लेते हैं।
हर सप्ताहसाप्ताहिकहमारे गाँव में साप्ताहिक बाज़ार लगता है।
हर महीनेमासिकमासिक परीक्षा हर महीने के अंत में होती है।
हर सालवार्षिकविद्यालय का वार्षिक उत्सव दिसंबर में होता है।
प्र12.
(ङ) मेरा बड़ा भाई सैनिक है।
उत्तर

सही शब्द है — अग्रज

पहले —
मेरा बड़ा भाई सैनिक है।

अब —
मेरा अग्रज सैनिक है।

अग्रज = बड़ा भाई। यह दो हिस्सों से बना है — अग्र (आगे) + (जन्मा हुआ)। यानी जो पहले जन्मा, वह अग्रज।

इसी से जुड़ा एक और शब्द: जो बाद में जन्मा, उसे अनुज कहते हैं — यानी छोटा भाई। ‘अनु’ का अर्थ है — पीछे। इसलिए अग्रज = बड़ा भाई और अनुज = छोटा भाई।
अब पाँचों उत्तर एक साथ देख लीजिए —
वाक्यरेखांकित वाक्यांशएक शब्द
(क) काजीरंगा का सौंदर्य देखने योग्य है।देखने योग्यदर्शनीय
(ख) रश्मि का कार्य प्रशंसा के योग्य है।प्रशंसा के योग्यप्रशंसनीय
(ग) गौरव को उसके सहपाठी मधुर बोलने वाला लड़का मानते हैं।मधुर बोलने वालामृदुभाषी
(घ) विद्यालय में सप्ताह में एक बार श्रमदान किया जाता है।सप्ताह में एक बारसाप्ताहिक
(ङ) मेरा बड़ा भाई सैनिक है।बड़ा भाईअग्रज
जाँच का तरीका: तालिका के पाँचों शब्द एक-एक बार ही काम आते हैं। इसलिए उत्तर लिख लेने के बाद गिन लीजिए — कोई शब्द बचा तो नहीं, कोई दो बार तो नहीं लिखा गया।
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