यह पत्र चाचा अरूप ने अपने घर के बच्चों को लिखा है। कारण यह कि वे काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा पर गए थे और वहाँ जो कुछ देखा-सुना, वह बच्चों तक पहुँचाना चाहते थे।
| प्रश्न का हिस्सा | उत्तर | पाठ से प्रमाण |
|---|---|---|
| किसने लिखा? | चाचा अरूप ने | पत्र के अंत में लिखा है — “तुम्हारे चाचा / अरूप” |
| किसे लिखा? | घर के बच्चों को | पत्र की पहली पंक्ति — “प्रिय बच्चो,” |
| कहाँ से लिखा? | काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से | “यह पत्र मैं तुम्हें काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लिख रहा हूँ।” |
| क्यों लिखा? | अपनी यात्रा का अनुभव बच्चों को बताने के लिए — कि उद्यान कहाँ है, वहाँ कौन-कौन से पशु-पक्षी हैं, एक सींग वाला गैंडा कैसा होता है, उसकी संख्या क्यों घटी, और जंगल के जीव आपस में कैसे मिल-जुलकर रहते हैं। | पूरा पत्र यही बताता है। अंत में वे अपने मन की बात भी कहते हैं — “हम अपने वन्य-साथियों से बहुत कुछ सीख सकते हैं। है न!” |