कक्षा ५ हिंदी अध्याय 8 सोचिए और लिखिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
यह पाठ एक पत्र है। यह पत्र किसने, किसे और क्यों लिखा है?
उत्तर

यह पत्र चाचा अरूप ने अपने घर के बच्चों को लिखा है। कारण यह कि वे काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा पर गए थे और वहाँ जो कुछ देखा-सुना, वह बच्चों तक पहुँचाना चाहते थे।

प्रश्न का हिस्साउत्तरपाठ से प्रमाण
किसने लिखा?चाचा अरूप नेपत्र के अंत में लिखा है — “तुम्हारे चाचा / अरूप”
किसे लिखा?घर के बच्चों कोपत्र की पहली पंक्ति — “प्रिय बच्चो,”
कहाँ से लिखा?काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से“यह पत्र मैं तुम्हें काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लिख रहा हूँ।”
क्यों लिखा?अपनी यात्रा का अनुभव बच्चों को बताने के लिए — कि उद्यान कहाँ है, वहाँ कौन-कौन से पशु-पक्षी हैं, एक सींग वाला गैंडा कैसा होता है, उसकी संख्या क्यों घटी, और जंगल के जीव आपस में कैसे मिल-जुलकर रहते हैं।पूरा पत्र यही बताता है। अंत में वे अपने मन की बात भी कहते हैं — “हम अपने वन्य-साथियों से बहुत कुछ सीख सकते हैं। है न!”
यह पत्र है, यह कैसे पहचानें: पत्र की तीन पहचानें इसमें साफ़ हैं — (1) शुरू में संबोधन, यानी जिसे लिखा जा रहा है उसका नाम — “प्रिय बच्चो,” (2) बीच में अपनी बात, जो सीधे ‘तुम’ कहकर कही गई है, और (3) अंत में लिखने वाले का नाम — “तुम्हारे चाचा, अरूप”। इन्हीं तीन चीज़ों से पता चल जाता है कि यह कहानी नहीं, चिट्ठी है।
ध्यान दीजिए: पत्र के भीतर लिखने वाले का नाम ‘अरूप’ है, और पाठ के अंत में, पृष्ठ 87 पर रचनाकार का नाम छपा है — अरूप कुमार दत्ता, तथा नीचे “(रत्न सागर प्रकाशन से साभार)”।
प्र2.
मादा गैंडा कब और क्यों हिंसक हो जाती है?
उत्तर

मादा गैंडा तब हिंसक हो जाती है जब उसका शिशु यानी बच्चा उसके साथ हो। कारण यह है कि वह अपने बच्चे की रक्षा करना चाहती है।

पाठ की पंक्तियाँ —
“हमारा हाथी आगे बढ़ा तो एक मादा राइनो (गैंडा) अपने बच्चे के साथ दिखाई दी।
महावत हमें पास नहीं ले गए। उन्होंने कहा कि शिशु साथ में हो तो मादा राइनो (गैंडा) हिंसक हो जाती है।
हाथी के पास आने पर वह हमला कर सकती है।”

दो शब्द समझ लीजिए —

  • शिशु = बच्चा।
  • हिंसक = जो मारने-काटने पर उतर आए।
वह ऐसा क्यों करती है: गैंडे का बच्चा छोटा और कमज़ोर होता है। वह न तेज़ भाग सकता है, न अपनी रक्षा कर सकता है। इसलिए माँ को ही उसकी ढाल बनना पड़ता है। पास आती हुई किसी भी बड़ी चीज़ को — यहाँ तक कि हाथी को भी — वह खतरा मान लेती है और पहले ही हमला कर देती है। यह क्रोध नहीं, माँ का डर और प्यार है।
इसीलिए महावत पास नहीं ले गए: महावत यानी हाथी चलाने वाला। वह जंगल को अच्छी तरह जानता है। उसने दूरी बनाए रखी — यही समझदारी है। जंगल में किसी भी पशु के बच्चे के पास नहीं जाना चाहिए, चाहे वह कितना ही प्यारा क्यों न लगे।
प्र3.
भारतीय गैंडों की संख्या क्यों घट रही है?
उत्तर

भारतीय गैंडों की संख्या इसलिए घटी, क्योंकि लोगों ने उनके सींग पाने के लिए बहुत बड़ी संख्या में उनका शिकार किया

पाठ की पंक्तियाँ —
“पर लोगों ने राइनो के सींग पाने के लिए उनका शिकार किया।
लोग यह मानते थे कि सींग में औषधि-संबंधी गुण हैं।
बाद में वैज्ञानिकों ने सिद्ध किया कि सींग में ऐसा कुछ नहीं है।
इंडियन राइनो (भारतीय गैंडों) का शिकार इतनी अधिक संख्या में हुआ है कि अब उनकी संख्या कम हो गई है।”

बात को क्रम से समझिए —

  1. चरण 1: लोगों ने मान लिया कि गैंडे के सींग में औषधि यानी दवा जैसे गुण हैं।
  2. चरण 2: इसी विश्वास पर सींग पाने के लिए गैंडों का शिकार होने लगा।
  3. चरण 3: शिकार इतना अधिक हुआ कि गैंडों की गिनती तेज़ी से गिर गई।
  4. चरण 4: बाद में वैज्ञानिकों ने सिद्ध कर दिया कि सींग में ऐसा कोई गुण है ही नहीं। पर तब तक बहुत नुकसान हो चुका था।
यह कितना बड़ा नुकसान है, यह ऐसे समझिए: पाठ बताता है कि सैकड़ों वर्ष पहले ये गैंडे “पश्चिम में पेशावर से लेकर पूर्व में असम तक” पाए जाते थे — यानी बहुत बड़े इलाके में। और आज? “इनमें आधे से अधिक काजीरंगा में रहते हैं।” इतना बड़ा घर सिमटकर एक उद्यान जितना रह गया। इसीलिए पूरे संसार से पशु-प्रेमी इन्हें देखने काजीरंगा आते हैं।
सीखने की बात: एक ग़लत विश्वास कितना नुकसान कर सकता है, यह इसका उदाहरण है। लोग बिना जाँचे मान बैठे कि सींग में दवा है, और उसी के कारण एक पूरी प्रजाति खतरे में पड़ गई। किसी बात को मानने से पहले यह पूछना चाहिए — इसका प्रमाण क्या है?
प्र4.
भगवान कृष्ण ने हाथी के स्थान पर गैंडे को रणक्षेत्र में भेजने का विचार क्यों छोड़ दिया?
उत्तर

क्योंकि गैंडा निर्देशों का पालन नहीं कर सका। यानी उसे जो सिखाया गया, उस पर वह चला ही नहीं। इसलिए भगवान कृष्ण ने कवच सहित ही उसे वापस वन में भेज दिया।

पाठ की पंक्तियाँ —
“भगवान कृष्ण ने एक बार सोचा कि हाथी के बदले गैंडे को रणक्षेत्र में भेजा जाए।
उन्होंने उसे कवच पहनाकर अभ्यास कराया।
पर गैंडा निर्देशों का पालन न कर सका
बस भगवान कृष्ण ने कवच सहित ही उसे वापस वन में भेज दिया।”

तीन शब्द समझ लीजिए —

  • रणक्षेत्र = युद्ध का मैदान।
  • कवच = लोहे का वह पहनावा जो युद्ध में शरीर को बचाता है।
  • निर्देश = बताई गई बात, आदेश।
युद्ध में केवल ताकत काफ़ी नहीं होती: गैंडा ताकतवर था और उसकी खाल भी मोटी थी — फिर भी काम न आया। कारण यह कि युद्ध में पशु को हर आदेश पर मुड़ना, रुकना और बढ़ना पड़ता है। जो कहा माने ही नहीं, वह अपने ही लोगों के लिए खतरा बन जाता है। हाथी यह सब सीख लेता है, गैंडा नहीं सीख सका।
यह कथा पाठ में क्यों आई: यह महावत की सुनाई हुई एक रुचिकर कथा है। लेखक ने पहले लिखा — “इंडियन राइनो (भारतीय गैंडे) के शरीर पर मोटी तह होती है, जैसे वह कवच पहने हो।” उसी बात पर महावत ने यह कथा सुनाई, जो बताती है कि गैंडे का ‘कवच’ आया कहाँ से। यह मन बहलाने वाली लोक-कथा है, इतिहास नहीं।
प्र5.
प्रथम दिन की यात्रा के बाद लेखक का मन क्यों नहीं भरा?
उत्तर

क्योंकि पहले दिन की यात्रा बहुत जल्दी समाप्त हो गई। जितना देखा उससे कहीं अधिक देखना बाकी था, इसलिए मन नहीं भरा।

पाठ की पंक्तियाँ —
“हमारी यात्रा शीघ्र समाप्त हो गई। मेरा मन अभी भरा नहीं था।
अगले दिन सुबह का नाश्ता करके हम फिर निकल पड़े। इस बार हम जीप में गए।
साथ में वन संरक्षक भी था।”

शीघ्र यानी जल्दी। मन न भरना यानी जी न भरना — अभी और देखने का मन बना रहना।

मन न भरने के कारण पाठ से ये बनते हैं —

  1. उद्यान बहुत बड़ा था और उसमें सैकड़ों पशु थे — एक सुबह में सब कहाँ दिख पाते।
  2. पहली बार एक सींग वाला गैंडा सामने देखा। ऐसी चीज़ एक बार देखकर मन नहीं भरता।
  3. मादा गैंडे के पास महावत ले ही नहीं गए, क्योंकि साथ में उसका शिशु था।
  4. अभी बील (झील), उसके पक्षी और जंगली हाथियों का झुंड देखना बाकी था — ये सब अगले दिन ही दिखे।
और इसी का फल क्या मिला: दूसरे दिन वे जीप में, वन संरक्षक के साथ गए। उसी दिन उन्हें बील पर सैकड़ों पक्षी, पानी में ऊदबिलाव और लौटते समय जंगली हाथियों का पूरा झुंड दिखा। लेखक ने खुद लिखा — “लौटते समय तो हमारे भाग्य ही खुल गए।” यानी मन न भरना अच्छा ही रहा — दोबारा जाने से ही वह सब देखने को मिला।
प्र6.
दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए।
पृष्ठ 90 पर दिया गया चित्र
पृष्ठ 90 पर दिया गया चित्र।
यहाँ पक्षी से संबंधित एक प्रश्न दिया गया है। अब आप भी अपनी लेखन-पुस्तिका में इस पक्षी से संबंधित तीन और प्रश्नों का निर्माण कीजिए — उदाहरण — यह चित्र किस पक्षी का है?
उत्तर

पृष्ठ 90 पर एक रंग-बिरंगा तोते जैसा पक्षी पेड़ की डाल पर बैठा है। उसके पंखों में लाल, पीला और नीला रंग है और चोंच मोटी तथा मुड़ी हुई है। इसे मकाऊ कहते हैं — यह तोते के परिवार का ही पक्षी है।

पुस्तक ने एक प्रश्न उदाहरण के लिए दे दिया है — “यह चित्र किस पक्षी का है?” अब आपको तीन और प्रश्न बनाने हैं।

नमूना उत्तर — मेरे तीन प्रश्न:

  1. इस पक्षी के पंखों में कौन-कौन से रंग दिखाई दे रहे हैं?
  2. इसकी चोंच किस आकार की है और वह इसके किस काम आती होगी?
  3. यह पक्षी किस चीज़ पर बैठा है और उसके आसपास क्या-क्या दिख रहा है?

चाहें तो इनमें से भी चुन सकते हैं —

प्रश्नयह प्रश्न किस बात पर हैउत्तर (जो चित्र से मिलता है)
इस पक्षी के पंखों में कौन-कौन से रंग हैं?रंगलाल, पीला, नीला और थोड़ा हरा।
इसकी चोंच कैसी है?बनावटमोटी, मज़बूत और नीचे की ओर मुड़ी हुई — ऐसी चोंच से कड़े बीज और फल आसानी से तोड़े जाते हैं।
यह किस पर बैठा है?जगहएक पेड़ की डाल पर। आसपास लंबी हरी पत्तियाँ हैं।
इसकी पूँछ कैसी है?बनावटलंबी और नुकीली, जिसमें भी रंग भरे हैं।
यह पक्षी क्या खाता होगा?भोजनफल, बीज और मेवे। तोते वाली मुड़ी चोंच इसी काम की होती है।
क्या यह पक्षी हमारे आसपास दिखता है?अपना अनुभवयह पक्षी हमारे यहाँ खुले में नहीं दिखता; हरा तोता ज़रूर दिखता है।
अच्छा प्रश्न कैसे बनता है: चित्र को चार आँखों से देखिए — रंग, आकार, जगह और काम। हर एक पर एक प्रश्न बन जाता है। और प्रश्न ऐसा बनाइए जिसका उत्तर चित्र देखकर दिया जा सके — जैसे “इसकी चोंच कैसी है?” अच्छा प्रश्न है, पर “इसकी उम्र कितनी है?” का उत्तर चित्र से नहीं मिलेगा।
ध्यान रहे: प्रश्न के अंत में प्रश्नवाचक चिह्न (?) ज़रूर लगाइए, और प्रश्न में कौन, क्या, कैसा, कहाँ, क्यों, कितने जैसे शब्द रखिए। इन्हीं शब्दों से वाक्य प्रश्न बनता है।
क्या यह उपयोगी रहा?