a. एक पद से अगले पद का अंतर देखिए।
– 40 + 6→ – 34 + 6→ – 28 + 6→ – 22 → – 16, – 10, – 4
b. इस अनुक्रम में दो धाराएँ साथ-साथ चल रही हैं — एक घटती हुई और एक बढ़ती हुई।
विषम स्थानों पर: 3, 2, 1, 0 … हर बार एक कम → अगला – 1, फिर – 2
सम स्थानों पर: 4, 5, 6, 7 … हर बार एक अधिक → अगला 8
अत: अनुक्रम आगे बढ़ता है – 1, 8, – 2
c. अंतरों को देखिए — वे हर बार 1 से बढ़ते जाते हैं।
12 – 6→ 6 – 5→ 1 – 4→ – 3 – 3→ – 6
पीछे की ओर अंतर – 7 और – 8 थे, अत: आरंभ की दो लुप्त संख्याएँ 27, 19 हैं
आगे अंतर – 2, – 1, 0 होंगे, अत: अनुक्रम बढ़ता है – 8, – 9, – 9 (और उसके बाद फिर – 8)
पूरा अनुक्रम: 27, 19, 12, 6, 1, – 3, – 6, – 8, – 9, – 9, – 8, – 6 …
(c) पलटता क्यों है: घटाई जाने वाली संख्या छोटी होती जाती है (6, 5, 4, 3, 2, 1), फिर 0 हो जाती है और उसके बाद अंतर धनात्मक हो जाते हैं। इसलिए अनुक्रम पहले गिरता है, – 9 पर समतल होता है और फिर चढ़ने लगता है।