गणित प्रकाश अध्याय 10 आइए, पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
दिए गए युग्मों के बीच सभी पूर्णांकों को बढ़ते क्रम में लिखिए। a. 0 और – 7 b. – 4 और 4 c. – 8 और – 15 d. – 30 और – 23
उत्तर

‘बीच’ का अर्थ है कि दी गई दोनों संख्याएँ स्वयं नहीं लिखी जाएँगी। बढ़ता क्रम = संख्या रेखा पर बाएँ से दाएँ।

a. 0 और – 7 के बीच: – 6, – 5, – 4, – 3, – 2, – 1
b. – 4 और 4 के बीच: – 3, – 2, – 1, 0, 1, 2, 3
c. – 8 और – 15 के बीच: – 14, – 13, – 12, – 11, – 10, – 9
d. – 30 और – 23 के बीच: – 29, – 28, – 27, – 26, – 25, – 24
(c) और (d) में सावधानी: प्रश्न में छोटी संख्या बाद में लिखी है। – 15, – 8 से छोटी है, अत: सूची – 14 से आरंभ होकर – 9 तक चढ़ेगी। भाग (b) में 0 को सूची में लिखना न भूलिए।
प्र2.
ऐसी तीन संख्याएँ बताइए जिनका योग – 8 है।
उत्तर

अनेक उत्तर संभव हैं। कुछ उदाहरण, जाँच सहित—

(– 3) + (– 4) + (– 1) = – 8
5 + (– 6) + (– 7) = – 8
10 + (– 12) + (– 6) = – 8
0 + (– 8) + 0 = – 8
100 + (– 50) + (– 58) = – 8
अपना उत्तर कैसे बनाएँ: कोई भी दो संख्याएँ लिखकर उनका योग निकालिए, फिर तीसरी संख्या ऐसी चुनिए कि कुल योग – 8 हो जाए। 5 और – 6 का योग – 1 है, और – 1 को – 8 तक पहुँचने के लिए – 7 चाहिए।
प्र3.
यहाँ दो पासे हैं जिनके फलकों पर संख्याएँ दर्शाई गई हैं— – 1, 2, – 3, 4, – 5, 6। इन पासों को उछालने पर सबसे छोटा संभावित योग – 10 = (– 5) + (– 5) है और सबसे बड़ा संभावित योग 12 = (6) + (6) है। इन दो पासों पर संख्याओं को जोड़ने से (– 10) और (+ 12) के बीच की कुछ संख्याएँ प्राप्त करना संभव नहीं है। ऐसी संख्याओं का पता लगाइए।
उत्तर

सभी संभावित उछालों की योग-सारणी बनाइए। फलक हैं – 5, – 3, – 1, 2, 4, 6।

+– 5– 3– 1246
– 5– 10– 8– 6– 3– 11
– 3– 8– 6– 4– 113
– 1– 6– 4– 2135
2– 3– 11468
4– 1136810
613581012

जो योग प्राप्त हो सकते हैं वे हैं — – 10, – 8, – 6, – 4, – 3, – 2, – 1, 1, 3, 4, 5, 6, 8, 10, 12।

अत: – 10 और + 12 के बीच जो संख्याएँ प्राप्त नहीं हो सकतीं वे हैं
– 9, – 7, – 5, 0, 2, 7, 9, 11
0 क्यों नहीं मिल सकता: 0 पाने के लिए दोनों फलक एक-दूसरे के प्रतिलोम होने चाहिए — जैसे + 5 और – 5, या + 1 और – 1। इन पासों पर धनात्मक फलक 2, 4, 6 हैं और ऋणात्मक फलक – 1, – 3, – 5, अत: कोई युग्म एक-दूसरे को रद्द नहीं करता।
स्वयं जाँचिए: – 9 से + 11 तक की 21 संख्याओं में से 8 संख्याएँ असंभव हैं।
प्र4.
इन्हें हल कीजिए— 8 – 13, (– 8) – (13), (– 13) – (– 8), (– 13) + (– 8), 8 + (– 13), (– 8) – (– 13), (13) – 8, 13 – (– 8)
उत्तर

पहले हर घटाव को ‘प्रतिलोम जोड़िए’ के रूप में बदल दीजिए।

पदजोड़ के रूप मेंउत्तर
8 – 138 + (– 13)– 5
(– 8) – (13)– 8 + (– 13)– 21
(– 13) – (– 8)– 13 + 8– 5
(– 13) + (– 8)पहले से ही जोड़ है– 21
8 + (– 13)पहले से ही जोड़ है– 5
(– 8) – (– 13)– 8 + 13+ 5
(13) – 813 + (– 8)+ 5
13 – (– 8)13 + 8+ 21
पैटर्न देखिए: केवल चार भिन्न उत्तर आते हैं — – 5, – 21, + 5 और + 21। अंक सदैव 5 या 21 हैं, बदलते केवल चिह्न हैं। 13 और 8 का अंतर 5 है और योग 21, और चिह्न इस बात पर निर्भर करता है कि इनमें कौन ‘भारी’ पड़ता है।
प्र5.
निम्नलिखित के वर्ष ज्ञात कीजिए— a. वर्तमान वर्ष से 150 वर्ष पूर्व कौन-सा वर्ष था? b. वर्तमान वर्ष से 2200 वर्ष पूर्व कौन-सा वर्ष था? संकेत— याद रखिए कि कोई 0 वर्ष नहीं था। c. 680 ईसा पूर्व से 320 वर्ष बाद कौन-सा वर्ष होगा?
उत्तर

वर्तमान वर्ष 2026 ईस्वी मानकर हल कीजिए (आप जिस वर्ष यह प्रश्न हल कर रहे हों, उसी से यही विधि अपनाइए)।

a. 150 वर्ष पीछे जाने पर भी हम ईस्वी वर्षों में ही रहते हैं, अत: सीधा घटाव पर्याप्त है।

2026 – 150 = 1876 ईस्वी

b. 2200 वर्ष पीछे जाने पर हम 1 ईस्वी को पार करके ईसा पूर्व वर्षों में पहुँच जाते हैं। इसे दो चरणों में कीजिए।

2026 ईस्वी से 1 ईस्वी तक: 2026 – 1 = 2025 वर्ष
अभी और पीछे जाना है: 2200 – 2025 = 175 वर्ष
चूँकि कोई वर्ष 0 नहीं था, 1 ईस्वी से ठीक पहले का वर्ष 1 ईसा पूर्व है, उससे पहले 2 ईसा पूर्व …
अत: हम पहुँचते हैं 175 ईसा पूर्व

c. 680 ईसा पूर्व में 320 वर्ष जोड़ने पर हम वर्ष 1 की ओर बढ़ते हैं, इसलिए ईसा पूर्व की संख्या घट जाती है।

680 – 320 = 360 ईसा पूर्व
ईसा पूर्व वर्ष उलटे क्यों गिने जाते हैं: समय-रेखा पर ईसा पूर्व वर्षों को ऋणात्मक और ईस्वी वर्षों को धनात्मक मानिए, जिनके बीच 0 है ही नहीं। वर्ष जोड़ने का अर्थ सदैव दाईं ओर बढ़ना है — 680 ईसा पूर्व + 320 वर्ष = 360 ईसा पूर्व, जो इतिहास में बाद का समय है।
ध्यान दीजिए: पुस्तक की उत्तर-सूची में भाग (c) का उत्तर ‘– 360 ईसा पूर्व’ लिखा है। ऋण चिह्न की आवश्यकता नहीं है — ‘ईसा पूर्व’ शब्द स्वयं बता देता है कि वर्ष ईसा से पहले का है। सही उत्तर 360 ईसा पूर्व है।
प्र6.
निम्नलिखित अनुक्रम को पूरा कीजिए— a. (– 40), (– 34), (– 28), (– 22), ___, ___, ___ b. 3, 4, 2, 5, 1, 6, 0, 7, ___, ___, ___ c. ___, ___, 12, 6, 1, (– 3), (– 6), ___, ___, ___
उत्तर

a. एक पद से अगले पद का अंतर देखिए।

– 40 + 6→ – 34 + 6→ – 28 + 6→ – 22 → – 16, – 10, – 4

b. इस अनुक्रम में दो धाराएँ साथ-साथ चल रही हैं — एक घटती हुई और एक बढ़ती हुई।

विषम स्थानों पर: 3, 2, 1, 0 … हर बार एक कम → अगला – 1, फिर – 2
सम स्थानों पर: 4, 5, 6, 7 … हर बार एक अधिक → अगला 8
अत: अनुक्रम आगे बढ़ता है – 1, 8, – 2

c. अंतरों को देखिए — वे हर बार 1 से बढ़ते जाते हैं।

12 – 6→ 6 – 5→ 1 – 4→ – 3 – 3→ – 6
पीछे की ओर अंतर – 7 और – 8 थे, अत: आरंभ की दो लुप्त संख्याएँ 27, 19 हैं
आगे अंतर – 2, – 1, 0 होंगे, अत: अनुक्रम बढ़ता है – 8, – 9, – 9 (और उसके बाद फिर – 8)
पूरा अनुक्रम: 27, 19, 12, 6, 1, – 3, – 6, – 8, – 9, – 9, – 8, – 6 …
(c) पलटता क्यों है: घटाई जाने वाली संख्या छोटी होती जाती है (6, 5, 4, 3, 2, 1), फिर 0 हो जाती है और उसके बाद अंतर धनात्मक हो जाते हैं। इसलिए अनुक्रम पहले गिरता है, – 9 पर समतल होता है और फिर चढ़ने लगता है।
प्र7.
यहाँ छह पूर्णांक कार्ड हैं (+ 1), (+ 7), (+ 18), (– 5), (– 2), (– 9)। आप इनमें से किसी भी कार्ड का चयन कर सकते हैं तथा जोड़ और घटा के उपयोग द्वारा एक पद बनाइए। यहाँ एक पद है— (+ 18) + (+ 1) – (+ 7) – (– 2) जिसका मान (+ 14) है। दिए गए कार्ड्स से एक से अधिक कार्ड का चयन कीजिए और एक पद बनाइए जिसका मान (– 30) के आस-पास हो।
उत्तर

हम ठीक – 30 बना सकते हैं। दो सरल तरीके—

तरीका 1: (– 5) – (+ 7) – (+ 18)
= – 5 – 7 – 18 = – 30
तरीका 2: (– 2) + (– 9) – (+ 18) – (+ 1)
= – 2 – 9 – 18 – 1 = – 30
खोजने का तरीका: बहुत ऋणात्मक मान बनाने के लिए ऋणात्मक कार्डों को जोड़िए और धनात्मक कार्डों को घटाइए — धनात्मक संख्या घटाने से मान नीचे जाता है। सबसे बड़ा कार्ड (+ 18) सबसे उपयोगी है, बशर्ते उसे घटाया जाए।
प्रयास करें: इन्हीं छह कार्डों से क्या आप + 30 बना सकते हैं? (+ 18) + (+ 7) + (+ 1) – (– 5) … से आरंभ कीजिए और देखिए आप कितने पास पहुँचते हैं।
प्र8.
दो धनात्मक पूर्णांकों का योग सदैव धनात्मक होता है लेकिन एक (धनात्मक पूर्णांक) – (धनात्मक पूर्णांक) धनात्मक या ऋणात्मक हो सकता है। आप निम्न के विषय में क्या कह सकते हैं— a. (धनात्मक) – (ऋणात्मक) b. (धनात्मक) + (ऋणात्मक) c. (ऋणात्मक) + (ऋणात्मक) d. (ऋणात्मक) – (ऋणात्मक) e. (ऋणात्मक) – (धनात्मक) f. (ऋणात्मक) + (धनात्मक)
उत्तर
प्रकारपरिणामउदाहरण
a.(धनात्मक) – (ऋणात्मक)सदैव धनात्मक7 – (– 2) = 9,   1 – (– 100) = 101
b.(धनात्मक) + (ऋणात्मक)धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य7 + (– 2) = 5,   2 + (– 7) = – 5,   7 + (– 7) = 0
c.(ऋणात्मक) + (ऋणात्मक)सदैव ऋणात्मक– 3 + (– 4) = – 7
d.(ऋणात्मक) – (ऋणात्मक)धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य– 3 – (– 8) = 5,   – 8 – (– 3) = – 5,   – 3 – (– 3) = 0
e.(ऋणात्मक) – (धनात्मक)सदैव ऋणात्मक– 3 – 4 = – 7
f.(ऋणात्मक) + (धनात्मक)धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य– 3 + 8 = 5,   – 8 + 3 = – 5,   – 3 + 3 = 0
कुछ निश्चित क्यों और कुछ नहीं: (a), (c) और (e) में दोनों गतियाँ एक ही ओर धकेलती हैं — (a) में आप शून्य से ऊपर हैं और और ऊपर जाते हैं; (c) तथा (e) में आप शून्य से नीचे हैं और और नीचे जाते हैं। (b), (d) और (f) में दोनों संख्याएँ विपरीत दिशाओं में खींचती हैं, इसलिए परिणाम इस पर निर्भर करता है कि किसके अंक बड़े हैं।
ध्यान दीजिए: (b), (d) और (f) वास्तव में एक ही स्थिति हैं, क्योंकि d और f को ‘प्रतिलोम जोड़िए’ नियम से b के रूप में लिखा जा सकता है।
प्र9.
इस लड़ी में 100 टोकन हैं, जो एक विशेष पैटर्न में व्यवस्थित किए गए हैं, इस लड़ी का मान क्या है?
उत्तर

लड़ी का पैटर्न देखिए: 3 हरे टोकन फिर 2 लाल टोकन, और यही बार-बार दोहराया गया है।

+ + + + + + 5 टोकन का एक खंड = + 1
लड़ी में 5 टोकन का एक खंड दोहराया गया है — तीन हरे और दो लाल। प्रत्येक खंड का मान (+ 3) + (– 2) = + 1 है।
एक खंड का मान = (+ 3) + (– 2) = + 1
लड़ी में खंडों की संख्या = 100 ÷ 5 = 20
लड़ी का मान = 20 × (+ 1) = + 20

उत्तर: लड़ी का मान + 20 है।

दूसरा तरीका: 20 खंडों में 20 × 3 = 60 हरे और 20 × 2 = 40 लाल टोकन हैं। 40 शून्य जोड़े रद्द कीजिए तो 20 हरे टोकन शेष रहते हैं, अत: मान + 20। ✔
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