प्र1.
पिछले अभ्यासों में आपने जो उपरोक्त कार्य किया है, क्या आपने ध्यान दिया कि एक ऋणात्मक संख्या को घटाना, उसी संगत धनात्मक संख्या के जोड़ने के समान है?
उत्तर
हाँ — यह हर युग्म में हुआ।
+ 105 – (– 55) = + 160 तथा + 105 + (+ 55) = + 160
+ 80 – (– 150) = + 230 तथा + 80 + (+ 150) = + 230
– 99 – (– 200) = + 101 तथा – 99 + (+ 200) = + 101
+ 80 – (– 150) = + 230 तथा + 80 + (+ 150) = + 230
– 99 – (– 200) = + 101 तथा – 99 + (+ 200) = + 101
ऐसा क्यों होता है: ‘– (– 55)’ यह पूछता है कि – 55 से + 105 कितना ऊपर है। भूतल से 55 स्तर नीचे से बाहर आने के लिए पहले वे 55 स्तर चढ़ने ही पड़ेंगे — इसलिए 55 यात्रा में जुड़ जाता है, घटता नहीं। संक्षेप में, a – (– b) = a + b।