क्या आप दी गई आकृतियों में कोण ढूँढ़ सकते हैं? किसी भी एक कोण की भुजाएँ बनाइए और शीर्ष का नाम दीजिए।
उत्तर
हाँ। दिए गए चित्र में एक स्पष्ट कोण ∠BDC है।
शीर्ष: D — वह बिंदु जहाँ दोनों किनारे मिलते हैं।
भुजाएँ: दोनों किनारों पर खींची गई किरणें DB तथा DC।
कोण: उभयनिष्ठ प्रारंभिक बिंदु B से निकली दो किरणें BD और BE। B शीर्ष है तथा BD और BE भुजाएँ।
यह भी कीजिए: अन्य चित्रों में भी कोण खोजिए — पक्षी की खुली चोंच, घड़ी की सूईयाँ, मेज़ का कोना, पेड़ की शाखाएँ। हर बार पहले वह बिंदु ढूँढ़िए जहाँ दो किनारे मिलते हैं (शीर्ष), फिर किनारों पर दो किरणें खींचिए।
प्र2.
भुजा ST और SR को चिह्नित करते हुए कोण बनाइए।
उत्तर
दोनों भुजाएँ ST और SR हैं, अतः दोनों किरणें एक ही बिंदु S से आरंभ होनी चाहिए — इसी से S शीर्ष बन जाता है।
कोण ∠TSR — दोनों भुजाएँ ST और SR एक ही बिंदु S से आरंभ होती हैं, इसलिए S ही शीर्ष है।
चरण:
एक बिंदु अंकित करके उसे S नाम दीजिए।
S से एक किरण खींचकर उस पर एक बिंदु T अंकित कीजिए।
उसी बिंदु S से दूसरी दिशा में एक और किरण खींचकर उस पर बिंदु R अंकित कीजिए।
S के पास भुजाओं के बीच एक छोटा चाप बनाइए और कोण को ∠TSR (या ∠RST) नाम दीजिए।
सुझाव: शीर्ष का अक्षर सदैव नाम के बीच में आता है — इसीलिए यह ∠TSR है, ∠STR नहीं।
प्र3.
व्याख्या कीजिए कि ∠APB को ∠P क्यों लिखा जा सकता?
उत्तर
क्योंकि बिंदु P पर एक से अधिक कोण बन रहे हैं, अतः केवल अक्षर P से यह पता ही नहीं चलेगा कि किस कोण की बात हो रही है।
P से तीन किरणें निकलने पर तीन अलग-अलग कोण बनते हैं — इसलिए केवल “∠P” लिखना अस्पष्ट होगा।
आकृति में तीन किरणें PA, PB और PC एक ही बिंदु P से निकलती हैं। इससे एक ही शीर्ष पर तीन कोण बनते हैं—
∠APB ∠BPC ∠APC
यह नियम क्यों है: ∠P नाम केवल शीर्ष बताता है, भुजाएँ नहीं। प्रत्येक भुजा पर एक बिंदु लेकर — एक पर A, दूसरी पर B — कोण पूर्णतः निश्चित हो जाता है। ∠P केवल तभी लिखा जा सकता है जब P पर ठीक एक ही कोण बन रहा हो।
प्र4.
नीचे दी गई आकृति में अंकित कोणों के नाम लिखिए।
उत्तर
शीर्ष T पर अंकित दोनों कोण। पृष्ठ पर मापने पर ∠PTR ≈ 104° तथा ∠QTR ≈ 64°।
दोनों अंकित कोण हैं—
∠PTR (या ∠RTP) तथा ∠QTR (या ∠RTQ)
दोनों का शीर्ष T है। पहला कोण भुजाओं TP और TR से तथा दूसरा भुजाओं TQ और TR से बनता है।
सुझाव: दोनों नामों में शीर्ष T बीच में लिखा गया है। छपी हुई आकृति को मापने पर ∠PTR ≈ 104° (अधिक कोण) तथा ∠QTR ≈ 64° (न्यून कोण) मिलते हैं।
प्र5.
अपने कागज पर तीन बिंदु इस प्रकार अंकित कीजिए कि वे एक रेखा पर स्थित न हों। उन्हें A, B और C से चिह्नित कीजिए। सभी संभव रेखाएँ खींचिए, जो इन बिंदु-युग्मों से गुजरती हों। इस प्रकार आपको कितनी रेखाएँ प्राप्त होती हैं? उनके नाम भी बताइए। A, B और C का प्रयोग करते हुए आप कितने कोण बना सकते हैं? उन सभी के नाम लिखिए और आकृति 2.9 के अनुसार उनमें से प्रत्येक को एक चाप के साथ चिह्नित कीजिए।
उत्तर
एक रेखा पर न स्थित तीन बिंदुओं से 3 रेखाएँ और प्रत्येक कोने पर एक, कुल 3 कोण बनते हैं।
रेखाओं की संख्या: 3। ये हैं— AB, BC तथा CA।
बिंदु-युग्म: (A, B), (B, C), (C, A) → 3 रेखाएँ
कोणों की संख्या: 3। प्रत्येक शीर्ष पर एक—
∠ABC (या ∠CBA) ∠BCA (या ∠ACB) ∠CAB (या ∠BAC)
केवल 3 ही क्यों: प्रत्येक बिंदु पर ठीक दो रेखाएँ मिलती हैं और दो किरणों से केवल एक कोण बनता है। तीन शीर्ष × 1 कोण = 3 कोण। ध्यान रहे कि तीनों बिंदु एक रेखा पर न हों — यदि वे एक ही रेखा पर होते तो कोई कोण बनता ही नहीं (केवल सरल कोण बनता)।
प्र6.
अपने कागज पर चार बिंदु इस प्रकार अंकित कीजिए कि उनमें से कोई भी तीन बिंदु एक रेखा पर न हों। उन्हें A, B, C और D से चिह्नित कीजिए। सभी संभव रेखाएँ खींचिए, जो इन बिंदु-युग्मों से गुजरती हों। इस प्रकार आपको कितनी रेखाएँ प्राप्त होती हैं? उनके नाम भी बताइए। आप A, B, C और D से कितने कोणों का नामकरण कर सकते हैं? उन्हें लिखिए और उनमें से प्रत्येक को आकृति 2.9 के अनुसार चाप द्वारा अंकित कीजिए।
उत्तर
चार बिंदु, जिनमें कोई तीन एक रेखा पर नहीं — 6 रेखाएँ: AB, BC, CD, DA, AC और BD।
रेखाओं की संख्या: 6।
AB, BC, CD, DA, AC, BD
कोणों की संख्या: 12 — चारों बिंदुओं में से प्रत्येक पर तीन।
शीर्ष
वहाँ से निकलती किरणें
कोण
A
AB, AC, AD
∠BAC, ∠CAD, ∠BAD
B
BA, BC, BD
∠ABC, ∠CBD, ∠ABD
C
CA, CB, CD
∠ACB, ∠BCD, ∠ACD
D
DA, DB, DC
∠ADB, ∠BDC, ∠ADC
गिनती इस प्रकार बनती है: 4 बिंदुओं में से एक युग्म 4 × 3 ÷ 2 = 6 प्रकार से चुना जा सकता है, अतः 6 रेखाएँ। प्रत्येक बिंदु पर तीन रेखाएँ मिलती हैं; उन तीन किरणों में से 2 चुनने के 3 × 2 ÷ 2 = 3 तरीके हैं। चार शीर्ष × 3 = 12 कोण।
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