क्या आप प्रत्येक स्थिति में बनते हुए कोण को देख पा रहे हैं? क्या आप कोण को उसकी भुजाओं और शीर्ष के साथ अंकित कर सकते हैं?
उत्तर
हाँ — प्रत्येक स्थिति में एक कोण बनता है।
शीर्ष: पुस्तक की सिलाई वाली किनार (स्पाइन), जिसके परितः कवर घूमता है।
भुजाएँ: पुस्तक का कवर तथा उसके नीचे सपाट पड़ा पृष्ठ (या मेज़)।
कोण: उभयनिष्ठ प्रारंभिक बिंदु B से निकली दो किरणें BD और BE। B शीर्ष है तथा BD और BE भुजाएँ।
कारण: कोण उन दो किरणों से बनता है जो एक ही बिंदु से आरंभ होती हैं। यहाँ स्पाइन वही उभयनिष्ठ प्रारंभिक बिंदु है और कवर तथा नीचे का पृष्ठ दो किरणों का काम करते हैं। कवर उठाने पर केवल घुमाव की मात्रा बदलती है — इसलिए भुजाओं की लंबाई वही रहते हुए भी कोण बढ़ता जाता है।
प्र2.
कौन-सा कोण बड़ा है— पहली स्थिति का कोण या दूसरी स्थिति का कोण?
उत्तर
दूसरी स्थिति का कोण बड़ा है।
स्थिति 2 तक पहुँचने के लिए विद्या को कवर को स्थिति 1 की अपेक्षा अधिक घुमाना पड़ता है।
स्थिति 1 < स्थिति 2 < स्थिति 3 < स्थिति 4 < स्थिति 5 < स्थिति 6
मुख्य विचार: जिस प्रकार रेखाखंड का आकार उसकी लंबाई से नापा जाता है, उसी प्रकार कोण का आकार शीर्ष के परितः घुमाव की मात्रा से नापा जाता है। जितना अधिक घुमाव, उतना ही बड़ा कोण।
प्र3.
एक परकार (कम्पास) या डिवाइडर की भुजाओं को घुमाने पर एक कोण बनता है। शीर्ष वह बिंदु है जहाँ दोनों भुजाएँ मिलती या जुड़ती हैं। कोण की भुजाओं और शीर्ष को पहचानिए। … चश्मा, पर्स और अन्य साधारण वस्तुओं को देखिए। उनकी भुजाओं और शीर्ष को अंकित करते हुए कोण को पहचानिए।
उत्तर
इनमें से हर वस्तु में एक कब्ज़ा (hinge) है — और कब्ज़ा ही शीर्ष है।
वस्तु
शीर्ष (स्थिर बिंदु)
कोण की भुजाएँ
परकार / डिवाइडर
दोनों टाँगों को जोड़ने वाला पेच
दोनों टाँगें
कैंची
बीच की कील
दोनों ब्लेड
चश्मा
काँच के पास का कब्ज़ा
फ्रेम तथा साइड की डंडी
पर्स / पुस्तक
मोड़ अथवा स्पाइन
दोनों फ्लैप या कवर
दरवाजा
चौखट पर लगा कब्ज़ा
दरवाजा तथा दीवार
ये सब कोण क्यों हैं: इनमें से प्रत्येक वस्तु में एक भाग को दूसरे भाग के सापेक्ष एक स्थिर बिंदु के परितः घुमाया जाता है। यही घुमाव तो कोण मापता है।
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