गणित प्रकाश अध्याय 2 आइए, पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
एक आयताकर कागज को मोड़िए। अब घुमाव के निशान पर एक रेखा खींचिए। घुमाव और कागज की भुजाओं के बीच बने कोणों को नाम दीजिए और उन कोणों की तुलना कीजिए। आयताकार कागज को घुमाकर विभिन्न कोण बनाइए एवं उनकी तुलना कीजिए। यह भी बताइए कि इनमें से कौन-सा कोण सबसे बड़ा है और कौन-सा कोण सबसे छोटा है?
उत्तर

कागज को इस प्रकार मोड़िए कि क्रीज़ आमने-सामने की दो भुजाओं को काटे। क्रीज़ को EF नाम दीजिए, जहाँ E और F दोनों भुजाओं पर हैं। इस प्रकार चार कोण बनते हैं—

∠AEF,   ∠BEF,   ∠DFE,   ∠CFE

तुलना करने पर (ट्रेस करके अध्यारोपण द्वारा)—

  • यदि क्रीज़ तिरछी है, तो ∠AEF और ∠CFE अधिक कोण हैं तथा ∠BEF और ∠DFE न्यून कोण। अर्थात् ∠AEF = ∠CFE > ∠BEF = ∠DFE
  • यदि क्रीज़ भुजा के लंबवत बने, तो चारों कोण बराबर समकोण हो जाते हैं।
∠AEF + ∠BEF = 180°   (ये किनारे पर सरल कोण बनाते हैं)
कारण: एक ही भुजा पर बने दोनों कोण मिलकर सीधी रेखा बनाते हैं, इसलिए एक को बड़ा करने पर दूसरा अपने-आप छोटा हो जाता है। इस तरह बनने वाला सबसे बड़ा कोण सरल कोण (180°) से थोड़ा ही कम होता है और सबसे छोटा 0° के पास का पतला-सा कोण।
प्र2.
प्रत्येक स्थिति में बताइए कि कौन-सा कोण बड़ा है और क्यों? a. ∠AOB या ∠XOY b. ∠AOB या ∠XOB c. ∠XOB या ∠XOC — अपने मित्रों से चर्चा कीजिए कि आपने यह निर्णय कैसे लिया कि कौन-सा कोण बड़ा है।
उत्तर
AXYBC32°O
शीर्ष O से निकली किरणें OA, OX, OY और OB। B तथा C एक ही किरण पर हैं, अतः OB और OC एक ही भुजा हैं। मापने पर— ∠AOB ≈ 90°, ∠XOB ≈ 60°, ∠XOY ≈ 32°।

a. ∠AOB बड़ा है।

∠AOB = ∠AOX + ∠XOY + ∠YOB

पूर्ण सदैव अपने किसी भी भाग से बड़ा होता है और ∠XOY तो ∠AOB का केवल एक भाग है। चाँदे से मापने पर ∠AOB ≈ 90° जबकि ∠XOY ≈ 32°।

b. ∠AOB बड़ा है।

∠AOB = ∠AOX + ∠XOB   अतः   ∠AOB > ∠XOB
(≈ 90° के सामने ≈ 60°)

c. कोई भी नहीं — दोनों बराबर हैं: ∠XOB = ∠XOC।

(c) कई विद्यार्थियों को क्यों चौंकाता है: B और C, O से निकली एक ही किरण पर स्थित हैं। अतः OB और OC एक ही भुजा के दो नाम हैं और दोनों कोण ठीक उन्हीं भुजाओं से बने हैं। भुजा को लंबा करने से कोण बड़ा नहीं होता — केवल घुमाने से होता है।
प्र3.
कौन-सा कोण बड़ा है— ∠XOY या ∠AOB? कारण बताइए।
उत्तर
XAYB∠XOY ≈ 111°∠AOB ≈ 55°O
चारों किरणें O से निकलती हैं। पृष्ठ पर मापने पर ∠XOY ≈ 111° तथा ∠AOB ≈ 55° — परंतु कोई भी कोण दूसरे के भीतर नहीं है।

∠XOY बड़ा है। छपी हुई आकृति को चाँदे से मापने पर—

∠XOY ≈ 111°     ∠AOB ≈ 55°

परंतु यह उत्तर केवल देखकर नहीं मिलता, और प्रश्न 2 वाली युक्ति भी यहाँ काम नहीं करती।

“भाग और पूर्ण” वाला तर्क यहाँ क्यों नहीं चलता: प्रश्न 2 में एक कोण पूरी तरह दूसरे के भीतर था। यहाँ चारों किरणें एक के बाद एक इस क्रम में हैं— OB से वामावर्त चलिए तो B, Y, A, X। इस प्रकार ∠AOB, OY से नीचे तक फैला है और ∠XOY, OA से ऊपर तक — अर्थात् कोई भी कोण दूसरे के भीतर नहीं है। इसलिए केवल देखकर कुछ नहीं कहा जा सकता।

तब क्या करें—

  1. अध्यारोपण — ∠AOB को ट्रेसिंग पेपर पर उतारिए, उसका शीर्ष O पर तथा OA को OX पर रखिए और देखिए कि OB कहाँ पड़ती है।
  2. मापन — दोनों कोणों को चाँदे से मापकर संख्याओं की तुलना कीजिए। इससे तुरंत निर्णय हो जाता है।
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