आपकी कक्षा की खिड़कियों में कितने समकोण हैं? क्या अपनी कक्षा में आप और समकोण देख सकते हैं?
उत्तर
खिड़की प्रायः आयताकार होती है और प्रत्येक आयत में 4 समकोण होते हैं — हर कोने पर एक।
1 खिड़की-खाना = 4 समकोण 4 खानों वाली खिड़की = 4 × 4 = 16 समकोण (इसके अतिरिक्त बाहरी चौखट के 4 समकोण)
अपनी खिड़की के खाने गिनिए और 4 से गुणा कीजिए।
कक्षा में अन्य समकोण—
श्यामपट्ट, दरवाजे, कॉपी, मेज़ की सतह तथा फर्श की टाइलों के कोने;
जहाँ दो दीवारें मिलती हैं और जहाँ दीवार फर्श से मिलती है;
चार्ट पेपर, डस्टर, अलमारी तथा उसके खानों के कोने;
सेट-स्क्वायर की दो भुजाएँ और ज्यामिति बॉक्स का कोना।
स्वयं जाँचिए: कागज को दो बार मोड़कर “समकोण जाँचक” बनाइए और उसे इन कोनों पर रखकर देखिए।
प्र2.
बिंदु A को ग्रिड के दूसरे बिंदुओं से एक सरल रेखा में इस प्रकार जोड़ें कि एक सरल कोण प्राप्त हो। इसे करने के विभिन्न तरीके क्या हो सकते हैं?
उत्तर
A पर सरल कोण बनने के लिए दोनों भुजाओं का A से ठीक विपरीत दिशाओं में जाना आवश्यक है — अर्थात् जिस बिंदु से जोड़ना है वह किरण AB को A से पीछे बढ़ाने पर मिलने वाली किरण पर हो।
A पर सरल कोण— A को AB की ठीक विपरीत दिशा वाले ग्रिड-बिंदु से मिलाइए; पहले ग्रिड में सीधे बाएँ और दूसरे में तिरछे ऊपर-बाएँ।
ग्रिड
A से B तक का कदम
A को कहाँ जोड़ें
ऐसे ग्रिड-बिंदु
पहला (AB क्षैतिज)
3 कदम दाएँ
उसी पंक्ति में A के बाईं ओर का कोई भी ग्रिड-बिंदु
3
दूसरा (AB तिरछा)
2 कदम दाएँ और 2 कदम नीचे
उसी तिरछी दिशा में ऊपर-बाएँ — 1 बाएँ व 1 ऊपर, अथवा 2 बाएँ व 2 ऊपर
2
हर स्थिति में बना कोण 180° का ही होता है।
कितने भिन्न तरीके? प्रत्येक ग्रिड में काम करने वाली दिशा केवल एक है — AB के ठीक विपरीत दिशा। उस दिशा में पड़ने वाले सभी ग्रिड-बिंदु वही सरल कोण देते हैं, क्योंकि वे सब एक ही किरण पर हैं। अतः बिंदु कई हैं, पर सरल कोण एक ही।
प्र3.
अब बिंदु A को ग्रिड के दूसरे बिंदुओं से एक सरल रेखा में इस प्रकार जोड़ें कि एक समकोण प्राप्त हो। इसे करने के विभिन्न तरीके क्या हो सकते हैं? संकेत— रेखा को आगे बढ़ाएँ, जैसा कि नीचे दिए गए चित्र में दिखाया गया है। A पर समकोण प्राप्त करने के लिए, हमें इससे गुजरने वाली एक रेखा खींचनी होगी, जो सरल कोण CAB को दो बराबर भागों में विभाजित करती हो।
उत्तर
A पर समकोण के लिए नई रेखा को AB पर लंब होना चाहिए। वर्गाकार ग्रिड पर इसकी एक सुंदर युक्ति है।
यदि B तक पहुँचने के लिए A से a कदम दाएँ और b कदम नीचे चलना पड़ता है, तो लंब दिशा होगी — b कदम दाएँ और a कदम ऊपर (अथवा b कदम बाएँ और a कदम नीचे)
A पर समकोण— पहले ग्रिड में सीधे ऊपर या सीधे नीचे; दूसरे ग्रिड में 2 बाएँ-2 नीचे अथवा 2 दाएँ-2 ऊपर।
ग्रिड
A से B तक का कदम
A से लंब दिशा
भिन्न तरीके
पहला (AB क्षैतिज)
3 दाएँ
सीधे ऊपर (2 बिंदु) अथवा सीधे नीचे (3 बिंदु)
2
दूसरा (AB तिरछा)
2 दाएँ, 2 नीचे
2 दाएँ व 2 ऊपर, अथवा 2 बाएँ व 2 नीचे
2
अतः प्रत्येक ग्रिड में A पर दो भिन्न समकोण बनते हैं — रेखा AB के दोनों ओर एक-एक — और उस दिशा में पड़ने वाले किसी भी ग्रिड-बिंदु तक रेखा खींची जा सकती है।
स्वयं जाँचिए: संकेत का प्रयोग कीजिए — BA को A से आगे C तक बढ़ाइए। आपकी खींची रेखा सरल कोण ∠CAB को दो बराबर भागों में बाँटेगी, अतः प्रत्येक भाग 180° ÷ 2 = 90°।
प्र4.
कागज को घुमाकर तिरछा निशान बनाइए। अब एक अन्य निशान बनाइए जो पिछले तिरछे निशान पर लंब हो। a. अब आपके पास कितने समकोण हैं? तर्क संगत उत्तर दीजिए कि ये कोण पूर्णतया समकोण क्यों हैं? b. वर्णन कीजिए कि आपने इसे कैसे मोड़ा ताकि जो व्यक्ति इस प्रक्रिया को करना नहीं जानता वह आपकी प्रक्रिया का अनुसरण करके समकोण बना सके।
उत्तर
समकोण पर काटती दो क्रीज़ें — 90°-90° के चार पूर्ण समकोण।
a. चार समकोण बनते हैं — दोनों क्रीज़ एक-दूसरे को काटती हैं और उस बिंदु के चारों ओर के पूरे घुमाव को चार बराबर भागों में बाँट देती हैं।
पूर्ण घुमाव = 360° 4 बराबर कोण → प्रत्येक = 360° ÷ 4 = 90°
औचित्य: दूसरा मोड़ पहली क्रीज़ के एक आधे भाग को दूसरे आधे भाग पर ठीक लाकर बनाया गया था। अध्यारोपण से एक ओर के दोनों कोण बराबर हो जाते हैं और वे मिलकर सरल कोण बनाते हैं—
दो बराबर कोण जिनका योग 180° है → प्रत्येक = 90°
यही तर्क क्रीज़ के दूसरी ओर भी लागू होता है, अतः चारों पूर्ण समकोण हैं।
b. कोई भी अनुसरण कर सके, ऐसा वर्णन—
एक कागज लीजिए और उसे किसी भी तिरछी दिशा में एक बार मोड़िए। मोड़ को दबाकर खोल दीजिए — तिरछी क्रीज़ बन गई।
अब कागज को दूसरी बार इस प्रकार मोड़िए कि पहली क्रीज़ का एक भाग ठीक उसी क्रीज़ के दूसरे भाग पर आ जाए।
दूसरे मोड़ को दबाकर कागज खोलिए। दोनों क्रीज़ जिस बिंदु पर मिलती हैं वहाँ चार समकोण बनते हैं।
सुझाव: बिना चाँदे के ठीक 90° बनाने का यह सबसे तेज तरीका है — मापने का काम कागज स्वयं कर देता है।
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