पिछली आकृतियों में न्यून कोण, समकोण, अधिक कोण और सरल कोण को पहचानिए।
उत्तर
प्रत्येक कोण की तुलना समकोण से कीजिए (कॉपी के कोने को जाँचक की तरह प्रयोग कीजिए)—
पाँच प्रकार के कोण — न्यून, समकोण, अधिक, सरल तथा प्रतिवर्ती।
प्रकार
कैसे पहचानें
पिछली आकृतियों में कहाँ
न्यून
कॉपी के कोने से छोटा
घूर्णन भुजाओं के सँकरे कोण; विद्या की पुस्तक की स्थिति 1 और 2; कागज के मोड़ पर बने पतले कोण
समकोण
कॉपी के कोने पर ठीक बैठता है
दो क्रीज़ों के कटान पर बने चारों कोण; आयताकार कागज के कोने; L के आकार में खुली पुस्तक
अधिक
कोने से बड़ा पर सीधी रेखा नहीं
तिरछी क्रीज़ पर बने चौड़े कोण; विद्या की पुस्तक की स्थिति 5
सरल
दोनों भुजाएँ एक ही सीधी रेखा में
मेज़ पर पूरी खुली पुस्तक का ∠AOB (स्थिति 6)
प्र2.
कुछ न्यून कोण और अधिक कोण भिन्न दशाओं में बनाइए।
उत्तर
इन्हें ऊपर, नीचे, बाएँ और दाएँ — हर ओर खुलते हुए बनाइए। कोण किस दिशा में खुलता है, इससे उसका प्रकार नहीं बदलता।
भिन्न-भिन्न दिशाओं में बने न्यून कोण (45°, 60°, 80°) तथा अधिक कोण (100°, 135°, 160°)।
न्यून कोण (90° से कम): 20°, 45°, 60° तथा 80° बनाइए।
अधिक कोण (90° और 180° के बीच): 100°, 120°, 135° तथा 160° बनाइए।
स्वयं जाँचिए: अपनी कॉपी का कोना प्रत्येक बनाए हुए कोण के शीर्ष पर रखिए। यदि आपका कोण कोने के भीतर छिप जाए तो वह न्यून है; यदि कोने से बाहर खुले तो अधिक कोण है।
प्र3.
क्या आप जानते हैं कि न्यून और अधिक शब्दों का क्या अर्थ है? न्यून का अर्थ नुकीला और अधिक का अर्थ कुंद होता है। आपको क्या लगता है कि इन शब्दों का चयन क्यों किया गया होगा?
उत्तर
क्योंकि ये शब्द ठीक वही बताते हैं जैसे ये कोण दिखते हैं।
न्यून कोण का मुँह सँकरा होता है, इसलिए शीर्ष नुकीला बनता है — जैसे पेंसिल की नोक, सुई या काँटा।
अधिक कोण का मुँह चौड़ा होता है, इसलिए शीर्ष चपटा और कुंद दिखता है — जैसे चम्मच का किनारा या गोल पत्थर।
पाँच प्रकार के कोण — न्यून, समकोण, अधिक, सरल तथा प्रतिवर्ती।
विचार: भुजाओं के बीच घुमाव जितना कम, कोना उतना ही नुकीला दिखता है; घुमाव जितना अधिक, कोना उतना ही खुलकर चपटा हो जाता है। इसीलिए “नुकीला” और “कुंद” 90° से कम और 90° से अधिक के लिए बहुत अच्छे रोज़मर्रा के नाम हैं।
प्र4.
ज्ञात कीजिए कि नीचे दी गई आकृतियों में कितने न्यून कोण हैं— अगली आकृति क्या होगी और उसमें कितने न्यून कोण होंगे? क्या आप संख्याओं में कोई पैटर्न देखते हैं?
उत्तर
पृष्ठ 32 की तीनों आकृतियाँ — 3, 12 और 21 न्यून कोण। हर नया भीतरी त्रिभुज एक छोटे त्रिभुज को चार में बदल देता है।
आकृति
उसमें छोटे त्रिभुज
न्यून कोणों की संख्या
पहली
1
3
दूसरी
4
12
तीसरी
7
21
चौथी (अगली)
10
30
अगली आकृति एक और छोटे त्रिभुज के मध्य-बिंदुओं को जोड़ने से बनती है और उसमें 30 न्यून कोण होंगे।
हर बार 9 अधिक क्यों: इन चित्रों का प्रत्येक त्रिभुज समबाहु है, अतः उसका हर कोण 60° का — अर्थात् न्यून। किसी एक छोटे त्रिभुज के मध्य-बिंदुओं को जोड़ने पर वह 4 छोटे त्रिभुजों में बदल जाता है, अर्थात् 3 त्रिभुज बढ़ जाते हैं और हर त्रिभुज 3 न्यून कोण देता है—
3 × 3 = 9 नए न्यून कोण
इसलिए न्यून कोणों की संख्या सदैव 3 × (छोटे त्रिभुजों की संख्या) होती है: 3 × 1, 3 × 4, 3 × 7, 3 × 10 …
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