गणित प्रकाश अध्याय 2 आइए, पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
चाँदे का प्रयोग करते हुए निम्न कोणों के डिग्री माप ज्ञात कीजिए?
उत्तर

चाँदे का केंद्र शीर्ष H पर रखिए, एक भुजा को 0 रेखा पर रखिए और उसी पैमाने पर दूसरी भुजा पढ़िए।

47°23°108°
पृष्ठ 40 के तीन कोण — 47°, 23° तथा 108°, भिन्न-भिन्न दिशाओं में।
आकृतिकोणमापप्रकार
पहली (शीर्ष H नीचे)∠IHJ47°न्यून
दूसरी (शीर्ष H ऊपर)∠GHK23°न्यून
तीसरी (शीर्ष H बाईं ओर)∠IHJ108°अधिक

बीच वाली आकृति में I और J उन्हीं दोनों किरणों पर स्थित हैं जिन पर G और K हैं, अतः उस कोण को ∠IHJ भी कहा जा सकता है।

सुझाव: यदि कोई भुजा छोटी होने से गोल पैमाने तक न पहुँचे तो उसे रूलर से बढ़ा लीजिए। भुजाएँ लंबी करने पर कोण नहीं बदलता। (ठीक-ठीक मापने पर ये तीनों कोण 47.0°, 23.5° तथा 108.8° हैं।)
प्र2.
चाँदे का प्रयोग करते हुए अपनी कक्षा में दिख रहे विभिन्न कोणों के डिग्री माप ज्ञात कीजिए।
उत्तर

यह एक क्रियाकलाप है — मापिए और लिखिए। नीचे दी गई सारणी अपनी कॉपी में बनाकर भरिए—

वस्तुकोण कहाँ हैअपेक्षित माप
कॉपी / श्यामपट्ट का कोनादो किनारों के बीच90°
खुला दरवाजादरवाजे और दीवार के बीच0° से लगभग 180° तक कुछ भी
खुली कैंचीदोनों ब्लेडों के बीचन्यून कोण, जैसे 30°–60°
दीवार घड़ी की सूईयाँकेंद्र परपूरे घंटे पर 30° का गुणज
सेट-स्क्वायरउसके तीनों कोने90°, 60°, 30° (या 90°, 45°, 45°)
ज्यामिति बॉक्स का खुला ढक्कनढक्कन और बॉक्स के बीचअधिक कोण
स्वयं जाँचिए: अपने सेट-स्क्वायर के तीनों कोने मापकर जोड़िए। योग 180° आना चाहिए — ठीक वही परिणाम जो नीचे प्रश्न 9 में मिलेगा।
प्र3.
नीचे दिए गए कोणों के अंश माप ज्ञात कीजिए। जाँच कीजिए की क्या यहाँ कागज के चाँद का प्रयोग कर सकते हैं।
उत्तर
पहला कोण: ∠IHJ = 42°  (न्यून)
दूसरा कोण: ∠IHJ = 116°  (अधिक)

(छपे हुए पृष्ठ पर ठीक-ठीक मापने पर ये 41.7° और 116.3° हैं।)

नहीं, यहाँ कागज का चाँदा काम नहीं कर सकता।

क्यों नहीं: हाथ से बना कागजी चाँदा केवल बार-बार आधा मोड़कर बनाया गया था, इसलिए उस पर केवल 0°, 22.5°, 45°, 67.5°, 90°, 112.5°, 135°, 157.5° और 180° के चिह्न हैं। 42° और 116° इनमें से किसी क्रीज़ पर नहीं पड़ते। इसीलिए मानक चाँदा चाहिए, जो पूरे 180 अंशों में बँटा होता है।
सुझाव: फिर भी कागजी चाँदा बहुत कुछ बता देता है — 42°, 22.5° और 45° के बीच है (अतः न्यून) तथा 116°, 112.5° और 135° के बीच (अतः अधिक कोण)।
प्र4.
नीचे दिए गए कोण का अंश माप चाँद का प्रयोग करके किस प्रकार निकाला जा सकता है?
उत्तर

अंकित कोण एक प्रतिवर्ती कोण है, जो 180° से बड़ा है, इसलिए इसे सीधे नहीं पढ़ा जा सकता — चाँदा केवल 180° तक ही जाता है।

विधि: उसी शीर्ष पर बने दूसरे (बिना अंकित) कोण को मापिए और उसे पूर्ण घुमाव में से घटा दीजिए।

अंकित कोण = 360° − बिना अंकित कोण
= 360° − 101° = 259°
AB100°260°O
अंकित प्रतिवर्ती कोण— 360° − 101° = 259°।
यह क्यों काम करता है: अंकित और बिना अंकित कोण मिलकर शीर्ष के चारों ओर एक पूर्ण घुमाव बनाते हैं, और पूर्ण घुमाव 360° का होता है।
ध्यान दीजिए: छपी हुई आकृति में बिना अंकित कोण 101.5° का है, जिससे प्रतिवर्ती कोण लगभग 258° बनता है। पुस्तक की उत्तर-कुंजी इसे 100° मानकर 260° देती है। लगभग 258° से 260° तक कोई भी उत्तर सही है — महत्त्वपूर्ण विधि है।
दूसरा तरीका: प्रतिवर्ती कोण को सरल कोण और शेष में बाँट लीजिए — 180° + 78° ≈ 258°।
प्र5.
निम्न कोणों को मापिए और प्रत्येक का डिग्री माप लिखिए।
उत्तर

चाँदे का केंद्र प्रत्येक शीर्ष पर रखिए, एक भुजा 0 पर और दूसरी भुजा का पाठ्यांक पढ़िए—

कोणमापप्रकार
a.80°न्यून
b.120°अधिक
c.60°न्यून
d.130°अधिक
e.130°अधिक
f.60°न्यून
स्वयं जाँचिए: छपे हुए पृष्ठ पर बहुत सावधानी से मापने पर ये छह कोण 79°, 120.5°, 59.5°, 129°, 128° और 61° आते हैं। अतः ऊपर दिए मानों से एक-दो अंश का अंतर पूरी तरह सही है।
सुझाव: (d) और (e) अलग-अलग दिशाओं में तथा अलग लंबाई की भुजाओं के साथ बने हैं, फिर भी बराबर हैं — चाँदे को घुमाइए, अपनी राय को नहीं। यही बात (c) और (f) पर भी लागू होती है।
प्र6.
∠BXE, ∠CXE, ∠AXB और ∠BXC के अंश माप ज्ञात कीजिए।
उत्तर
020406080100120140160180180160140120100806040200ECBAX
A, X और E एक सीधी रेखा में हैं। E से पढ़ने पर: C पर 85°, B पर 115°, A पर 180°।

A, X और E एक ही सीधी रेखा में हैं, अतः ∠AXE = 180°। E पर स्थित 0 चिह्न से किरणें पढ़ने पर—

E → 0°    C → 85°    B → 115°    A → 180°
कोणगणनामाप
∠BXE115 − 0115°
∠CXE85 − 085°
∠AXB180 − 11565°
∠BXC115 − 8530°
स्वयं जाँचिए: ∠AXB + ∠BXE = 65° + 115° = 180° ✔ — ऐसा होना ही चाहिए, क्योंकि AXE एक सीधी रेखा है।
प्र7.
∠PQR, ∠PQS और ∠PQT के अंश माप ज्ञात कीजिए।
उत्तर
020406080100120140160180180160140120100806040200PRSTQ
भुजा QP से पढ़ने पर: R पर 45°, S पर 100° तथा T पर 150°।

शीर्ष Q है। QP को 0 चिह्न पर रखकर उसी पैमाने पर शेष तीनों किरणें पढ़िए—

कोणपाठ्यांकमापप्रकार
∠PQR45 − 045°न्यून
∠PQS100 − 0100°अधिक
∠PQT150 − 0150°अधिक
सुझाव: इन्हीं पाठ्यांकों से ∠RQS = 100 − 45 = 55°, ∠SQT = 150 − 100 = 50° तथा ∠RQT = 150 − 45 = 105° भी मिल जाते हैं।
प्र8.
दिए गए निर्देशों के अनुसार पेपर क्राफ्ट बनाइए। अब कागज को पूरा खोलिए। मोड़े जाने पर प्राप्त निशानों पर रेखाएँ खींचिए और इस प्रकार बने कोणों को मापिए।
उत्तर

यह मोड़ने का क्रियाकलाप है। चरण-दर-चरण कीजिए और फिर मापिए।

  1. वर्गाकार कागज को चित्र 1 से 8 के अनुसार मोड़िए और हर क्रीज़ को अच्छी तरह दबाइए।
  2. कागज को पूरा खोल दीजिए। आपको केंद्र पर मिलती हुई क्रीज़ों का एक पैटर्न दिखेगा।
  3. प्रत्येक क्रीज़ पर पेंसिल और रूलर से रेखा खींचिए।
  4. केंद्र पर बने प्रत्येक कोण को चाँदे से मापिए।

आपको क्या मिलेगा: चूँकि हर मोड़ पिछले को आधा करता है, केंद्र पर बने कोण पूर्ण घुमाव के सुंदर भिन्न होते हैं—

360° ÷ 4 = 90°    360° ÷ 8 = 45°    360° ÷ 16 = 22.5°
स्वयं जाँचिए: केंद्र बिंदु के चारों ओर के सभी कोणों का योग 360° होना चाहिए। अपने पाठ्यांक जोड़िए — यदि योग 360° न आए तो फिर से मापिए।
प्र9.
आकृति 2.21 (a) में बने त्रिभुज के तीनों कोणों को मापिए और संबंधित कोण के नीचे उसका माप लिखिए। तीनों मापों को जोड़िए। क्या प्राप्त होता है? इस प्रकिया का आकृति 2.21 (b) और (c) के लिए भी प्रयोग कीजिए। अन्य त्रिभुजों पर भी इस प्रकिया का प्रयोग कीजिए। फिर सामान्य तौर पर क्या होता है इसका अनुमान लगाइए। हम आगे की कक्षाओं में जानेंगे कि ऐसा क्यों हुआ।
उत्तर

त्रिभुज के प्रत्येक कोने को मापकर जोड़िए। आकृति 2.21 (a) के लिए—

48°68°64°ABC
आकृति 2.21 (a) को चाँदे से मापने पर— 48° + 68° + 64° = 180°।
∠A + ∠B + ∠C = 48° + 68° + 64° = 180°

आकृति 2.21 के शेष दोनों त्रिभुजों के लिए भी यही कीजिए—

त्रिभुज∠A∠B∠Cयोग
(a)48°68°64°180°
(b)58°63°59°180°
(c)31°52°97°180°

अनुमान: किसी भी त्रिभुज के तीनों कोणों का योग सदैव 180° — अर्थात् एक सरल कोण — होता है, चाहे उसका आकार-प्रकार कुछ भी हो।

एक संकेत देता चित्र: कागज के त्रिभुज के तीनों कोने फाड़कर उनके शीर्षों को मिलाते हुए साथ-साथ रखिए। वे ठीक एक सीधी रेखा बना देते हैं। पूरी उपपत्ति आप आगे की कक्षा में पढ़ेंगे।
सुझाव: यदि आपके तीनों पाठ्यांकों का योग 179° या 181° आए तो यह केवल मापन की छोटी-सी त्रुटि है। चाँदे का केंद्र ठीक शीर्ष पर रखकर फिर से मापिए।
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