गणित प्रकाश अध्याय 2 आइए, पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
घड़ी में कोण— a. घड़ी की सूईयाँ अलग-अलग समय पर भिन्न कोण बनाती हैं। 1 बजे सूईयों के बीच 30° का कोण होता है। क्यों? b. 2 बजे कोण कितना होगा? और 4 बजे? 6 बजे? c. घड़ी की सूईयों द्वारा बने अन्य कोणों को ढूँढ़िए।
उत्तर

a. घड़ी के केंद्र पर पूरा घुमाव 360° का होता है और बारह घंटों के चिह्न उसे 12 बराबर भागों में बाँट देते हैं।

दो क्रमागत घंटा-चिह्नों के बीच का कोण = 360° ÷ 12 = 30°

1 बजे घंटे की सूई 1 पर और मिनट की सूई 12 पर होती है — ठीक एक भाग की दूरी। अतः कोण 30° है।

12123456789101130°1 बजे
1 बजे दोनों सूईयाँ एक घंटा-भाग की दूरी पर होती हैं, अतः कोण 30° का है।

b. केवल 30° को सूईयों के बीच के भागों की संख्या से गुणा कीजिए—

समयसूईयों के बीच भागकोणप्रकार
2 बजे2 × 3060°न्यून
4 बजे4 × 30120°अधिक
6 बजे6 × 30180°सरल
121234567891011180°6 बजे
6 बजे दोनों सूईयाँ एक ही सीधी रेखा में आ जाती हैं — 180° का सरल कोण।

c. घड़ी के अन्य कोण—

समयछोटा कोणदूसरी ओर का प्रतिवर्ती कोण
3 बजे90° (समकोण)270°
5 बजे150°210°
9 बजे90°270°
10 बजे60°300°
12 बजे360°
क्या आप जानते हैं? मिनट की सूई एक घंटे में 360° घूमती है, अर्थात् हर मिनट 6°। घंटे की सूई बारह गुना धीमी है — वह एक मिनट में केवल 0.5° घूमती है।
प्र2.
एक दरवाजे का कोण— क्या ऐसा संभव है कि कोण का प्रयोग कर यह बताया जा सके कि दरवाजा कितना खुला है? कोण का शीर्ष और कोण की भुजाएँ क्या होंगी?
उत्तर

हाँ। दरवाजा अपने कब्ज़ों के परितः घूमता है, इसलिए कोण ठीक-ठीक बताता है कि वह कितना खुला है।

  • शीर्ष: कब्ज़ा — वह रेखा जहाँ दरवाजा दीवार (चौखट) से जुड़ा है।
  • भुजाएँ: दरवाजे का किनारा तथा वह दीवार या चौखट जिससे माप ली जा रही है।
दरवाजे की स्थितिकोण
पूरी तरह बंद
थोड़ा-सा खुलान्यून कोण
दीवार के लंबवत खुला90°
दीवार से सटा हुआ180°
कोण ही उपयुक्त माप क्यों है: दरवाजा न खिसकता है, न लंबा होता है — वह केवल कब्ज़े के परितः घूमता है। और किसी स्थिर बिंदु के परितः घुमाव की मात्रा ही तो कोण है।
प्र3.
विद्या झूले पर अपना समय आनंद से बिता रही है। उसने ध्यान दिया कि जब उसने झूलना शुरू किया तो जितना बड़ा कोण है, उतनी ही अधिक गति वह झूले पर अर्जित कर रही है। लेकिन यहाँ कोण है कहाँ? क्या आप यहाँ पर किसी कोण को देख सकते हैं?
उत्तर

हाँ — कोण ऊपर वहाँ है जहाँ रस्सियाँ बँधी हैं।

  • शीर्ष: वह बिंदु (या डंडा) जहाँ से झूला लटका है।
  • भुजा 1: रस्सी की विरामावस्था — सीधी नीचे लटकी हुई स्थिति।
  • भुजा 2: रस्सी की वह स्थिति जब विद्या को पीछे खींचकर छोड़ा जाता है, या जब वह अधिकतम ऊँचाई पर पहुँचती है।
कोण क्यों महत्त्वपूर्ण है: बड़ा प्रारंभिक कोण अर्थात् झूला अधिक ऊँचाई तक पीछे खींचा गया है, इसलिए वह अधिक लंबे रास्ते से नीचे आता है और नीचे पहुँचकर अधिक गति पकड़ लेता है। कितनी पीछे से शुरुआत हुई, यह रस्सी की लंबाई नहीं, कोण तय करता है।
यह भी कीजिए: धागे में छोटा-सा पत्थर बाँधकर लोलक बनाइए। पहले उसे थोड़े कोण से, फिर बड़े कोण से छोड़िए और देखिए कि दूसरी बार वह कितना तेज झूलता है।
प्र4.
यहाँ, एक खिलौने के दोनों ओर तिरछे तख्ते (slanting slab) लगे हैं, जितना अधिक कोण या तख्ते का झुकाव होगा उतनी ही तेजी से गेंद लुढ़कती है। क्या कोणों का प्रयोग तख्तों के झुकाव के वर्णन में किया जा सकता है? प्रत्येक कोण की भुजाएँ क्या होंगी? कौन-सी भुजा दिखाई देगी और कौन-सी नहीं?
उत्तर

हाँ, प्रत्येक तख्ते का झुकाव ठीक एक कोण ही है — तख्ता जितना तीखा, कोण उतना बड़ा और गेंद उतनी तेज।

  • शीर्ष: वह बिंदु जहाँ तख्ता खिलौने की बगल से मिलता है।
  • भुजा 1 (दिखाई देने वाली): तिरछे तख्ते का किनारा।
  • भुजा 2 (न दिखने वाली): उस बिंदु से जाती क्षैतिज रेखा — एक काल्पनिक सीधी रेखा, जिस पर तख्ता होता यदि वह सपाट होता।
एक भुजा अदृश्य क्यों है: ढलान को हमेशा किसी की तुलना में नापना पड़ता है। हम तख्ते की तुलना क्षैतिज से करते हैं, पर वह क्षैतिज रेखा खिलौने पर खींची नहीं होती — उसे हम कल्पना करते हैं। सड़क पर भी यही होता है: “तीखी चढ़ाई” का अर्थ है क्षैतिज के साथ बड़ा कोण।
सुझाव: तख्ते के जोड़ पर एक रूलर क्षैतिज रखिए। रूलर और तख्ते के बीच का कोण ही वह ढलान है जिसकी बात हो रही है।
प्र5.
नीचे दिए गए चित्रों का अवलोकन कीजिए जिनमें एक कीट एवं उसकी घुमायी गई स्थितियाँ दी गई हैं। क्या घूर्णन (घुमाव) की मात्रा बताने के लिए कोणों का उपयोग किया जा सकता है? यदि हाँ, तो कैसे? कोण का शीर्षबिंदु एवं उसकी भुजाएँ कौन-सी होंगी? संकेत— कीट को छूकर जाती हुई क्षैतिज रेखा को देखिए।
उत्तर

हाँ। घुमाव की मात्रा तो ठीक वही है जो कोण मापता है।

  • शीर्ष: वह स्थिर बिंदु जिसके परितः कीट को घुमाया गया है (घूर्णन केंद्र)।
  • भुजा 1: कीट की मूल स्थिति में उसे छूती हुई क्षैतिज रेखा।
  • भुजा 2: कीट की घुमाई गई स्थिति में उसे छूती हुई संगत रेखा।

इन दोनों रेखाओं के बीच का कोण चाँदे से मापिए — वही संख्या बताती है कि कीट कितना घूमा है।

संकेत वाली रेखा क्यों चाहिए: कीट स्वयं एक चित्र है, किरण नहीं। दोनों चित्रों में एक ही संदर्भ रेखा (जैसे उसके शरीर के अनुदिश या उस सतह पर जिस पर वह खड़ा है) खींच देने से तुलना दो किरणों के साधारण कोण में बदल जाती है।
क्या आप जानते हैं? चौथाई घुमाव 90°, आधा घुमाव 180° और पूर्ण घुमाव 360° होता है — यही भाषा स्टीयरिंग, पेच और नर्तक की घुमाई के लिए भी काम आती है।
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