एक कागज पर दो बिंदु A और B अंकित कीजिए। इन दोनों बिंदुओं को सभी संभव मार्गों से जोड़ने का प्रयत्न कीजिए। (आकृति 2.1) A से B तक का सबसे छोटा मार्ग कौन-सा है?
उत्तर
A से B तक का सीधा मार्ग ही सबसे छोटा होता है। मुड़े हुए या टेढ़े सभी मार्ग इससे लंबे होते हैं।
A और B को जोड़ने वाला यह सबसे छोटा मार्ग (जिसमें A और B भी सम्मिलित हैं) रेखाखंड AB (या BA) कहलाता है। बिंदु A और B इसके अंत बिंदु हैं।
एक बिंदु, रेखाखंड PQ, रेखा CD (तीर बताते हैं कि इसका अंत नहीं) तथा किरण OA।
ऐसा क्यों होता है: प्रत्येक मोड़ पर आपको पहले बगल की ओर चलना पड़ता है और फिर वापस B की ओर मुड़ना पड़ता है — यही अतिरिक्त चाल मार्ग को लंबा बना देती है। जिस मार्ग में कोई मोड़ ही नहीं, उसी में कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता। इसीलिए दो कीलों के बीच खींचा गया धागा सदैव सीधा हो जाता है।
यह भी कीजिए: दो बिंदुओं को धागे से टेढ़े-मेढ़े मार्ग द्वारा जोड़िए, फिर धागे को सीधा कीजिए और सीधी दूरी से तुलना कीजिए। धागा हमेशा लंबा निकलेगा।
प्र2.
कल्पना कीजिए कि A से B तक के रेखाखंड (अर्थात् AB) को A से आगे एक दिशा में और B से आगे दूसरी दिशा में बिना किसी अंत के विस्तारित किया गया है (आकृति 2.2 देखिए)। यह रेखा का एक प्रतिरूप है। क्या आपको ऐसा लगता है कि आप एक पूरी रेखा की आकृति बना सकते हैं? नहीं? (क्यों?)
उत्तर
नहीं — किसी रेखा का पूरा चित्र कभी नहीं बनाया जा सकता।
रेखा के कोई अंत बिंदु नहीं होते। यह दोनों दिशाओं में अनंत तक जाती है, इसलिए आप कितना ही बड़ा कागज लें, रेखा उसके दोनों किनारों से आगे भी चलती ही रहेगी।
तो हम क्या करते हैं: हम रेखा का केवल एक भाग खींचते हैं और उसके दोनों सिरों पर छोटे तीर लगा देते हैं। ये तीर बताते हैं कि रेखा आगे भी जारी है। इसीलिए A और B से होकर जाने वाली रेखा को तीर सहित AB लिखा जाता है, जबकि रेखाखंड AB बिना तीर के।
याद रखिए: किसी रेखा को पूरी तरह निश्चित करने के लिए दो बिंदु पर्याप्त हैं — किन्हीं दो बिंदुओं से होकर ठीक एक रेखा गुजरती है।
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