गणित प्रकाश अध्याय 3 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
नीचे दिए गए अनुक्रमों को देखिए—सभी अनुक्रमों में एक ही नियम लागू होता है— a. 12, 6, 3, 10, 5, 16, 8, 4, 2, 1 b. 17, 52, 26, 13, 40, 20, 10, 5, 16, 8, 4, 2, 1 c. 21, 64, 32, 16, 8, 4, 2, 1 d. 22, 11, 34, 17, 52, 26, 13, 40, 20, 10, 5, 16, 8, 4, 2, 1. क्या आप बता सकते हैं कि इन अनुक्रमों को किस प्रकार बनाया गया है?
उत्तर

हाँ। एक ही नियम है जिसके दो भाग हैं, और वह बार-बार लगाया जाता है:

यदि संख्या सम है → उसका आधा कीजिए
यदि संख्या विषम है → उसे 3 से गुणा करके 1 जोड़िए

अनुक्रम (a) को चरण-दर-चरण जाँचिए:

12 सम है → 12 ÷ 2 = 6
6 सम है → 6 ÷ 2 = 3
3 विषम है → 3 × 3 + 1 = 10
10 सम है → 5
5 विषम है → 5 × 3 + 1 = 16
16 → 8 → 4 → 2 → 1

अनुक्रम (c) सबसे छोटा है क्योंकि 21 → 64 मिलता है और 64, 2 की घात है, अत: वह केवल आधा होता जाता है: 64, 32, 16, 8, 4, 2, 1।

क्या आपने ध्यान दिया? प्रत्येक अनुक्रम का अंत एक ही पूँछ से होता है … 16, 8, 4, 2, 1। जैसे ही कोई अनुक्रम 2 की किसी घात पर पहुँचता है, आगे केवल आधा करना ही बचता है।
प्र2.
प्रत्येक अनुक्रम को अपने पसंद की पूर्ण संख्या से शुरू करके ऊपर जैसे कुछ और कोलाट्ज अनुक्रम बनाइए। क्या आप हमेशा 1 पर पहुँचते हैं?
उत्तर

हाँ — अब तक जितनी भी संख्याएँ आजमाई गई हैं, सभी 1 पर पहुँचती हैं।

प्रारंभअनुक्रमचरण
66, 3, 10, 5, 16, 8, 4, 2, 18
77, 22, 11, 34, 17, 52, 26, 13, 40, 20, 10, 5, 16, 8, 4, 2, 116
99, 28, 14, 7, 22, 11, 34, 17, 52, 26, 13, 40, 20, 10, 5, 16, 8, 4, 2, 119
1515, 46, 23, 70, 35, 106, 53, 160, 80, 40, 20, 10, 5, 16, 8, 4, 2, 117
3232, 16, 8, 4, 2, 15
अनुक्रम ऊपर-नीचे क्यों जाता है: विषम संख्या लगभग तीन गुनी हो जाती है, अत: अनुक्रम ऊपर उछलता है; परंतु 3n + 1 सदैव सम होता है, इसलिए अगला ही चरण उसे आधा कर देता है। कई चरणों में आधा करना भारी पड़ता है और संख्याएँ 1 तक उतर आती हैं।
प्र3.
क्या आपको लगता है कि कोलाट्ज़ के अनुमान में इस प्रकार का प्रत्येक अनुक्रम 1 पर पहुँचेगा? क्यों और क्यों नहीं?
उत्तर

हाँ, यह सत्य प्रतीत होता है — परंतु आज तक कोई इसे सिद्ध नहीं कर पाया, और इसीलिए यह इतना प्रसिद्ध है।

  • विश्वास करने के कारण: संगणकों ने बहुत-बहुत बड़ी संख्याओं तक हर प्रारंभिक संख्या जाँच ली है और हर एक 1 पर पहुँचती है। साथ ही, जब संख्या विषम होती है तो अगली संख्या 3n + 1 सम होती है और तुरंत आधी हो जाती है — अर्थात् कम से कम आधे चरणों में संख्या घटती ही है।
  • यह प्रमाण क्यों नहीं है: करोड़ों संख्याएँ जाँच लेना सभी संख्याएँ जाँचना नहीं है। पूर्ण संख्याएँ अनंत हैं, और गणित ऐसा कारण माँगता है जो हर एक पर लागू हो। हो सकता है कोई विशाल संख्या सदा बढ़ती जाए या किसी ऐसे चक्र में फँस जाए जो 1 तक कभी न पहुँचे।
क्या आप जानते हैं? लोथर कोलाट्ज़ ने यह अनुमान 1937 में प्रस्तुत किया था। लगभग नब्बे वर्ष बाद भी यह अनसुलझा है — ऐसी समस्या जिसे कक्षा 6 का विद्यार्थी समझ सकता है, पर विश्व का कोई गणितज्ञ हल नहीं कर सका।
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