गणित प्रकाश अध्याय 5 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
शिक्षक— क्या 56 और 63 सह-अभाज्य हैं? अंशु— मैं लिख सकता हूँ कि 56 = 14 × 4 और 63 = 21 × 3। … अतः इनके कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड नहीं हैं, और ये संख्याएँ सह-अभाज्य हैं। गुणा— रुको, मैं 56 = 7 × 8 और 63 = 9 × 7 भी लिख सकता हूँ। … अतः ये दोनों संख्याएँ सह-अभाज्य नहीं हैं। स्पष्ट रूप से गुणा सही है क्योंकि 7 एक सार्व गुणनखंड है। लेकिन अंशु ने गलती कहाँ की?
उत्तर

अंशु की गलती यह मान लेना थी कि संख्या को तोड़ने का एक तरीका उसके सारे गुणनखंड दिखा देता है। ऐसा नहीं होता।

56 = 14 × 4 → इससे पता चलता है कि 14 और 4, संख्या 56 के गुणनखंड हैं
परंतु पूरी सूची है: 1, 2, 4, 7, 8, 14, 28, 56

63 = 21 × 3 → इससे पता चलता है कि 21 और 3, संख्या 63 के गुणनखंड हैं
परंतु पूरी सूची है: 1, 3, 7, 9, 21, 63

संख्या 7 दोनों का गुणनखंड है, पर अंशु के तोड़ने के तरीकों में वह दिखा ही नहीं। गुणा के तरीकों (56 = 7 × 8 तथा 63 = 9 × 7) में वह सामने आ गया।

सीख: सार्व गुणनखंडों के विषय में निश्चित होने के लिए दोनों संख्याओं को अभाज्य संख्याओं तक तोड़ना आवश्यक है—
56 = 2 × 2 × 2 × 7   तथा   63 = 3 × 3 × 7
अब 7 कहीं छिप नहीं सकता। अतः 56 और 63 सह-अभाज्य नहीं हैं।
प्र2.
एक अन्य उदाहरण 80 और 63 का लेते हैं। यदि हम 80 = 16 × 5 और 63 = 9 × 7 लें तो इनमें कोई सार्व गुणनखंड नहीं हैं। क्या हम यहाँ यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि 80 और 63 सह-अभाज्य हैं?
उत्तर

केवल इतने से नहीं। अंशु की गलती हमें सावधान करती है — गुणनखंडन का एक संयोगवश मिला तरीका कुछ सिद्ध नहीं करता, क्योंकि तोड़ने के अन्य तरीकों में कोई साझा गुणनखंड सामने आ सकता है।

80 = 40 × 2 = 20 × 4 = 10 × 8 = 16 × 5 = ???
63 = 9 × 7 = 3 × 21 = ???

सुरक्षित तरीका है — अभाज्य संख्याओं तक जाना—

80 = 2 × 2 × 2 × 2 × 5
63 = 3 × 3 × 7

80 के अभाज्य गुणनखंड 2 और 5 हैं; 63 के 3 और 7। कुछ भी साझा नहीं है, और अब छिपने के लिए कोई स्थान बचा ही नहीं।

अतः हाँ — 80 और 63 वास्तव में सह-अभाज्य हैं, परंतु इसे सिद्ध अभाज्य गुणनखंडन ही करता है।

यदि उनका कोई भाज्य सार्व गुणनखंड होता तो? मान लीजिए कोई भाज्य संख्या दोनों को विभाजित करती है। तब के भीतर के प्रत्येक अभाज्य गुणनखंड भी दोनों को विभाजित करते, अर्थात् वह अभाज्य दोनों के अभाज्य गुणनखंडन में दिखाई देता। चूँकि कोई अभाज्य साझा नहीं है, अतः 1 से बड़ा कोई सार्व गुणनखंड हो ही नहीं सकता।
प्र3.
क्या क्रम महत्वपूर्ण है? इस चित्र की मदद से क्या आप समझा सकते हैं कि 30 = 2 × 3 × 5 क्यों होता है, चाहे आप 2, 3 और 5 को किसी भी तरह से गुणन करें?
उत्तर

चित्र में छोटे घनों से बना एक डिब्बा है — 2 घन ऊँचा, 3 घन चौड़ा तथा 5 घन गहरा। घनों को किसी भी क्रम में गिनिए, कुल संख्या कभी नहीं बदलती।

30 = 2 × 3 × 5 — 2 पंक्ति × 3 स्तंभ की पाँच परतें6+6+6+6+66 + 6 + 6 + 6 + 6 = 30
वही 30 घन, 2 पंक्ति × 3 स्तंभ की पाँच परतों के रूप में।
परतों से → (2 × 3) × 5 = 6 × 5 = 30
स्तंभों से → 2 × (3 × 5) = 2 × 15 = 30
एक और तरीका → (2 × 5) × 3 = 10 × 3 = 30
और एक → (3 × 5) × 2 = 15 × 2 = 30

डिब्बे को घुमाने से डिब्बा नहीं बदलता, अतः घनों की गिनती भी नहीं बदल सकती।

यहाँ दो विचार छिपे हैं: गुणा की जाने वाली संख्याओं को आपस में बदला जा सकता है (2 × 3 = 3 × 2) तथा उन्हें किसी भी प्रकार समूहित किया जा सकता है — (2 × 3) × 5 = 2 × (3 × 5)। आगे की कक्षा में आप इन्हें गुणन की क्रमविनिमेयता तथा साहचर्यता के नाम से पढ़ेंगे। इन्हीं के कारण अभाज्य गुणनखंडों का क्रम महत्व नहीं रखता — इसीलिए हम उन्हें प्राय: बढ़ते क्रम में लिखते हैं: 30 = 2 × 3 × 5, 225 = 3 × 3 × 5 × 5।
प्र4.
जब हम किसी संख्या का अभाज्य गुणनखंडन ज्ञात करते हैं, तो सबसे पहले हम इसे दो गुणनखंडों के गुणन के रूप में लिखते हैं। उदाहरण के लिए, 72 = 12 × 6, इसके पश्चात् हम दोनों प्राप्त गुणनखंडों वाली प्रत्येक संख्या का अभाज्य गुणनखंडन ज्ञात करते हैं। उपरोक्त उदाहरण में 12 = 2 × 2 × 3 और 6 = 2 × 3। क्या अब, आप 72 का अभाज्य गुणनखंडन बता सकते हैं?
उत्तर

दोनों छोटे गुणनखंडनों को एक साथ लिख दीजिए।

72 = 12 × 6
72 = (2 × 2 × 3) × (2 × 3)
72 = 2 × 2 × 3 × 2 × 3

अभाज्य संख्याओं को बढ़ते क्रम में लिखने पर—

72 = 2 × 2 × 2 × 3 × 3

गुणा करके जाँचिए—

2 × 2 × 2 = 8    3 × 3 = 9    8 × 9 = 72
संकेत: आरंभ में आप कोई भी विभाजन चुनें, उत्तर वही रहेगा। 72 = 8 × 9 से आरंभ कीजिए: 8 = 2 × 2 × 2 तथा 9 = 3 × 3, अर्थात् 72 = 2 × 2 × 2 × 3 × 3 — ठीक वही उत्तर।
प्र5.
अवलोकन कीजिए कि 72 के गुणनखंडन में प्रत्येक अभाज्य गुणनखंड कितनी बार आया। इसकी तुलना इस तथ्य से कीजिए कि जब 12 और 6 के गुणनखंडों को एक साथ लिखते हैं तो ये संख्याएँ कितनी बार आती हैं।
उत्तर
अभाज्य12 = 2 × 2 × 3 में कितनी बार6 = 2 × 3 में कितनी बारकुल72 = 2 × 2 × 2 × 3 × 3 में कितनी बार
2212 + 1 = 33
3111 + 1 = 22

गिनती बिल्कुल मिल जाती है। अर्थात् जब दो संख्याओं का गुणा किया जाता है, तो गुणनफल के अभाज्य गुणनखंड दोनों संख्याओं के अभाज्य गुणनखंडों को साथ रख देने से ही बन जाते हैं

यह इतना उपयोगी क्यों है: इससे किसी बड़े गुणनफल का अभाज्य गुणनखंडन बिना गुणा किए ही मिल जाता है। जैसे—
56 × 25 = (2 × 2 × 2 × 7) × (5 × 5) = 2 × 2 × 2 × 5 × 5 × 7
ठीक यही तरीका आप अगले अभ्यास के प्रश्न 4 में प्रयोग करेंगे।
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