गणित प्रकाश अध्याय 5 अभाज्य समय के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-05

इस अध्याय के बारे में

किसी संख्या को 1, 2, 3, … से गुणा करने पर उसके गुणज मिलते हैं। जो संख्या किसी संख्या को पूरी-पूरी विभाजित कर दे (शेषफल 0), वह उसका गुणनखंड (भाजक) है। दोनों संख्याओं के गुणज सार्व गुणज तथा दोनों के गुणनखंड सार्व (उभयनिष्ठ) गुणनखंड कहलाते हैं। अभाज्य संख्या के ठीक दो गुणनखंड होते हैं — 1 और वह संख्या स्वयं (2, 3, 5, 7, 11, …)। भाज्य संख्या के दो से अधिक गुणनखंड होते हैं (4, 6, 8, 9, …)। संख्या 1 न अभाज्य है और न भाज्य , क्योंकि इसका केवल एक ही गुणनखंड है। इराटोस्थेनीज़ की छलनी में किसी संख्या पर घेरा लगाकर उसके आगे के सभी गुणज काट दिए जाते हैं। इससे 100 तक ठीक 25 अभाज्य संख्याएँ प्राप्त होती हैं। जिन दो संख्याओं का 1 के अतिरिक्त कोई सार्व गुणनखंड नहीं होता, वे सह-अभाज्य कहलाती हैं — जैसे 4 और 9, 17 और 69, 40 और 231। कोई भी दो भिन्न अभाज्य संख्याएँ सदैव सह-अभाज्य होती हैं। 1 से बड़ी प्रत्येक

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