गणित प्रकाश अध्याय 6 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
गहन सोच— सामान्‍यत: दौड़ में सभी धावकों के लिए एक समान अंतिम रेखा होती है। यहाँ दो वर्गाकार दौड़-पथ है, जिसमें भीतरी पथ की प्रत्येक भुजा 100 मी. है तथा बाहरी पथ की प्रत्येक भुजा 150 मी. है। दोनों धावकों के लिए समापन रेखा को चित्र में झंडों द्वारा दर्शाया गया है, जो पथों की भुजाओं में से एक भुजा के मध्य में हैं। यदि कुल दौड़ 350 मी. की है, तो हमें यह पता लगाना होगा कि इन दो पथों पर दोनों धावकों की प्रारंभिक स्थिति कहाँ होनी चाहिए ताकि 350 मी. दौड़ने के पश्‍चात् दोनों की समापन रेखा एक समान हो। भीतरी पथ पर धावक के प्रारंभिक बिंदु को A के रूप में और बाहरी पथ पर धावक के प्रारंभिक बिंदु को B के रूप में चिह्नित कीजि‍ए।
उत्तर

झंडे (समापन रेखा) से पीछे की ओर 350 मी. चलिए।

भीतरी पथ (भुजा 100 मी.) — झंडा भुजा के मध्य में है, अत: कोने से 50 मी. दूर है।

50 मी. (आधी भुजा) + 100 + 100 + 100 = 350 मी.

अत: A भीतरी वर्ग का वह कोना है जो झंडे वाली भुजा से तीन पूरी भुजाएँ और आधी भुजा दूर है (सामने वाला कोना)।

बाहरी पथ (भुजा 150 मी.) — झंडा कोने से 75 मी. दूर है।

75 मी. (आधी भुजा) + 150 मी. (एक पूरी भुजा) + 125 मी. = 350 मी.

अत: B बाहरी वर्ग की सामने वाली भुजा पर, कोने से 125 मी. दूर है — अर्थात् दूसरे कोने से केवल 25 मी. दूर।

बाहरी पथ — भुजा 150 मी.भीतरी पथ — भुजा 100 मी.उभयनिष्ठ समापन रेखाAB
दोनों धावक नीचे वाली भुजा के मध्य में बनी लाल समापन रेखा पर पहुँचते हैं। A और B दोनों उससे ठीक 350 मी. दूर हैं।
प्रारंभिक बिंदु भिन्न क्यों: दोनों पथों के परिमाप भिन्न हैं (400 मी. और 600 मी.)। दौड़ को न्यायसंगत बनाने के लिए प्रारंभिक बिंदु आगे-पीछे रखे जाते हैं ताकि दोनों ठीक 350 मी. दौड़कर एक ही समापन रेखा पर पहुँचें — जैसा 200 मी. की दौड़ में होता है।
प्र2.
आकलन और सत्यापन करना — एक कागज या अखबार का टुकड़ा लीजिए। इस टुकड़े को अलग-अलग तरीकों से काटकर कुछ यादृच्छिक आकार बनाइए। प्रत्‍येक आकृति की सीमाओं की कुल लंबाई का अनुमान लगाइए। अब पैमाना (scale) अथवा मापन फीता (measuring tape) से प्रत्‍येक आकृति के परिमाप को मापिए और सत्यापन कीजिए।
उत्तर

यह अपने मित्र के साथ करने की क्रिया है। इसे इस प्रकार कीजिए—

  1. पुराने अखबार से 4–5 अलग-अलग आकार काटिए — कुछ सीधी भुजाओं वाले, कुछ लहरदार।
  2. पहले अनुमान लगाइए। आकृति देखकर उसकी सीमा की लंबाई सेंटीमीटर में बताइए और मापने से पहले लिख लीजिए।
  3. फिर मापिए। सीधी भुजाओं को पैमाने से नापकर जोड़िए। वक्र सीमा पर धागा रखिए, निशान लगाइए, धागे को सीधा करके पैमाने से मापिए।
  4. एक सारणी बनाइए — आकृति → मेरा अनुमान → मापा गया परिमाप → अंतर
आकृतिअनुमानमापा गया परिमापअंतर
त्रिभुजाकार टुकड़ा20 सेमी23 सेमी3 सेमी
लहरदार टुकड़ा30 सेमी27 सेमी3 सेमी
यह कीजिए: 3–4 आकृतियों के बाद आपके अनुमान मापे गए मान के बहुत निकट आने लगेंगे। आकलन अभ्यास से सुधरने वाला कौशल है — और यह तुरंत बता देता है कि निकाला गया उत्तर उचित है या नहीं।
प्र3.
अक्षी का कहना है कि इस त्रिभुज का परिमाप 9 इकाई है। तोशी का मानना है कि यह 9 इ‌काई नहीं हो सकती और परिमाप 9 इकाई से अधिक होगा। आप क्या सोचते हैं?
उत्तर

तोशी सही है। परिमाप 9 इकाई से अधिक है।

त्रिभुज बिंदु-ग्रिड पर बना है। इसकी दो भुजाएँ ग्रिड के साथ-साथ हैं (3 इकाई + 3 इकाई), परंतु तीसरी भुजा विकर्ण रेखा है, जो इकाई वर्गों के 3 विकर्णों से बनी है।

परिमाप = 3 सीधी इकाई + 3 सीधी इकाई + 3 विकर्ण इकाई
= 6s + 3d इकाइयाँ

अक्षी ने प्रत्येक विकर्ण को भी 1 इकाई गिन लिया, जो ठीक नहीं है — वर्ग का विकर्ण उसकी भुजा से बड़ा होता है।

विकर्ण बड़ा क्यों: किसी भी वर्ग में विकर्ण आमने-सामने के कोनों को जोड़ता है और यह वर्ग के भीतर खींची जा सकने वाली सबसे लंबी रेखा है। एक इकाई विकर्ण लगभग 1.4 इकाई होता है, अत:
6 × 1 + 3 × 1.4 ≈ 10.2 इकाई
जो 9 से स्पष्टत: अधिक है।
संकेत: आकृति की एक लाल रेखा और एक नीली रेखा को पैमाने से मापिए। नीली (विकर्ण) रेखा हर बार लंबी निकलेगी।
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