गणित प्रकाश अध्याय 8 आइए, पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
यह अर्धवृत बनाने के लिए परकार में कितनी लंबाई की त्रिज्या रखनी होगी? AX की लंबाई क्या होनी चाहिए?
उत्तर

दोनों लहरें समान होनी चाहिए, इसलिए केंद्रीय रेखा AB = 8 सेमी दोनों में बराबर-बराबर बँटती है।

AX = XB = 8 ÷ 2 = 4 सेमी
AX ही पहले अर्धवृत्त का व्यास है
त्रिज्या = 4 ÷ 2 = 2 सेमी

उत्तर: त्रिज्या = 2 सेमी तथा AX = 4 सेमी। परकार की नोंक AX के मध्य-बिंदु पर, अर्थात् A से 2 सेमी दूर रखी जाती है।

क्यों: अर्धवृत्त सदैव अपने व्यास पर खड़ा होता है। यहाँ अर्धवृत्त A से आरंभ होकर X पर समाप्त होता है, अत: AX ही व्यास है और त्रिज्या व्यास की आधी होती है।
प्र2.
भिन्न लंबाई की एक केंद्रीय रेखा (खंड) लीजिए तथा इस पर लहर बनाने का प्रयास कीजिए।
उत्तर

विधि बिल्कुल वही रहती है, केवल संख्याएँ बदलती हैं। उदाहरण के लिए AB = 10 सेमी लीजिए।

  1. AB = 10 सेमी खींचकर मध्य-बिंदु X अंकित कीजिए, अत: AX = XB = 5 सेमी।
  2. आवश्यक त्रिज्या = 5 ÷ 2 = 2.5 सेमी
  3. नोंक A से 2.5 सेमी दूर रखकर A से X तक AB के ऊपर अर्धवृत्त बनाइए।
  4. नोंक X से 2.5 सेमी दूर रखकर X से B तक AB के नीचे अर्धवृत्त बनाइए।
केंद्रीय रेखा ABAX = XBप्रत्येक अर्धवृत्त की त्रिज्या
8 सेमी4 सेमी2 सेमी
10 सेमी5 सेमी2.5 सेमी
12 सेमी6 सेमी3 सेमी
6 सेमी3 सेमी1.5 सेमी
संकेत: त्रिज्या सदैव केंद्रीय रेखा की एक-चौथाई होती है — AB ÷ 4। जाँचिए: 8 ÷ 4 = 2, 10 ÷ 4 = 2.5, 12 ÷ 4 = 3। ✔
प्र3.
उन आकृतियों को पुन: बनाएँ जहाँ लहरें अर्धवृत से छोटी हैं (जैसा कि ‘एक व्यक्ति’ के गले की आकृति में दिखाई देता है।) यहाँ चुनौती यह है कि दोनों लहरें समान हों। यह कठिन हो सकता है।
उत्तर

अर्धवृत्त से छोटी लहर का अर्थ है अधिक चपटा चाप। इसके लिए परकार की नोंक रेखा AB पर नहीं, बल्कि उससे हटकर रखी जाती है और बड़ी त्रिज्या ली जाती है।

रचना के चरण

  1. AB = 8 सेमी खींचकर मध्य-बिंदु X अंकित कीजिए (AX = XB = 4 सेमी)।
  2. परकार में 2 सेमी से बड़ी त्रिज्या — मान लीजिए 2.5 सेमी — लीजिए।
  3. नोंक को AX के मध्य-बिंदु से जाते लंब पर रेखा के नीचे रखिए और तब तक समायोजित कीजिए जब तक पेंसिल A और X दोनों से न गुजरे। AB के ऊपर चाप बनाइए।
  4. परकार का खुलाव मत बदलिए। अब नोंक XB के मध्य-बिंदु से जाते लंब पर रेखा के ऊपर रखिए, जिससे पेंसिल X और B से गुजरे, और AB के नीचे चाप बनाइए।
A X B नोंक नीचे नोंक ऊपर
चपटी लहरें। दोनों चापों के लिए परकार का खुलाव एक ही है और दोनों नोंकें AB के दोनों ओर समान दूरी पर हैं — इसी से लहरें समान बनती हैं।
दोनों लहरें समान क्यों बनती हैं: दो चाप तभी समान होते हैं जब उनकी त्रिज्या समान हो और जीवा समान हो। यहाँ दोनों जीवाएँ 4 सेमी की हैं (AX और XB) तथा परकार का खुलाव कभी बदला ही नहीं, इसलिए दोनों चाप बिल्कुल एक जैसे बनेंगे। बस दूसरी बार नोंक रेखा के दूसरी ओर रखना याद रखिए।
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