एक आयत PQRS पर विचार कीजिए। PR और QS को मिलाइए। ये दोनों रेखाखंड इस आयत के विकर्ण कहलाते हैं। विकर्णों की लंबाइयों की तुलना कीजिए। पहले पूर्वानुमान लगाइए, फिर आकृति में दिखाए अनुसार बिंदुओं को अंकित करते हुए आयत बनाकर विकर्णों को मापिए।
उत्तर
पूर्वानुमान और परिणाम दोनों एक ही हैं: आयत के दोनों विकर्ण लंबाई में बराबर होते हैं।
मान लीजिए PQ = 7 सेमी और QR = 4 सेमी वाला आयत PQRS बनाइए, PR तथा QS मिलाइए और नापिए—
PR = QS ≈ 8.1 सेमी
आयत
विकर्ण 1
विकर्ण 2
बराबर?
7 सेमी × 4 सेमी
8.1 सेमी
8.1 सेमी
हाँ
6 सेमी × 4 सेमी
7.2 सेमी
7.2 सेमी
हाँ
5 सेमी × 5 सेमी (वर्ग)
7.1 सेमी
7.1 सेमी
हाँ
ऐसा क्यों होता है: प्रत्येक विकर्ण दो सम्मुख कोनों को मिलाता है, और दोनों विकर्ण आयत की उतनी ही चौड़ाई तथा उतनी ही ऊँचाई पार करते हैं — एक “7 दाएँ और 4 नीचे” जाता है, दूसरा “7 दाएँ और 4 ऊपर”। यात्रा वही है, केवल दर्पण-रूप में, अत: दोनों लंबाइयाँ समान होनी ही चाहिए।
स्वयं जाँचिए: विकर्ण एक-दूसरे को ठीक आधा-आधा भी काटते हैं। चारों आधे भाग नापिए — चारों बराबर मिलेंगे।
प्र2.
दी गई आकृति में विकर्ण PR, ∠R को दो छोटे कोणों में विभाजित करता है, जिन्हें g और h कहा गया है। यही विकर्ण कोण P को कोणों c और d में भी विभाजित करता है। क्या g और h बराबर हैं? क्या c और d बराबर हैं? पहले पूर्वानुमान लगाइए, फिर कोणों को मापिए। आप क्या देखते हैं? उन कोण-युग्मों की पहचान कीजिए जो बराबर हैं।
उत्तर
7 सेमी लंबा और 4 सेमी ऊँचा आयत लेकर चाँदे से आठों कोण नापिए—
c ≈ 60°, d ≈ 30°, e ≈ 30°, f ≈ 60°, g ≈ 60°, h ≈ 30°, a ≈ 30°, b ≈ 60°
प्रत्येक कोना: 60° + 30° = 90° ✔
अत: g और h बराबर नहीं हैं, तथा c और d भी बराबर नहीं हैं — विकर्ण समकोण को आधा-आधा नहीं बाँटता (जब तक आयत वर्ग न हो)।
बराबर कोण-युग्म ये हैं—
a = d = e = h (चारों “चपटे” कोण, ≈ 30°) b = c = f = g (चारों “खड़े” कोण, ≈ 60°)
आयत PQRS के दोनों विकर्ण आठ कोण बनाते हैं। चारों चपटे कोण (a, d, e, h) आपस में बराबर हैं और चारों खड़े कोण (b, c, f, g) भी आपस में बराबर।
क्यों: विकर्ण PR एक तिरछी रेखा है जो अपने दोनों सिरों पर एक-सी ढलान रखती है, इसलिए वह P पर लंबी भुजा से जो कोण बनाती है, वही R पर भी बनाती है — अर्थात् d = h। चूँकि लंबी भुजा 7 सेमी और छोटी केवल 4 सेमी है, विकर्ण लंबी भुजा की ओर अधिक झुका रहता है, इसलिए “चपटा” कोण छोटा और “खड़ा” कोण बड़ा बनता है। दोनों तभी बराबर हो सकते हैं जब दोनों भुजाएँ बराबर हों।
प्र3.
खोजिए — एक आयत की रचना किस प्रकार करें कि विकर्ण सम्मुख कोणों को बराबर भागों में विभाजित करे?
उत्तर
आयत की रचना ऐसी करनी होगी कि उसकी दोनों आसन्न भुजाएँ बराबर हों — अर्थात् वह वर्ग बन जाए।
वर्ग में: प्रत्येक कोना = 90°
विकर्ण उसे 45° + 45° = दो बराबर भागों में बाँटता है
केवल वर्ग में ही ऐसा क्यों: विकर्ण सदैव लंबी भुजा की ओर झुकता है। यदि लंबाई चौड़ाई से अधिक है, तो विकर्ण लंबाई से छोटा और चौड़ाई से बड़ा कोण बनाएगा। दोनों भाग तभी बराबर होंगे जब कोई भुजा “लंबी” रह ही न जाए, अर्थात् लंबाई = चौड़ाई।
स्वयं जाँचिए: 6 सेमी भुजा का वर्ग बनाइए, एक विकर्ण खींचिए और किसी कोने के दोनों भाग नापिए। दोनों 45° मिलेंगे।
प्र4.
अपने प्रयोग में क्या आपने उस स्थिति पर विचार किया था, जिसमें आयत की चारों भुजाएँ बराबर हैं? अर्थात् क्या आपने एक वर्ग की स्थिति पर विचार किया था? देखिए कि इस विशिष्ट स्थिति में क्या होता है।
उत्तर
वर्ग में आठों कोणों के साथ एक विशेष बात हो जाती है—
आठों छोटे कोणों में से हर एक 45° का हो जाता है।
दोनों विकर्ण बराबर तो होते ही हैं, साथ ही एक-दूसरे को 90° पर काटते हैं — अर्थात् परस्पर लंब होते हैं।
प्रत्येक विकर्ण वर्ग को दो समरूप भागों में बाँटता है जो मोड़ने पर एक-दूसरे पर ठीक बैठ जाते हैं।
a = b = c = d = e = f = g = h = 45°
विकर्णों के बीच का कोण = 90°
क्यों: वर्ग में लंबाई और चौड़ाई समान हैं, इसलिए विकर्ण दोनों भुजाओं की ओर बराबर झुकता है और हर 90° के कोने को 45°-45° में बाँट देता है। जो आयत वर्ग नहीं है, उसमें विकर्ण एक-दूसरे को आधा-आधा तो काटते हैं, पर तिरछे कोण पर, 90° पर नहीं।
प्र5.
कोणों और भुजाओं के संदर्भ में आपने कौन-कौन से व्यापक नियम प्रेक्षित किए? उन्हें बनाने का प्रयास कीजिए तथा अपने सहपाठियों से उनकी चर्चा कीजिए। कोई यह किस प्रकार सुनिश्चित कर सकता है कि जो भी नियम आपने देखे हैं, वे सदैव सत्य होंगे?
उत्तर
प्रयोगों से बनने वाले नियम
आयत के दोनों विकर्ण लंबाई में बराबर होते हैं।
विकर्ण एक-दूसरे को ठीक आधा-आधा काटते हैं।
विकर्ण सम्मुख समकोणों में से प्रत्येक को दो भागों में बाँटता है; चारों “चपटे” भाग आपस में बराबर होते हैं और चारों “खड़े” भाग भी आपस में बराबर।
किसी कोने के दोनों भाग (45°-45°) केवल तभी बराबर होते हैं जब आयत वर्ग हो।
वर्ग में विकर्ण समकोण पर भी मिलते हैं।
निश्चय कैसे करें? मापन कभी किसी नियम को सिद्ध नहीं कर सकता — रूलर और चाँदा केवल इतना बताते हैं कि हमने जो थोड़ी-सी आकृतियाँ बनाईं उनमें नियम ठीक बैठा, और वह भी थोड़ी-बहुत त्रुटि के साथ। निश्चय के लिए ऐसा तर्क देना होगा जो किसी विशेष आकृति पर निर्भर न हो। जैसे—
नियम 1 का तर्क: आयत को उस बिंदु के परित: आधा घुमाइए जहाँ विकर्ण मिलते हैं। आयत ठीक अपने ऊपर आ जाता है और विकर्ण PR, QS पर बैठ जाता है। जो दो रेखाएँ एक-दूसरे पर बैठ जाएँ, वे बराबर लंबाई की ही होंगी। यह तर्क केवल R1 और R2 का उपयोग करता है, इसलिए हर आयत पर लागू होता है, छोटा हो या बड़ा — इसी से यह नियम बनता है।
गणित चर्चा: कक्षा में चर्चा कीजिए — “दस आयत नापना” और “एक तर्क देना” दो बहुत अलग बातें हैं। गणित में केवल दूसरी बात से ही निर्णय होता है।
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