1. एक आयत के अंदर वर्ग — 8 सेमी और 4 सेमी भुजाओं वाले एक आयत की रचना कीजिए। इस आयत के अंदर आप आकृति में दर्शाए अनुसार एक वर्ग की रचना किस प्रकार करेंगे, जिससे कि यह वर्ग आयत के ठीक बीचों-बीच रहे? संकेत— एक कच्ची (रफ) आकृति खींचिए। इस वर्ग की भुजा क्या होगी? बाहरी आयत और वर्ग के कोनों के बीच में कितनी दूरी होगी?
उत्तर
पहले योजना। आकृति में वर्ग आयत की ऊपरी और निचली भुजाओं को स्पर्श करता है। अत: उसकी भुजा आयत की ऊँचाई के बराबर होनी चाहिए।
वर्ग की भुजा = आयत की ऊँचाई = 4 सेमी
लंबाई में बची जगह = 8 − 4 = 4 सेमी
यह दोनों ओर बराबर बँटती है: 4 ÷ 2 = 2 सेमी बाईं ओर और 2 सेमी दाईं ओर
रचना के चरण
AB = 8 सेमी और BC = 4 सेमी लेकर आयत ABCD की रचना कीजिए (आधार, दो लंब, फिर ऊपरी भुजा)।
आधार AB पर A से 2 सेमी और B से 2 सेमी की दूरी पर एक-एक बिंदु अंकित कीजिए।
इन दोनों बिंदुओं पर AB के लंब खींचिए, जो ऊपरी भुजा तक जाएँ।
इन दोनों लंबों के बीच की पट्टी ही अभीष्ट वर्ग है — 4 सेमी × 4 सेमी।
4 सेमी का वर्ग 8 सेमी × 4 सेमी के आयत के ठीक बीच में बैठता है और दोनों ओर 2-2 सेमी जगह छोड़ता है। हरा बिंदु दोनों का उभयनिष्ठ केंद्र है।
दोनों ओर 2-2 सेमी क्यों: “एक ही केंद्र” का अर्थ है कि आकृति बाईं और दाईं ओर से एक जैसी दिखे। इसलिए बची हुई लंबाई 8 − 4 = 4 सेमी को दो बराबर भागों (2-2 सेमी) में बाँटना ही पड़ेगा।
प्र2.
2. गिरते हुए वर्ग — प्रत्येक 4 सेमी भुजा का एक वर्ग है। सुनिश्चित करें कि वर्ग उसी तरह संरेखित हों जिस तरह वे दिखाए गए हैं। अब, यह प्रयास कीजिए — 3 सेमी भुजा का वर्ग, 5 सेमी भुजा का वर्ग तथा 7 सेमी भुजा का वर्ग।
उत्तर
ध्यान से देखिए कि वर्ग किस प्रकार जुड़े हैं: एक वर्ग का निचला-बायाँ कोना ही अगले वर्ग का ऊपरी-दायाँ कोना है। वे केवल कोने पर स्पर्श करते हैं और नीचे-बाईं ओर बढ़ते जाते हैं।
रचना के चरण (4 सेमी भुजा के तीन वर्ग)
ऊपर दाईं ओर 4 सेमी भुजा का पहला वर्ग ABCD बनाइए (आधार, लंब, ऊपरी भुजा)।
उसका निचला-बायाँ कोना लीजिए। वहीं से नीचे-बाईं ओर 4 सेमी भुजा का दूसरा वर्ग इस प्रकार बनाइए कि वही कोना दूसरे वर्ग का ऊपरी-दायाँ कोना बने।
दूसरे वर्ग के निचले-बाएँ कोने से यही दोहराकर तीसरा वर्ग बनाइए।
हर भुजा या तो क्षैतिज रखिए या खड़ी, जिससे वर्ग सीढ़ियों की तरह संरेखित रहें।
गिरते हुए वर्ग। हर लाल बिंदु दो वर्गों का साझा कोना है — नीचे वाला वर्ग ऊपर वाले के निचले-बाएँ कोने से लटका हुआ है।
दूसरी आकृति में यही नियम है, पर वर्ग गिरते-गिरते बड़े होते जाते हैं: ऊपर 3 सेमी, फिर 5 सेमी, फिर 7 सेमी। पहले 3 सेमी का वर्ग बनाइए; उसके निचले-बाएँ कोने से 5 सेमी का वर्ग बनाइए (वही कोना 5 सेमी वाले वर्ग का ऊपरी-दायाँ कोना होगा); फिर 5 सेमी वाले वर्ग के निचले-बाएँ कोने से 7 सेमी का वर्ग बनाइए।
संकेत: वर्गों की प्रत्येक पंक्ति के लिए एक लंबी क्षैतिज सहायक रेखा खींच लीजिए। कोई वर्ग थोड़ा भी खिसक जाए तो “गिरने” का प्रभाव समाप्त हो जाता है।
प्र3.
3. छायांकन — दी गई आकृति को बनाइए। अपनी इच्छा से मापन चुनिए। ध्यान दीजिए कि बड़ी चतुर्भुजीय आकृति एक वर्ग है तथा इसी प्रकार छोटी आकृतियाँ भी वर्ग हैं।
उत्तर
रचना के चरण (8 सेमी भुजा का बड़ा वर्ग लेकर)
8 सेमी भुजा के वर्ग की रचना कीजिए।
चारों भुजाओं पर 2-2 सेमी पर बिंदु अंकित करके सम्मुख बिंदुओं को मिलाइए। अब वर्ग 16 छोटे वर्गों का ग्रिड बन गया, प्रत्येक 2 सेमी × 2 सेमी।
जिन छोटे वर्गों में छाया करनी है, उनमें ऊपरी-बाएँ कोने से निचले-दाएँ कोने तक विकर्ण खींचिए और उसके ऊपर वाले त्रिभुज में तिरछी रेखाओं से छाया कीजिए।
नीचे-बाईं ओर 4 सेमी का एक वर्ग (चार छोटे वर्ग मिलाकर) तथा उसके पास एक और 2 सेमी का वर्ग बिना छाया के छोड़ दीजिए, ठीक जैसा चित्र में है।
छायांकन का प्रारूप: हर छायांकित खाने में विकर्ण खींचकर ऊपर वाला त्रिभुज भरा गया है। नीचे-बाईं ओर 4 सेमी का वर्ग और एक 2 सेमी का वर्ग खाली छोड़ा गया है।
संकेत: सभी विकर्ण एक ही ओर झुके हैं, इसलिए छायांकित त्रिभुज एक पंक्ति में दिखते हैं और पूरा प्रारूप गिरती वर्षा जैसा लगता है। छाया विकर्ण के समांतर हल्की रेखाओं से कीजिए।
प्र4.
4. वर्ग जिसके अंदर छेद है — ध्यान दें कि वृत्ताकार छेद, वर्ग के ठीक बीचों-बीच है। संकेत— सोचिए कि वृत्त का केंद्र कहाँ होना चाहिए।
उत्तर
वृत्त का केंद्र वर्ग का केंद्र होना चाहिए, और वर्ग का केंद्र वह बिंदु है जहाँ उसके दोनों विकर्ण काटते हैं।
रचना के चरण (6 सेमी भुजा का वर्ग, 1.5 सेमी त्रिज्या का छेद)
6 सेमी भुजा के वर्ग ABCD की रचना कीजिए।
हल्की पेंसिल से विकर्ण AC और BD खींचिए। इनका कटान-बिंदु O कहलाएगा।
परकार की नोंक O पर रखकर 1.5 सेमी त्रिज्या का वृत्त बनाइए।
दोनों विकर्ण मिटा दीजिए — वे केवल सहायक रेखाएँ थीं।
वर्ग के विकर्ण O पर मिलते हैं, यही उसका केंद्र है। छेद वही वृत्त है जो O को केंद्र मानकर बनाया गया है।
विकर्णों से केंद्र क्यों मिलता है: प्रत्येक विकर्ण वर्ग को दो बराबर भागों में बाँटता है, इसलिए विकर्ण का मध्य-बिंदु चारों भुजाओं से समान दूरी पर होता है। दोनों विकर्ण उसी एक बिंदु से गुजरते हैं, अत: उनका कटान-बिंदु ही केंद्र है — नापने की आवश्यकता नहीं।
प्र5.
5. अधिक छेदों वाले वर्ग — इस आकृति की रचना कीजिए।
उत्तर
यह पिछली आकृति को चार बार दोहराना है। बड़े वर्ग को चार बराबर वर्गों में बाँटकर हर एक में एक छेद बनाइए।
रचना के चरण (8 सेमी भुजा का बड़ा वर्ग)
8 सेमी भुजा के वर्ग की रचना कीजिए।
चारों भुजाओं के मध्य-बिंदु अंकित कीजिए। ऊपरी भुजा के मध्य-बिंदु को निचली भुजा के मध्य-बिंदु से तथा बाईं भुजा के मध्य-बिंदु को दाईं भुजा के मध्य-बिंदु से मिलाइए। अब बड़ा वर्ग 4 सेमी भुजा के चार छोटे वर्गों में बँट गया।
प्रत्येक छोटे वर्ग में हल्के विकर्ण खींचकर उसका केंद्र ज्ञात कीजिए।
प्रत्येक केंद्र पर नोंक रखकर 1.5 सेमी त्रिज्या का वृत्त बनाइए। चारों के लिए एक ही खुलाव रखिए, जिससे छेद समान बनें।
हल्के विकर्ण मिटा दीजिए।
चार समान छेद — प्रत्येक छोटे वर्ग के केंद्र पर एक।
संकेत: चारों वृत्तों के बीच परकार का खुलाव कभी मत बदलिए। हर बार नया नापेंगे तो छेद थोड़े-थोड़े अलग बनेंगे और आकृति की सममिति बिगड़ जाएगी।
प्र6.
6. वक्रों वाला वर्ग — यह 8 सेमी की भुजा का एक वर्ग है। संकेत— सोचिए कि परकार के नुकीले सिरे को कहाँ रखा जाए ताकि चारों चाप (arc) प्रत्येक भुजा से समान रूप से उभरें। प्रयत्न कीजिए!
उत्तर
वर्ग की प्रत्येक भुजा के स्थान पर अंदर की ओर उभरा हुआ चाप है। चाप परकार की नोंक से दूर की ओर मुड़ता है, इसलिए हर भुजा के लिए नोंक वर्ग के बाहर, उस भुजा के लंब-समद्विभाजक पर रखनी होगी।
एक सुंदर चुनाव है — त्रिज्या 5 सेमी और नोंक भुजा के मध्य से 3 सेमी बाहर, क्योंकि 3, 4 और 5 आपस में ठीक बैठते हैं—
भुजा का आधा = 8 ÷ 2 = 4 सेमी
नोंक भुजा के मध्य से 3 सेमी बाहर
नोंक से प्रत्येक कोने की दूरी = 5 सेमी (3–4–5 समकोण त्रिभुज)
अत: 5 सेमी त्रिज्या का चाप दोनों कोनों से ठीक-ठीक गुजरता है
रचना के चरण
8 सेमी भुजा के वर्ग की रचना कीजिए।
प्रत्येक भुजा का मध्य-बिंदु अंकित करके वहाँ बाहर की ओर छोटा लंब खींचिए।
इन लंबों पर वर्ग से 3 सेमी बाहर एक-एक बिंदु अंकित कीजिए।
परकार में 5 सेमी लीजिए। नोंक इन चारों में से एक बिंदु पर रखकर उस भुजा के दोनों कोनों को जोड़ता चाप खींचिए।
खुलाव बदले बिना शेष तीन भुजाओं पर यही दोहराइए। तब चारों चाप समान रूप से (2-2 सेमी) अंदर उभरेंगे।
वक्रों वाला वर्ग। निचली भुजा के लिए नोंक उसके मध्य से 3 सेमी नीचे है; 5 सेमी त्रिज्या से चाप दोनों कोनों से गुजरता है और 2 सेमी अंदर उभरता है। शेष तीन भुजाओं पर भी यही किया जाता है।
चारों चाप एक जैसे क्यों बनते हैं: वर्ग की चारों भुजाएँ बराबर हैं, इसलिए यदि नोंक हर भुजा से समान दूरी बाहर रखी जाए और त्रिज्या भी हर बार वही हो, तो चारों चाप समान ही बनेंगे। बड़ी त्रिज्या लेने पर वक्र चपटे बनते हैं और छोटी (परंतु सदैव 4 सेमी से अधिक) त्रिज्या लेने पर गहरे।
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