गणित प्रकाश अध्याय 8 रचना कीजिए

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
1. एक आयत की रचना कीजिए, जिसमें एक विकर्ण सम्मुख कोणों को 60° और 30° के कोणों में विभाजित करता हो।
उत्तर

पहले आयत ABCD की कच्ची (रफ) आकृति बनाइए, जिसमें विकर्ण AC, AB से 60° और AD से 30° का कोण बनाता है। फिर चरणों का क्रम तय कीजिए: AB की लंबाई दी नहीं है, इसलिए उसे अपनी सुविधा से ले सकते हैं।

रचना के चरण

  1. चरण 1. सुविधाजनक लंबाई का AB खींचिए, मान लीजिए 4 सेमी। B पर AB का लंब खींचिए।
  2. चरण 2. A पर AB से 60° का कोण बनाती किरण खींचिए। जहाँ वह B वाले लंब को काटे, वहाँ C अंकित कीजिए।
  3. चरण 3. A पर AB का लंब खींचिए। बिंदु D इसी रेखा पर होगा।
  4. चरण 4, विधि 1. C पर BC का लंब खींचिए; वह A वाली रेखा को D पर काटेगा।
    विधि 2. अथवा परकार को BC के बराबर खोलकर नोंक A पर रखिए और A वाले लंब को काटिए — वही D है, क्योंकि AD = BC।
  5. CD मिलाइए। ABCD ही अभीष्ट आयत है।
A B C D 60° 30°
विकर्ण AC, A के समकोण को 60° और 30° में बाँटता है। AB = 4 सेमी लेने पर BC लगभग 6.9 सेमी बनता है।
बिना कोई लंबाई दिए भी आकार तय क्यों: दोनों कोण यह तय कर देते हैं कि विकर्ण कितना झुका है, और इसी से भुजाओं का अनुपात तय हो जाता है। AB = 4 सेमी चुनने से केवल नाप तय होती है — ऐसे सभी आयतों का आकार एक जैसा ही रहता है, बस कोई बड़ा और कोई छोटा।
प्र2.
अब ∠A दो कोणों में विभाजित किया गया है। एक कोण 60° का है। जाँचिए कि दूसरा कोण क्या है।
उत्तर
∠A = 90° (आयत के सभी कोण समकोण होते हैं)
एक भाग = 60°
दूसरा भाग = 90 − 60 = 30°

यह प्रश्न में माँगे गए 60° और 30° से मेल खाता है।

30° ही क्यों: विकर्ण कोने के अंदर से गुजरता है, इसलिए दोनों भाग मिलकर पूरा कोना बनाते हैं। पूरा कोना 90° का है, अत: एक भाग 60° तय कर देने पर दूसरा अपने-आप 30° हो जाता है। इसीलिए प्रश्न में ऐसी दो संख्याएँ दी जाती हैं जिनका योग 90 हो — अन्यथा ऐसा आयत बन ही नहीं सकता।
स्वयं जाँचिए: सम्मुख कोने C के दोनों भाग भी नापिए। वे भी 30° और 60° के ही हैं, बस क्रम उलटा है।
प्र3.
2. एक आयत की रचना कीजिए, जिसकी एक भुजा 5 सेमी है तथा विकर्ण की लंबाई 7 सेमी है।
उत्तर

पहले कच्ची आकृति: आयत ABCD, जिसमें DC = 5 सेमी और विकर्ण DB = 7 सेमी। आधार तो तुरंत खींचा जा सकता है; कठिनाई केवल B ज्ञात करने में है।

रचना के चरण

  1. चरण 1. आधार DC = 5 सेमी खींचिए।
  2. चरण 2. C पर DC का लंब खींचिए और उसे रेखा l कहिए। बिंदु B इसी रेखा पर कहीं होगा।
  3. चरण 3. परकार में 7 सेमी लेकर नोंक D पर रखिए और रेखा l को काटता हुआ चाप खींचिए। कटान-बिंदु ही B है (वह D से 7 सेमी दूर भी है और l पर भी — दोनों शर्तें एक साथ)।
  4. चरण 4. D पर DC का लंब तथा B पर BC का लंब खींचिए। वे A पर मिलते हैं। (अथवा परकार में CB लेकर D से काट लीजिए।)
  5. ABCD ही अभीष्ट आयत है। इसे R1 और R2 से जाँचिए।
D C B A 5 सेमी 7 सेमी l ≈ 4.9 सेमी
भुजा 5 सेमी और विकर्ण 7 सेमी। D से खींचा गया 7 सेमी त्रिज्या का नारंगी चाप लंब रेखा l को ठीक B पर काटता है। दूसरी भुजा लगभग 4.9 सेमी निकलती है।
चाप से B बिना प्रयास-त्रुटि के क्यों मिल जाता है: चाप पर वे सभी बिंदु हैं जो D से 7 सेमी दूर हैं, और रेखा l पर वे सभी बिंदु हैं जो C पर समकोण बनाते हैं। B को दोनों शर्तें पूरी करनी हैं, इसलिए वह वहीं होगा जहाँ दोनों मिलते हैं।
प्र4.
उस बिंदु पर विचार कीजिए, जहाँ यह वृत्त तथा रेखा प्रतिच्छेद करते हैं। इसकी बिंदु D से दूरी क्या है? यदि आवश्यकता हो, तो अपनी आकृति की जाँच कीजिए। आप क्या देखते हैं?
उत्तर

उसकी D से दूरी ठीक 7 सेमी है — वृत्त की त्रिज्या के बराबर।

B वृत्त पर है → DB = त्रिज्या = 7 सेमी
B रेखा l पर है → ∠BCD = 90°

हम यह देखते हैं कि यह प्रतिच्छेद बिंदु दोनों शर्तें एक साथ पूरी करता है, अत: यही वह कोना B है जिसकी हमें खोज थी। तीसरी भुजा नापने पर CB ≈ 4.9 सेमी मिलती है।

यह विचार इतना उपयोगी क्यों है: अकेले “D से 7 सेमी” कहने पर अनगिनत बिंदु संभव हैं (पूरा वृत्त); अकेले “रेखा l पर” कहने पर भी अनगिनत। दोनों को मिला देने पर केवल एक बिंदु बचता है। इस अध्याय की लगभग हर रचना इसी तरह काम करती है — दोनों समूह खींचिए और उनका मिलन-बिंदु ले लीजिए।
प्र5.
विधि 2 — बिंदु B को निर्धारित करने के लिए क्या संपूर्ण वृत्त का खींचना आवश्यक था?
उत्तर

नहीं। वृत्त का केवल वही छोटा भाग काम का है जो रेखा l को काटता है, अत: वहाँ एक छोटा-सा चाप खींच देना पर्याप्त है।

  1. परकार में 7 सेमी लेकर नोंक D पर रखिए।
  2. पेंसिल को केवल रेखा l के पास घुमाइए — उसे काटता हुआ हल्का चाप खींचिए।
  3. कटान-बिंदु को B अंकित कीजिए।
संकेत: चाप से आकृति साफ़ रहती है और समय भी कम लगता है। पूरा वृत्त खींचने पर DC के दूसरी ओर एक और अनावश्यक कटान-बिंदु बन जाता है, जो भ्रम पैदा कर सकता है।
प्र6.
जाँच कीजिए कि क्या ABCD वास्तव में एक आयत है जो गुणों R1 तथा R2 को संतुष्ट करता है।
उत्तर

बनी हुई आकृति को नापिए—

R1   DC = AB = 5 सेमी,   CB = DA ≈ 4.9 सेमी → सम्मुख भुजाएँ बराबर ✔
R2   ∠A = ∠B = ∠C = ∠D = 90°
अतिरिक्त जाँच: दूसरा विकर्ण AC भी 7 सेमी निकलता है ✔

दोनों गुण पूरे होते हैं, अत: ABCD वही आयत है जिसकी एक भुजा 5 सेमी और विकर्ण 7 सेमी है।

स्वयं जाँचिए: 5 सेमी आर-पार और 4.9 सेमी ऊपर मिलकर तिरछाई में 7 सेमी देने चाहिए। विकर्ण DB एक बार फिर नापिए — यदि 7 सेमी न आए, तो संभवतः C पर लंब ठीक नहीं बना है।
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