गणित प्रकाश अध्याय 8 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
परकार किस प्रकार बना है, अवलोकन कीजिए। परकार की सहायता से हम क्या-क्या बना सकते हैं? पता लगाइए।
उत्तर

परकार में दो भुजाएँ एक कब्जे (हिंज) से जुड़ी होती हैं — एक भुजा के सिरे पर नुकीली धातु की नोंक होती है और दूसरी में पेंसिल लगी होती है। पेंच कसने पर नोंक और पेंसिल के बीच की दूरी घुमाते समय बदलती नहीं

  • नोंक को कागज पर दबाकर पेंसिल को पूरा घुमाइए — वृत्त बन जाता है।
  • केवल थोड़ा-सा घुमाइए — चाप (वृत्त का एक भाग) बनता है।
  • खुलाव स्थिर रहने के कारण परकार बिना रूलर के किसी लंबाई की नकल एक स्थान से दूसरे स्थान पर भी उतार सकता है।
ऐसा क्यों होता है: नोंक एक ही बिंदु पर टिकी रहती है और पेंसिल उससे सदैव उतनी ही दूर रहती है। अत: पेंसिल जो भी बिंदु बनाती है, वे सभी नोंक से समान दूरी पर होते हैं — और वृत्त की परिभाषा ठीक यही है।
प्र2.
कागज पर एक बिंदु ‘P’ अंकित कीजिए। फिर बिंदु P से 4 सेमी दूरी पर विभिन्न दिशाओं में जितने संभव हो उतने बिंदुओं को अंकित कीजिए। सोचिए— बिंदु P से 4 सेमी दूरी पर अंकित सभी बिंदुओं की कल्पना कीजिए। वे कैसे दिखाई देते हैं?
उत्तर

इस प्रकार कीजिए—

  1. एक बिंदु अंकित कीजिए और उसे P नाम दीजिए।
  2. रूलर का 0 चिह्न P पर रखिए, उसे दाईं ओर घुमाइए और 4 सेमी के चिह्न पर एक बिंदु लगाइए।
  3. रूलर को थोड़ा घुमाइए — ऊपर, बगल में, तिरछा, नीचे — और हर बार 4 सेमी पर बिंदु लगाइए।
  4. इसी प्रकार करते जाइए। ये बिंदु धीरे-धीरे P के चारों ओर एक छल्ला बना देते हैं।

यदि ऐसे सभी बिंदु अंकित कर दिए जाएँ, तो वे P केंद्र और 4 सेमी त्रिज्या वाला एक वृत्त बना देते हैं।

P 4 सेमी
हर बिंदु P से 4 सेमी दूर है। पर्याप्त बिंदु अंकित कीजिए और वे मिलकर 4 सेमी त्रिज्या का वृत्त बना देते हैं।
ऐसा क्यों होता है: “P से 4 सेमी” कहने से दिशा तय नहीं होती, केवल दूरी तय होती है। दिशा कोई भी हो सकती है, इसलिए बिंदु P के चारों ओर समान रूप से फैल जाते हैं — और जिस वक्र का हर बिंदु किसी निश्चित बिंदु से समान दूरी पर हो, वह वृत्त ही होता है।
प्र3.
इसके लिए परकार की सहायता से बिंदु P से 4 सेमी दूरी पर कुछ बिंदु अंकित कीजिए। यह किस प्रकार किया जा सकता है?
उत्तर
  1. रूलर मेज पर रखिए। परकार की धातु-नोंक 0 पर रखकर परकार को तब तक खोलिए जब तक पेंसिल की नोक 4 सेमी के चिह्न तक न पहुँच जाए।
  2. पेंच कस दीजिए ताकि खुलाव बदले नहीं।
  3. अब धातु-नोंक को कॉपी में बिंदु P पर दबाइए।
  4. पेंसिल को कागज़ से छुआकर एक छोटा चिह्न लगाइए। उठाइए, परकार को थोड़ा घुमाइए और फिर चिह्न लगाइए — जितने चाहें उतने।
  5. अब नोंक P पर स्थिर रखते हुए पेंसिल को बिना उठाए पूरा घुमा दीजिए। पूरा वृत्त बन जाएगा।
संकेत: परकार को केवल ऊपर की घुंडी से पकड़िए और जिस ओर घुमा रहे हैं, उसी ओर हल्का-सा झुकाइए। पेंसिल को ज़ोर से मत दबाइए, वरना नोंक खिसक जाएगी और वृत्त टेढ़ा बनेगा।
प्र4.
इस वृत्त पर एक बिंदु लीजिए। P से इस बिंदु की दूरी क्या होगी— 4 सेमी के बराबर, या 4 सेमी से कम या 4 सेमी से अधिक? इसी प्रकार P तथा वृत्त पर एक अन्य बिंदु के बीच की दूरी क्या होगी?
उत्तर

उसकी P से दूरी ठीक 4 सेमी होगी — न कम, न अधिक। वृत्त पर लिए गए किसी भी अन्य बिंदु के लिए भी यही सत्य है: वृत्त का हर बिंदु P से 4 सेमी दूर है।

P से वृत्त के किसी भी बिंदु की दूरी = त्रिज्या = 4 सेमी
ऐसा क्यों होता है: वृत्त बनाते समय धातु-नोंक P से हटी नहीं और परकार का खुलाव भी नहीं बदला। अत: पेंसिल हर क्षण P से 4 सेमी दूर रही — और उसने जो वक्र बनाया, वह केवल ऐसे ही बिंदुओं से बना है। P को केंद्र तथा इस निश्चित दूरी को त्रिज्या कहते हैं।
स्वयं जाँचिए: अपने वृत्त पर कोई तीन बिंदु अंकित कीजिए और रूलर से P तक की दूरी नापिए। तीनों बार 4 सेमी ही मिलेगा।
प्र5.
परकार के प्रयोग का पता लगाने के बाद आगे बढ़ें और चित्र 8.1 में दिए गए चित्रों को पुन: बनाएँ। क्या आप इन आकृतियों को वहाँ दिखाई गई आकृतियों के समान बना सकते हैं? क्या उपकरणों का प्रयोग रचना को और आसान बनाता है?
उत्तर

हाँ — परकार से चित्र 8.1 की आकृतियाँ सरल हो जाती हैं, क्योंकि उनमें से हर एक केवल वृत्तों से बनी है।

चित्र 8.1 की आकृतिरचना कैसे करें
एक-दूसरे को स्पर्श करते दो वृत्त2 सेमी त्रिज्या लीजिए। केंद्र A से पहला वृत्त बनाइए। A से 4 सेमी दूर उसी रेखा पर B अंकित करके दूसरा वृत्त बनाइए। दोनों ठीक एक बिंदु पर स्पर्श करेंगे।
वृत्त के अंदर वृत्तनोंक एक ही केंद्र पर रखिए। पहले 1 सेमी त्रिज्या का, फिर 2 सेमी त्रिज्या का वृत्त बनाइए।
तीन अतिव्यापी वृत्तएक सरल रेखा पर 2.5 सेमी की दूरी पर तीन केंद्र अंकित कीजिए और प्रत्येक पर 2 सेमी त्रिज्या का वृत्त बनाइए।
चूहे का मुखमुख के लिए 3 सेमी त्रिज्या का बड़ा वृत्त; कानों के लिए 1.5 सेमी त्रिज्या के दो वृत्त, जिनके केंद्र बड़े वृत्त पर हों; आँख-नाक के लिए छोटे वृत्त तथा मुँह के लिए एक सरल रेखा।
तिरछी छड़ियाँएक-दूसरे को काटते हुए दो तिरछे रेखाखंड खींचिए, फिर प्रत्येक के निचले सिरे पर 1 सेमी त्रिज्या का छोटा वृत्त बनाइए।

हाँ, उपकरणों से रचना बहुत आसान हो जाती है। मुक्तहस्त बनाए वृत्त टेढ़े और अलग-अलग नाप के बनते हैं; परकार से वक्र चिकना बनता है और एक ही खुलाव से बिल्कुल समान नाप के वृत्त मिलते हैं — इसलिए चित्र सुंदर बनता है और उसे दोहराया जा सकता है।

प्रयास करें: परकार का एक ही खुलाव (मान लीजिए 2 सेमी) रखिए और उसी त्रिज्या के वृत्त पर केंद्र लेते हुए छह वृत्त बनाइए। छह पंखुड़ियों वाला सुंदर रंगोली-पुष्प बन जाएगा।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ