एक ही पंच से बने दोनों छेद सदैव मोड़ की रेखा में एक-दूसरे के दर्पण-प्रतिबिंब होते हैं। अत: मोड़ वही रेखा है जो दोनों छेदों के ठीक बीच से और उन्हें जोड़ने वाली रेखा के लंबवत जाती है।
- (a) दोनों छेद समान ऊँचाई पर अगल-बगल हैं। कागज को बीच की ऊर्ध्वाधर रेखा के अनुदिश मोड़ा गया था।
- (b) दोनों छेद तिरछे, एक ऊपर और एक नीचे, कोने की ओर हैं। कागज को वर्ग के विकर्ण के अनुदिश (नीचे-बाएँ कोने से ऊपर-दाएँ कोने तक) मोड़ा गया था।
- (c) दोनों छेद दाएँ किनारे के पास एक के ऊपर एक हैं। कागज को बीच की क्षैतिज रेखा के अनुदिश मोड़ा गया था।
- (d) एक ही पंच से चार छेद बने हैं, हर कोने पर एक। अत: कागज को दो बार मोड़ा गया था — पहले आधा ऊर्ध्वाधर, फिर आधा क्षैतिज (या इसका उल्टा)। पंच 4 परतों से होकर गया।
2 मोड़ → 4 परतें → 4 छेद
3 मोड़ → 8 परतें → 8 छेद