गणित प्रकाश अध्याय 9 आइए, पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
दी गई प्रत्येक आकृति में कागज की मुड़ी हुई चौकोर शीट में एक छेद किया गया है और फिर कागज को खोल दिया गया है। उस रेखा की पहचान कीजिए जिसके साथ कागज को मोड़ा गया था। चित्र (d) एक छेद करके बनाया गया है। ज्ञात कीजिए कागज को कैसे मोड़ा गया था।
उत्तर

एक ही पंच से बने दोनों छेद सदैव मोड़ की रेखा में एक-दूसरे के दर्पण-प्रतिबिंब होते हैं। अत: मोड़ वही रेखा है जो दोनों छेदों के ठीक बीच से और उन्हें जोड़ने वाली रेखा के लंबवत जाती है।

(a) ऊर्ध्वाधर (b) विकर्ण (c) क्षैतिज (d) दो मोड़
मोड़ की रेखा ही छेदों की दर्पण-रेखा है। (d) में दो मोड़ लगाए गए, इसलिए एक पंच से चार छेद बने।
  • (a) दोनों छेद समान ऊँचाई पर अगल-बगल हैं। कागज को बीच की ऊर्ध्वाधर रेखा के अनुदिश मोड़ा गया था।
  • (b) दोनों छेद तिरछे, एक ऊपर और एक नीचे, कोने की ओर हैं। कागज को वर्ग के विकर्ण के अनुदिश (नीचे-बाएँ कोने से ऊपर-दाएँ कोने तक) मोड़ा गया था।
  • (c) दोनों छेद दाएँ किनारे के पास एक के ऊपर एक हैं। कागज को बीच की क्षैतिज रेखा के अनुदिश मोड़ा गया था।
  • (d) एक ही पंच से चार छेद बने हैं, हर कोने पर एक। अत: कागज को दो बार मोड़ा गया था — पहले आधा ऊर्ध्वाधर, फिर आधा क्षैतिज (या इसका उल्टा)। पंच 4 परतों से होकर गया।
1 मोड़ → 2 परतें → 2 छेद
2 मोड़ → 4 परतें → 4 छेद
3 मोड़ → 8 परतें → 8 छेद
प्र2.
सममिति रेखाएँ दी गई हैं, अन्य छेदों को ज्ञात कीजिए—
उत्तर

प्रत्येक आकृति में नापिए कि दिया हुआ छेद दर्पण-रेखा से कितनी दूर है, और उतनी ही दूरी पर दूसरी ओर, रेखा के लंबवत दिशा में, नया छेद अंकित कीजिए।

(a) 1 नया छेद (b) 1 नया छेद (c) 1 नया छेद (d), (e) 1 छेद
नीला = पुस्तक में दिया गया छेद, पीला = आपको बनाना है। दर्पण-रेखा से दोनों की दूरी बराबर है।
  • (a) विकर्ण दर्पण वाला वर्ग — छेद बाएँ किनारे के पास, ऊपरी-बाएँ कोने के नीचे है। उसका प्रतिबिंब ऊपरी किनारे के पास बनेगा — बाएँ किनारे से जितनी दूरी है, ऊपरी किनारे से उतनी ही। (1 नया छेद।)
  • (b) क्षैतिज दर्पण वाला आयत — छेद रेखा के नीचे, दाएँ किनारे के पास है। नया छेद ठीक उसके ऊपर, रेखा से उतनी ही दूरी पर बनेगा। (1 नया छेद।)
  • (c) ऊर्ध्वाधर दर्पण वाला त्रिभुज — छेद रेखा के थोड़ा बाईं ओर है, इसलिए नया छेद उसी ऊँचाई पर रेखा के थोड़ा दाईं ओर बनेगा। (1 नया छेद।)
  • (d) तथा (e) तिरछे व्यास वाला वृत्त — छेद से व्यास पर लंब डालिए, उसे उतनी ही दूरी आगे बढ़ाइए और वहाँ छेद कीजिए। (हर एक में 1 नया छेद।)
दर्पण का नियम: कोई बिंदु और उसका प्रतिबिंब सदैव दर्पण के लंबवत रेखा पर, दर्पण से बराबर दूरी पर होते हैं। दूसरा छेद ज्ञात करने के लिए इतना ही पर्याप्त है।
प्र3.
नीचे कागज काटने से संबंधित कुछ प्रश्न दिए गए हैं। एक ऊर्ध्वाधर मोड़ पर विचार कीजिए। उसे हम निम्न प्रकार से दर्शाते हैं— (ऊर्ध्वाधर मोड़)। इसी प्रकार, क्षैतिज मोड़ को निम्न प्रकार से दर्शाते हैं— (क्षैतिज मोड़)।
उत्तर

यह भाग केवल उन दो चित्रों को समझाता है जिनका उपयोग प्रश्न 4 में होगा। इन्हें पढ़ना सीखिए:

चित्रअर्थमोड़ कहाँकट का क्या होगा
ऊर्ध्वाधर मोड़कागज का दायाँ आधा भाग बाएँ पर (या बायाँ दाएँ पर) पलटा जाता हैबीच की ऊर्ध्वाधर रेखाहर कट बाएँ-दाएँ दोहराया जाता है — खुले कागज में ऊर्ध्वाधर सममिति रेखा बनती है
क्षैतिज मोड़ऊपरी आधा भाग नीचे (या निचला ऊपर) पलटा जाता हैबीच की क्षैतिज रेखाहर कट ऊपर-नीचे दोहराया जाता है — खुले कागज में क्षैतिज सममिति रेखा बनती है

एक मोड़ के बाद कागज 2 परतों का हो जाता है, इसलिए एक कट से 2 एक जैसे निशान बनते हैं। दो मोड़ के बाद 4 परतें और एक कट से 4 निशान।

संकेत: मोड़ की रेखा खुले कागज की सममिति रेखा बन जाती है। जो कट मोड़ को छूता है वह खुलने पर एक बड़ा छेद बनाता है; खुले किनारे पर बना कट दो अलग-अलग कटाव बनाता है।
प्र4.
नीचे दी गई प्रत्येक स्थिति में काटने के पश्चात् जब कागज को खोला जाए तब छेद के आकार का अनुमान लगाकर उसे सत्यापित कीजिए।
उत्तर

हर स्थिति में उत्तर एक ही तरीके से मिलता है: कटे हुए टुकड़े में मोड़ के परित उसका दर्पण-प्रतिबिंब जोड़ दीजिए

(a) चार नोकों वाला छेद (b) रिबन जैसा छेद (d) छेद + दो कटाव
खोलने पर कागज कैसा दिखेगा। लाल बिंदुकित रेखा मोड़ है।
  • (a) कटा हुआ टुकड़ा मोड़ को छूता है और उसकी दूसरी ओर V-आकार का कटाव है। खोलने पर कागज के बीच एक ही छेद बनता है जिसमें ऊपर दो नोक, नीचे दो नोक तथा दोनों ओर एक-एक V-कटाव होते हैं — तितली जैसा छेद। मोड़ ही उसकी सममिति रेखा है।
  • (b) मोड़ से एक पट्टी काटी गई है जिसके सिरे पर “<” जैसा कटाव है। खोलने पर बीच में लंबा रिबन जैसा छेद बनता है जिसके दोनों सिरों पर V-कटाव होते हैं। इस छेद की दो सममिति रेखाएँ हैं — मोड़, तथा पट्टी के बीच से जाती क्षैतिज रेखा।
  • (c) यहाँ कागज को दो बार मोड़ा गया है (पहले ऊर्ध्वाधर, फिर क्षैतिज), अत: वह 4 परतों का है। मुड़े हुए कोने पर काटे गए दो छोटे वर्गाकार कटाव खुलने पर चार कटाव बन जाते हैं, जो दोनों मोड़ों के परित सममित होते हैं; जो कटाव मोड़ पर था वह दुगुने आकार का छेद बन जाता है। खुले कागज में ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज — दोनों सममिति रेखाएँ होती हैं।
  • (d) एक ऊर्ध्वाधर मोड़। मुड़े किनारे पर बना कटाव खुलने पर कागज के बीच में आयताकार छेद बनाता है, और खुले किनारे पर बना कटाव बाएँ तथा दाएँ किनारे पर एक-एक कटाव बना देता है।
स्वयं जाँचिए: उत्तर देखने से पहले रफ कागज पर स्वयं करके देखिए — पहले अनुमान लगाना ही इस प्रश्न का उद्देश्य है।
प्र5.
मान लीजिए कि आपको इनमें से प्रत्येक आकार को कुछ मोड़ों और एक सीधे कट के साथ प्राप्त करना है। आप ऐसा किस प्रकार करेंगे? a. केंद्र में स्थित छेद एक वर्ग है। b. केंद्र में स्थित छेद एक वर्ग है। नोट— उपरोक्त दोनों प्रश्नों के लिए, इसकी जाँच कीजिए कि क्या केंद्र में चार-भुजीय आकृति एक वर्ग के दोनों गुणों की विशेषताओं को इंगित करती है।
उत्तर

कागज को दो बार इस प्रकार मोड़िए कि कागज का केंद्र मुड़े हुए पैकेट के एक कोने पर आ जाए। वही बंद कोना कागज का केंद्र है। उसके पास एक सीधा कट चारों परतों से एक साथ टुकड़ा हटा देता है और खुलने पर बीच में छेद बन जाता है।

(a) सीधा कट (b) तिरछा कट
दोनों छेद दोनों मोड़ों के कटान-बिंदु पर, अर्थात् कागज के केंद्र पर बनते हैं।

(a) सीधा खड़ा वर्गाकार छेद

  1. कागज को आधा क्षैतिज मोड़िए, फिर आधा ऊर्ध्वाधर मोड़िए। अब कागज का केंद्र छोटे वर्गाकार पैकेट का बंद कोना है।
  2. उसी बंद कोने पर एक छोटा वर्गाकार कटाव काटिए, जिसकी दोनों सीधी भुजाएँ दोनों मोड़ों के अनुदिश हों।
  3. खोलिए — चारों चौथाई कटाव मिलकर बीच में एक वर्गाकार छेद बना देते हैं।

(b) कोने पर खड़ा वर्गाकार छेद (हीरे जैसा)

  1. पहले की तरह क्षैतिज और फिर ऊर्ध्वाधर मोड़ लगाइए।
  2. अब बंद कोने पर एक ही सीधा तिरछा कट लगाकर एक छोटा समकोण त्रिभुज काट लीजिए, जिसकी दोनों बराबर भुजाएँ मोड़ों पर हों।
  3. खोलिए — चारों त्रिभुज मिलकर 45° घुमा हुआ वर्गाकार छेद बना देते हैं।
नोट की जाँच: (a) में छेद की चारों भुजाएँ बराबर और हर कोण 90° है — वर्ग के दोनों गुण (S1 तथा S2) पूरे होते हैं। (b) में कट दोनों मोड़ों से 45° पर और दोनों पर बराबर दूरी पर लगाया गया है, अत: चारों भुजाएँ फिर बराबर और कोने समकोण हैं। यह वही वर्ग है, बस तिरछा — घुमाने से न भुजाएँ बदलती हैं, न कोण।
प्र6.
इन आकृतियों में कितनी सममिति की रेखाएँ हैं? a. (कोने पर खड़ा वर्ग तथा आठ नोकों वाला तारा) b. समान भुजाओं और समान कोणों वाला एक त्रिभुज c. समान भुजाओं और समान कोणों वाला एक षट्भुज
उत्तर
वर्ग: 4 आठ नोकों वाला तारा: 8 समबाहु त्रिभुज: 3 सम षट्भुज: 6
हर बिंदुकित रेखा सममिति की रेखा है। ध्यान दीजिए कि n भुजाओं (या n नोकों) वाली सम आकृति में ठीक n रेखाएँ होती हैं।

a. पहली आकृति कोने पर खड़ा वर्ग है — वर्ग को घुमाने से वह वर्ग ही रहता है, अत: उसमें अब भी 4 सममिति की रेखाएँ हैं: दो सम्मुख कोनों से और दो सम्मुख भुजाओं के मध्य-बिंदुओं से।
दूसरी आकृति आठ नोकों वाला सम तारा है — इसमें 8 सममिति की रेखाएँ हैं: 4 सम्मुख नोकों से और 4 सम्मुख भीतरी कोनों से।

b. समान भुजाओं और समान कोणों वाला त्रिभुज समबाहु त्रिभुज है। इसमें 3 सममिति की रेखाएँ हैं — प्रत्येक शीर्ष से सम्मुख भुजा के मध्य-बिंदु तक।

c. समान भुजाओं और समान कोणों वाला षट्भुज सम षट्भुज है। इसमें 6 सममिति की रेखाएँ हैं — 3 सम्मुख कोनों को जोड़ने वाली और 3 सम्मुख भुजाओं के मध्य-बिंदुओं को जोड़ने वाली।

पैटर्न: n भुजाओं वाले सम बहुभुज में ठीक n सममिति की रेखाएँ होती हैं। यदि n विषम है तो हर रेखा एक शीर्ष को सम्मुख भुजा के मध्य-बिंदु से जोड़ती है; यदि n सम है तो आधी रेखाएँ सम्मुख शीर्षों को और आधी सम्मुख भुजाओं के मध्य-बिंदुओं को जोड़ती हैं।
प्र7.
प्रत्येक आकृति का अक्स बनाइए तथा सममिति की रेखाएँ खींचिए, यदि कोई है तो—
उत्तर

समचतुर्भुजों (डायमंड) वाली चार आकृतियाँ:

आकृतिसममिति की रेखाएँकहाँ
तीन समचतुर्भुज — एक ऊपर, दो नीचे1ऊपर वाले समचतुर्भुज से जाती ऊर्ध्वाधर रेखा
तीन समचतुर्भुज एक पंक्ति में2बीच वाले से जाती ऊर्ध्वाधर रेखा तथा तीनों केंद्रों से जाती क्षैतिज रेखा
चार समचतुर्भुज मिलकर एक बड़ा समचतुर्भुज2केंद्र से जाती ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज रेखा
चार समचतुर्भुज, दो तिरछी जोड़ियों में2केंद्र से जाती ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज रेखा

वर्गांकित कागज पर बनी चार आकृतियाँ:

4 रेखाएँ 2 रेखाएँ 1 रेखा 4 रेखाएँ
पृष्ठ 227 की चारों वर्गांकित आकृतियाँ और उनकी सभी सममिति रेखाएँ।
  • बड़े वर्ग के भीतर छोटा वर्ग, जो चार भागों में बँटा है4 सममिति की रेखाएँ (ऊर्ध्वाधर, क्षैतिज तथा दोनों विकर्ण)। छोटा वर्ग ठीक बीच में है, इसलिए कोई रेखा नहीं बिगड़ती।
  • आठ भुजाओं वाली आकृति2 सममिति की रेखाएँ (ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज)। यह चौड़ाई से अधिक ऊँची है, इसलिए विकर्ण सममिति की रेखाएँ नहीं हैं।
  • पाँच भुजाओं वाली आकृति1 सममिति की रेखा, बाएँ कोने से जाती क्षैतिज रेखा।
  • चार नोकों वाला तारा4 सममिति की रेखाएँ (ऊर्ध्वाधर, क्षैतिज तथा दोनों विकर्ण)।
प्र8.
नीचे दिए गए कोलम में सममिति की रेखाएँ ज्ञात कीजिए—
उत्तर

यह कोलम छह नोकों वाले सात तारों से बना है — एक बीच में और छह उसके चारों ओर — तथा बीच के खाली स्थानों में छोटे समचतुर्भुज हैं। अत: यह एक षट्कोणीय डिज़ाइन है।

कोलम का सरल रेखाचित्र: बीच में एक तारा और चारों ओर छह तारे, साथ में 6 सममिति की रेखाएँ।

कोलम में 6 सममिति की रेखाएँ हैं, और सभी बीच वाले तारे से होकर जाती हैं:

  • 3 रेखाएँ जो सम्मुख बाहरी तारों के जोड़ों से होकर जाती हैं;
  • 3 रेखाएँ जो तारों के बीच से, समचतुर्भुजों से होकर जाती हैं।
कोलम 60°, 120°, 180°, 240°, 300° तथा 360° पर भी स्वयं के ऊपर आ जाता है — 6 सममिति के कोण।
क्या आप जानते हैं? कोलम और रंगोली बनाने वाले यही तरीका अपनाते हैं: वे डिज़ाइन का केवल छठा (या चौथा) भाग ध्यान से बनाते हैं और फिर उसे केंद्र के चारों ओर दोहरा देते हैं। इसीलिए ये चित्र इतने परिपूर्ण दिखते हैं।
प्र9.
निम्नलिखित का चित्र बनाइए— a. एक त्रिभुज जिसमें सममिति की केवल एक रेखा हो। b. एक त्रिभुज जिसमें सममिति की केवल तीन रेखाएँ हों। c. एक त्रिभुज जिसमें सममिति की कोई रेखा ना हो। क्या ठीक दो सममित रेखाओं का त्रिभुज बनाना संभव है?
उत्तर
(a) समद्विबाहु: 1 (b) समबाहु: 3 (c) विषमबाहु: 0
ठीक एक, ठीक तीन तथा शून्य सममिति रेखाओं वाले त्रिभुज।
  • a. समद्विबाहु त्रिभुज बनाइए — दो भुजाएँ बराबर, तीसरी अलग (जैसे 6 सेमी, 6 सेमी और 4 सेमी)। इसकी एकमात्र सममिति रेखा शीर्ष से असमान भुजा के मध्य-बिंदु तक जाती है।
  • b. समबाहु त्रिभुज बनाइए — तीनों भुजाएँ बराबर (जैसे 5 सेमी)। इसमें 3 सममिति की रेखाएँ हैं।
  • c. विषमबाहु त्रिभुज बनाइए — तीनों भुजाएँ अलग-अलग (जैसे 4 सेमी, 6 सेमी और 7 सेमी)। इसमें कोई सममिति रेखा नहीं।

क्या ठीक दो सममिति रेखाओं वाला त्रिभुज संभव है? नहीं, यह असंभव है।

क्यों: त्रिभुज की प्रत्येक सममिति रेखा उसकी दो भुजाओं को बराबर बना देती है।
  • एक रेखा → ठीक दो भुजाएँ बराबर (समद्विबाहु)।
  • यदि दूसरी रेखा भी हो, तो भुजाओं का एक और जोड़ा बराबर हो जाएगा — तब तीनों भुजाएँ बराबर हो जाएँगी और त्रिभुज समबाहु बन जाएगा, जिसमें तीन रेखाएँ होती हैं, दो नहीं।
अत: त्रिभुज में सममिति की रेखाओं की संख्या केवल 0, 1 या 3 हो सकती है — कभी 2 नहीं।
प्र10.
निम्नलिखित का चित्र बनाइए। प्रत्येक स्थिति में, आकृति में कम से कम एक घुमावदार सीमा अवश्य हो। a. ठीक एक सममिति की रेखा वाला चित्र b. ठीक दो सममिति की रेखाओं वाला चित्र c. ठीक चार सममिति की रेखाओं वाला चित्र
उत्तर
(a) अर्धवृत्त: 1 (b) अंडाकार: 2 (c) फूल: 4
ठीक 1, 2 तथा 4 सममिति रेखाओं वाली घुमावदार आकृतियाँ।
  • a. ठीक एक रेखा: अर्धवृत्त (आधी रोटी)। इसकी एकमात्र सममिति रेखा सीधी भुजा के मध्य-बिंदु से जाने वाला लंब है। “D” जैसी आकृति, दिल या शंकु भी चलेगा।
  • b. ठीक दो रेखाएँ: अंडाकार (दीर्घवृत्त), या ऐसा आयत जिसकी दोनों छोटी भुजाओं की जगह अर्धवृत्ताकार उभार हों। सममिति रेखाएँ लंबा अक्ष और छोटा अक्ष हैं।
  • c. ठीक चार रेखाएँ: चार बराबर पंखुड़ियों वाला फूल, या ऐसा वर्ग जिसकी हर भुजा पर अर्धवृत्ताकार उभार हो। रेखाएँ — ऊर्ध्वाधर, क्षैतिज तथा दोनों विकर्ण।
सावधान: (c) के लिए पूरा वृत्त नहीं चलेगा — उसमें अनगिनत सममिति रेखाएँ होती हैं, ठीक चार नहीं।
प्र11.
निम्नलिखित आकृतियों को एक वर्गाकार कागज पर बनाइए। उन्हें इस प्रकार पूरा कीजिए कि नीले रंग की रेखा सममिति की रेखा हो। समस्या (a) को आपके लिए पूरा किया गया है। संकेत — (c) और (f) के लिए देखिए कि क्या पुस्तक को घुमाने से कुछ सहायता प्राप्त होती है!
उत्तर

ग्रिड पर एक-एक खाना गिनकर काम कीजिए। दी गई लाल आकृति के हर कोने के लिए नीली रेखा से खानों की संख्या गिनिए, दूसरी ओर उतने ही खाने जाकर संगत बिंदु अंकित कीजिए, और फिर उन्हीं क्रम में नए बिंदुओं को मिलाइए।

ठोस = दिया हुआ बिंदुकित = प्रतिलिपि नीली = सममिति रेखा
भाग (a) इसी प्रकार पूरा किया गया है — हर बिंदु नीली रेखा के दूसरी ओर उतनी ही दूरी पर।
  • (a) पुस्तक में हल किया गया है: ऊर्ध्वाधर नीली रेखा के दाईं ओर बना आधा बाण बाईं ओर उतार दिया गया है, जिससे पतंग जैसी आकृति बनती है।
  • (b) नीली रेखा क्षैतिज है। सीढ़ीनुमा आकृति को नीचे की ओर उतारिए: रेखा से 3 खाने ऊपर वाला बिंदु 3 खाने नीचे जाएगा। पूरी आकृति ऐसी दिखेगी मानो वही मीनार अपने प्रतिबिंब पर खड़ी हो।
  • (c) नीली रेखा तिरछी है। पुस्तक को इस प्रकार घुमाइए कि यह रेखा ऊर्ध्वाधर हो जाए — तब प्रतिलिपि बनाना आसान हो जाता है। तिरछे दर्पण में, रेखा के किसी बिंदु से a खाने दाएँ और b खाने ऊपर वाला बिंदु b खाने दाएँ और a खाने ऊपर आ जाता है।
  • (d) ऊर्ध्वाधर नीली रेखा, बाईं ओर छोटा हुक — उसे दाईं ओर उतारिए; दोनों हुक मिलकर “]—[” जैसी आकृति बनाते हैं।
  • (e) ऊपर क्षैतिज नीली रेखा और उसके नीचे पाँच भुजाओं वाली आकृति — उसे रेखा के ऊपर उतारिए, जिससे दोनों सिरों पर चपटी, हीरे जैसी बंद आकृति बनती है।
  • (f) फिर तिरछी नीली रेखा; पुस्तक घुमाइए और षट्भुज जैसी आकृति को रेखा के दूसरी ओर परावर्तित कीजिए।
संकेत क्यों काम करता है: दर्पण-रेखा को इससे फर्क नहीं पड़ता कि पन्ना किस ओर पकड़ा गया है। पुस्तक घुमाने से केवल खाने गिनना आँखों के लिए आसान हो जाता है — उत्तर वही रहता है।
प्र12.
निम्नलिखित आकृतियों को एक वर्गाकार कागज पर बनाइए। उनमें से प्रत्येक को इस प्रकार पूरा कीजिए कि परिणामी आकृति में सममिति की रेखाओं के रूप में दो नीली रेखाएँ हो।
उत्तर

परावर्तन दो बार कीजिए:

  1. दिए गए लाल भाग को पहली नीली रेखा में परावर्तित कीजिए।
  2. अब दोनों भागों (दिए हुए और नए) को दूसरी नीली रेखा में परावर्तित कीजिए।

अंत में उस भाग की 4 प्रतिलिपियाँ बनेंगी — दोनों रेखाओं से बने चारों क्षेत्रों में एक-एक।

दोनों नीली रेखाओं को सममिति रेखा बनाने पर एक दिया हुआ भाग चार भागों में बदल जाता है।
  • (a) दोनों नीली रेखाएँ विकर्ण हैं। नीचे बना छोटा लाल रेखाखंड चारों चौथाइयों में उतारना होगा; पूरी आकृति कोने पर खड़े वर्ग जैसी दिखेगी जिसके चारों ओर बराबर निशान हैं।
  • (b) फिर विकर्ण, और बाईं ओर टेढ़ी-मेढ़ी रेखा। पहले एक विकर्ण में, फिर दोनों को दूसरे विकर्ण में परावर्तित कीजिए — चार भुजाओं वाली “दर्पण-फिरकी” बन जाएगी।
  • (c), (d), (e), (f) यहाँ नीली रेखाएँ ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज हैं। दिए हुए भाग को पहले ऊर्ध्वाधर रेखा में, फिर दोनों को क्षैतिज रेखा में परावर्तित कीजिए — केंद्र के परित सममित रूप से रखे चार एक जैसे भाग मिलेंगे।
एक अतिरिक्त तथ्य: जब किसी आकृति की दो सममिति रेखाएँ परस्पर लंबवत हों, तो उसमें स्वत: ही घूर्णन सममिति का क्रम 2 आ जाता है — कटान-बिंदु के परित आधा चक्कर (180°) उसे स्वयं पर ला देता है।
प्र13.
निम्नलिखित रेखा आकृतियों को डॉट ग्रिड पर बनाइए। प्रत्येक आकृति के लिए दो और रेखाएँ खींचिए ताकि ऐसी एक आकृति बन सके, जिसमें सममिति की एक रेखा हो।
उत्तर

उत्तर कई हो सकते हैं। सबसे आसान तरीका यह है:

  1. जिस रेखा को अक्ष बनाना है उसे चुनिए — प्राय: बिंदुओं से जाती ऊर्ध्वाधर, क्षैतिज या 45° की रेखा।
  2. दी हुई रेखाओं को उसमें परावर्तित कीजिए। चूँकि दिए गए दो कोने प्राय: अक्ष पर ही पड़ते हैं, आकृति बंद करने के लिए ठीक दो नई रेखाएँ ही चाहिए।
छह में से एक आकृति पूरी की गई: लाल बिंदुकित रेखाएँ ही दो नई रेखाएँ हैं और हरी रेखा सममिति की रेखा है।

नीचे हर आकृति के लिए एक-एक संभव उत्तर दिया है (बाएँ से स्तंभ 0–5 और ऊपर से पंक्ति 0–5):

आकृतिपहले से बनी रेखाएँजोड़ने योग्य दो रेखाएँसममिति की रेखा
1(4,0)–(0,1)–(4,5)(4,5)–(5,1) तथा (5,1)–(4,0)दोनों समांतर भुजाओं के मध्य-बिंदुओं से जाती तिरछी रेखा (समद्विबाहु समलंब)
2(2,0)–(0,3)–(1,5)–(3,5)(3,5)–(4,3) तथा (4,3)–(2,0)(2,0) से जाती ऊर्ध्वाधर रेखा
3(0,0)–(2,1)–(4,0)–(4,2)–(2,5)(2,5)–(0,2) तथा (0,2)–(0,0)(2,0) से जाती ऊर्ध्वाधर रेखा
4(0,0)–(4,0)–(4,1)–(1,4)(1,4)–(0,4) तथा (0,4)–(0,0)(0,0) से शुरू होती 45° की विकर्ण रेखा
5(2,3)–(0,1)–(2,5)(0,5)–(2,3) तथा (0,5)–(2,1)पंक्ति 3 से जाती क्षैतिज रेखा
6(0,0)–(2,0)–(5,2)–(2,4)(2,4)–(0,4) तथा (0,4)–(0,0)पंक्ति 2 से जाती क्षैतिज रेखा
स्वयं जाँचिए: बनाने के बाद चुनी हुई रेखा पर एक छोटा दर्पण सीधा रखिए। यदि दिखने वाला आधा भाग और उसका प्रतिबिंब मिलकर ठीक आपकी पूरी आकृति जैसा लगे, तो उत्तर सही है।
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