इन दोनों चित्रों में कागज को मोड़ने के पश्चात् चित्र में दर्शाई गई बिंदु रेखा के अनुदिश काटते हैं। एक कच्चा चित्र बनाइए जिसमें कागज को खोलने पर दिखने वाले चित्र का पूर्वानुमान हो। क्या आप इस आकृति में सममिति की रेखा देखते हैं? ये कहाँ है?
उत्तर
कट मुड़े हुए किनारे से शुरू किया गया है, इसलिए जो टुकड़ा गिरता है वह छेद का केवल आधा भाग है। कागज खोलने पर उसमें उसका दर्पण-प्रतिबिंब जुड़ जाता है और कागज के बीचों-बीच पूरा छेद बन जाता है।
बाएँ: मुड़ा हुआ कागज और बिंदुकित कट। दाएँ: खुला हुआ कागज — छेद = कटा टुकड़ा + उसका दर्पण-प्रतिबिंब।
हाँ, खुली हुई आकृति में सममिति की रेखा है — वह ठीक मोड़ की रेखा (crease) है। मोड़ के दाईं ओर का प्रत्येक भाग (छेद सहित) बाईं ओर के भाग का दर्पण-प्रतिबिंब है।
संकेत: छेद का आकार सदैव “कटा हुआ टुकड़ा + उसका दर्पण-प्रतिबिंब” होता है। मोड़ पर आधा दिल काटिए तो पूरा दिल बनेगा; आधा तारा काटिए तो पूरा तारा।
प्र2.
पतले रंगीन आयताकार कागज का उपयोग कीजिए। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है इसे कई बार मोड़कर और कागज को काटकर कुछ जटिल पैटर्न बनाइए। दोहराए जाने वाली आकृतियों में सममित रेखाओं की पहचान कीजिए। उत्सव के अवसरों पर ऐसे कागजों को काटकर सजावटी आकार बनाइए।
उत्तर
पतले कागज की लंबी पट्टी को पंखे की तरह बार-बार मोड़िए (अकॉर्डियन मोड़), सभी परतों को एक साथ काटकर कोई छोटी आकृति बनाइए और फिर खोलिए। वही आकृति पट्टी भर में बार-बार दोहराई हुई मिलेगी।
हर कट सभी परतों से होकर जाता है, इसलिए एक ही कट से उतनी प्रतिलिपियाँ बनती हैं जितनी परतें हैं। चार मोड़ = 16 परतें = 16 प्रतिलिपियाँ!
प्रत्येक मोड़ की रेखा सममिति की रेखा है — उसके एक ओर का डिज़ाइन दूसरी ओर के डिज़ाइन का दर्पण-प्रतिबिंब है।
छपे हुए डिज़ाइन में हर नीले तारे की अपनी भी रेखाएँ हैं: आठ नुकीले सिरों वाले तारे में 8 और हर छोटे समचतुर्भुज में 2।
एक ही पट्टी में दो प्रकार के पैटर्न: पूरी पट्टी लंबाई में खिसकाने से दोहराती है और प्रत्येक दोहराव अपने पड़ोसी का दर्पण है। इसीलिए यह किनारी इतनी सुंदर लगती है।
प्रयास करें: दीवाली या जन्मदिन के लिए ऐसा कागज का तोरण बनाइए। मोड़िए, मोड़ पर आधा फूल काटिए, खोलिए — फूलों की पूरी पंक्ति बन जाएगी।
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