नहीं, पाँचवाँ कोई तरीका नहीं है। वर्ग में ठीक 4 सममिति की रेखाएँ होती हैं।
- मोड़ 1 — ऊर्ध्वाधर मोड़ (बायाँ आधा भाग दाएँ पर)।
- मोड़ 2 — क्षैतिज मोड़ (ऊपरी आधा भाग नीचे पर)।
- मोड़ 3 — एक विकर्ण के अनुदिश।
- मोड़ 4 — दूसरे विकर्ण के अनुदिश।
अद्यतन2026-09-05
नहीं, पाँचवाँ कोई तरीका नहीं है। वर्ग में ठीक 4 सममिति की रेखाएँ होती हैं।
हाँ। पृष्ठ 221 की तीनों आकृतियों में एक से अधिक सममिति की रेखाएँ हैं।
| आकृति | सममिति की रेखाएँ | सममिति के कोण |
|---|---|---|
| लाल हिमकण (कोच स्नोफ्लेक) | 6 | 60°, 120°, 180°, 240°, 300°, 360° |
| 6 पंखुड़ियों वाला पीला फूल | 6 | 60°, 120°, 180°, 240°, 300°, 360° |
| हरा गाँठदार डिज़ाइन (लूप वाला वर्ग) | 4 | 90°, 180°, 270°, 360° |
नहीं। आयत का विकर्ण सममिति की रेखा नहीं है।
आयताकार कागज को उसके विकर्ण के अनुदिश मोड़ने पर दोनों त्रिभुज एक-दूसरे को नहीं ढकते — एक ओर लंबी भुजा और दूसरी ओर छोटी भुजा बाहर निकल जाती है।
अत: वर्ग न होने वाले आयत में ठीक 2 सममिति की रेखाएँ हैं — दोनों लंबी भुजाओं के मध्य-बिंदुओं से जाने वाली रेखा और दोनों छोटी भुजाओं के मध्य-बिंदुओं से जाने वाली रेखा।
वर्ग के कोने इस प्रकार अंकित हैं — A (ऊपर बाएँ), B (ऊपर दाएँ), C (नीचे दाएँ) तथा D (नीचे बाएँ)।
विकर्ण AC के अनुदिश परावर्तन:
A और C दर्पण-रेखा पर स्थित हैं, इसलिए वे हिलते नहीं। B और D रेखा के दोनों ओर बराबर दूरी पर हैं, इसलिए वे आपस में स्थान बदल लेते हैं।
क्षैतिज सममिति रेखा के अनुदिश परावर्तन:
ऊपरी भुजा नीचे की भुजा पर आ जाती है, अत: A बिंदु D का स्थान लेता है, D बिंदु A का, B बिंदु C का तथा C बिंदु B का।
| दर्पण-रेखा | A जाता है | B जाता है | C जाता है | D जाता है |
|---|---|---|---|---|
| ऊर्ध्वाधर रेखा | B | A | D | C |
| क्षैतिज रेखा | D | C | B | A |
| विकर्ण AC | A | D | C | B |
| विकर्ण BD | C | B | A | D |