गणित प्रकाश अध्याय 9 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या वर्ग को मोड़ने का कोई अन्य तरीका है जिससे कि दोनों आधे हिस्से एक दूसरे को आच्छादित करें? वर्ग जैसी आकृति में कितनी सममिति की रेखाएँ हैं?
उत्तर

नहीं, पाँचवाँ कोई तरीका नहीं है। वर्ग में ठीक 4 सममिति की रेखाएँ होती हैं।

वर्ग के चार मोड़: ऊर्ध्वाधर, क्षैतिज तथा दोनों विकर्ण।
  • मोड़ 1 — ऊर्ध्वाधर मोड़ (बायाँ आधा भाग दाएँ पर)।
  • मोड़ 2 — क्षैतिज मोड़ (ऊपरी आधा भाग नीचे पर)।
  • मोड़ 3 — एक विकर्ण के अनुदिश।
  • मोड़ 4 — दूसरे विकर्ण के अनुदिश।
और क्यों नहीं: वर्ग की सममिति रेखा को उसके केंद्र से होकर जाना पड़ता है और कोनों को कोनों पर भेजना पड़ता है। ऐसी रेखाएँ केवल 4 हैं — दो सम्मुख भुजाओं के मध्य-बिंदुओं से और दो सम्मुख कोनों से।
प्र2.
अत: हम यह कह सकते हैं कि चित्रों में अनेक सममिति की रेखाएँ हो सकती हैं। नीचे दिए गए चित्रों में अनेक सममिति की रेखाएँ हैं। क्या आप इन सभी को ढूँढ़ सकते हैं?
उत्तर

हाँ। पृष्ठ 221 की तीनों आकृतियों में एक से अधिक सममिति की रेखाएँ हैं।

आकृतिसममिति की रेखाएँसममिति के कोण
लाल हिमकण (कोच स्नोफ्लेक)660°, 120°, 180°, 240°, 300°, 360°
6 पंखुड़ियों वाला पीला फूल660°, 120°, 180°, 240°, 300°, 360°
हरा गाँठदार डिज़ाइन (लूप वाला वर्ग)490°, 180°, 270°, 360°
छह नुकीले सिरों वाली आकृति में 6 सममिति की रेखाएँ होती हैं — 3 सम्मुख सिरों से और 3 सम्मुख कटावों से।
जल्दी गिनने का तरीका: यदि कोई डिज़ाइन एक ही टुकड़े को केंद्र के चारों ओर n बार दोहराकर बना हो और वह टुकड़ा तिरछा न हो, तो उसमें n सममिति की रेखाएँ और n सममिति के कोण होते हैं।
प्र3.
हमने देखा कि एक वर्ग का विकर्ण भी सममिति की रेखा है। आइए, उदाहरण के रूप में एक आयत को लेते हैं जोकि एक वर्ग नहीं है। क्या इसका विकर्ण सममिति की रेखा है? सर्वप्रथम, आयत को देखिए और इन प्रश्नों का उत्तर दीजिए। अब कागज का एक आयताकार टुकड़ा लेते हैं और इसे विकर्ण के अनुदिश मोड़कर देखते हैं कि दोनों हिस्से पूर्णतया आच्छादित हैं या नहीं। आप क्या देखते हैं?
उत्तर

नहीं। आयत का विकर्ण सममिति की रेखा नहीं है।

विकर्ण ✗ वास्तविक दो रेखाएँ ✓
आयत में केवल 2 सममिति की रेखाएँ (हरी) हैं। विकर्ण (लाल) उनमें से नहीं है।

आयताकार कागज को उसके विकर्ण के अनुदिश मोड़ने पर दोनों त्रिभुज एक-दूसरे को नहीं ढकते — एक ओर लंबी भुजा और दूसरी ओर छोटी भुजा बाहर निकल जाती है।

ऐसा क्यों: विकर्ण के अनुदिश मोड़ने पर लंबी भुजा (मान लीजिए 8 सेमी) को छोटी भुजा (5 सेमी) पर आना पड़ेगा। मोड़ने से लंबाई नहीं बदलती, इसलिए 8 सेमी कभी 5 सेमी पर नहीं आ सकती। वर्ग में चारों भुजाएँ बराबर होती हैं, इसीलिए उसके विकर्ण काम कर जाते हैं।

अत: वर्ग न होने वाले आयत में ठीक 2 सममिति की रेखाएँ हैं — दोनों लंबी भुजाओं के मध्य-बिंदुओं से जाने वाली रेखा और दोनों छोटी भुजाओं के मध्य-बिंदुओं से जाने वाली रेखा।

प्र4.
यदि हम इस आकृति को A और C से होकर जाने वाले विकर्ण के अनुदिश परावर्तित करें, तो क्या होगा? बिंदु A, B, C और D किन स्थानों पर जाएँगे? यदि हम इसे क्षैतिज सममित रेखा के अनुदिश परावर्तित करें, तो क्या होगा?
उत्तर

वर्ग के कोने इस प्रकार अंकित हैं — A (ऊपर बाएँ), B (ऊपर दाएँ), C (नीचे दाएँ) तथा D (नीचे बाएँ)।

A B C D
वर्ग ABCD — ऊर्ध्वाधर रेखा (लाल), क्षैतिज रेखा (हरी) तथा विकर्ण AC (बैंगनी)।

विकर्ण AC के अनुदिश परावर्तन:

A अपने स्थान पर A    C अपने स्थान पर C    B, D के स्थान पर    D, B के स्थान पर

A और C दर्पण-रेखा पर स्थित हैं, इसलिए वे हिलते नहीं। B और D रेखा के दोनों ओर बराबर दूरी पर हैं, इसलिए वे आपस में स्थान बदल लेते हैं।

क्षैतिज सममिति रेखा के अनुदिश परावर्तन:

A ↔ D    B ↔ C

ऊपरी भुजा नीचे की भुजा पर आ जाती है, अत: A बिंदु D का स्थान लेता है, D बिंदु A का, B बिंदु C का तथा C बिंदु B का।

दर्पण-रेखाA जाता हैB जाता हैC जाता हैD जाता है
ऊर्ध्वाधर रेखाBADC
क्षैतिज रेखाDCBA
विकर्ण ACADCB
विकर्ण BDCBAD
प्र5.
इंक-ब्लॉट डेविल्स: कागज का एक टुकड़ा लीजिए। उसे आधा मोड़िए। एक आधे भाग पर स्याही (या पेंट) की कुछ बूँदें छिड़किए। अब इन दोनों आधे भागों को एक दूसरे पर दबाइए तथा पुन: कागज को खोलिए। • आप क्या देखते हैं? • क्या परिणामी आकृति सममित है? • यदि हाँ, तो सममिति की रेखा कहाँ है? • क्या कोई अन्य सममिति की रेखा भी है, जिसके अनुदिश मोड़ने पर एक जैसे (identical) दो भाग प्राप्त होंगे?
उत्तर
  • क्या दिखता है: स्याही फैलकर दूसरे आधे भाग पर अपनी प्रतिलिपि छाप देती है। अब मोड़ के दोनों ओर एक जैसे दो धब्बे दिखते हैं — प्राय: वे तितली, चमगादड़ या किसी चेहरे जैसे लगते हैं। इसीलिए इसे इंक-ब्लॉट डेविल कहते हैं।
  • क्या आकृति सममित है? हाँ। धब्बे का आकार चाहे जैसा हो, दोनों भाग एक-दूसरे के दर्पण-प्रतिबिंब होते हैं।
  • सममिति की रेखा कहाँ है? ठीक मोड़ (crease) के अनुदिश — वही रेखा दर्पण का काम करती है।
  • कोई अन्य रेखा? प्राय: नहीं। किसी भी अनियमित धब्बे में केवल यही एक रेखा होती है। दूसरी रेखा तभी मिलेगी जब स्याही की बूँदें स्वयं मोड़ के लंबवत किसी रेखा के परित सममित रूप से डाली गई हों।
यह काम कैसे करता है: दोनों भागों को दबाने पर स्याही का प्रत्येक बिंदु मोड़ से उतनी ही दूरी पर, ठीक सामने वाले बिंदु पर छप जाता है। परावर्तन यही करता है।
प्रयास करें: कागज को दो बार मोड़िए (एक बार ऊर्ध्वाधर, एक बार क्षैतिज), एक चौथाई भाग पर स्याही डालिए, दबाइए और खोलिए। अब पैटर्न में 2 सममिति की रेखाएँ होंगी और आधा चक्कर घुमाने पर भी वह वैसा ही दिखेगा।
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