गणित प्रकाश अध्याय 9 आइए, पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या आप इस अध्याय के प्रारंभ में दी गई आकृतियों में सममिति की रेखा देख पाए हैं? बादलों की आकृति के विषय में आपका क्या विचार है?
उत्तर

हाँ — चार में से तीन आकृतियों को मोड़कर दर्पण-भाग बनाए जा सकते हैं; फिरकी और बादल में ऐसा संभव नहीं।

आकृतिसममिति की रेखाएँकहाँ
फूल (6 पंखुड़ियाँ)6प्रत्येक पंखुड़ी के बीच से एक और दो पंखुड़ियों के बीच से एक
रंगोली4ऊर्ध्वाधर, क्षैतिज तथा केंद्र से जाती दो तिरछी रेखाएँ
तितली1शरीर के अनुदिश ऊर्ध्वाधर रेखा
फिरकी0सभी पंखुड़ियाँ एक ही ओर झुकी हैं, इसलिए कोई मोड़ काम नहीं करता
बादल0इसमें कुछ भी दोहराया नहीं जाता
अंतर समझिए: फिरकी में कोई सममिति की रेखा नहीं है, फिर भी 60° घुमाने पर वह वैसी ही दिखती है। बादल में दोनों में से कोई भी सममिति नहीं है।
प्र2.
निम्न आकृतियों में यदि सममिति की रेखाएँ हैं, तो उन्हें पहचानिए।
उत्तर

पाँच में से तीन आकृतियों में ठीक एक-एक सममिति की रेखा है; दो में कोई नहीं। नीचे लाल बिंदुकित रेखाएँ ही सममिति की रेखाएँ हैं।

(i) 1 रेखा (ii) 1 रेखा (iii) कोई नहीं (iv) 1 रेखा (v) कोई नहीं
पृष्ठ 219 की पाँचों आकृतियाँ और उनकी सममिति की रेखाएँ (बिंदुकित)।
  • (i) बाण जैसी आकृति1 सममिति की रेखा: जो V-आकार के कटाव और उसके सामने वाले कोने से होकर जाती है। मोड़ने पर ऊपर का नुकीला सिरा नीचे के सिरे पर आ जाता है।
  • (ii) पतंग (kite)1 सममिति की रेखा: ऊपर के कोने को नीचे के कोने से जोड़ने वाली ऊर्ध्वाधर रेखा। इसका दूसरा विकर्ण सममिति की रेखा नहीं है, क्योंकि उससे बने दोनों भाग असमान हैं।
  • (iii) असमान ऊर्ध्वाधर भुजाओं वाली चतुर्भुज आकृतिकोई सममिति की रेखा नहीं। कोई भी मोड़ छोटी भुजा को बड़ी भुजा पर नहीं ला सकता।
  • (iv) L-आकार1 सममिति की रेखा: बाहरी कोने से भीतरी कोने तक जाने वाला तिरछा विकर्ण। दोनों भुजाएँ समान लंबाई और समान मोटाई की हैं, इसलिए वे आपस में बदल जाती हैं।
  • (v) पतला त्रिभुजकोई सममिति की रेखा नहीं। इसकी तीनों भुजाएँ अलग-अलग लंबाई की हैं (विषमबाहु त्रिभुज)।
स्वयं जाँचिए: हर आकृति का अक्स बनाकर काट लीजिए और हर संभव तरीके से मोड़कर देखिए। मोड़ तभी सही है जब दोनों भाग पूरी तरह एक-दूसरे को ढक लें — कोई भाग बाहर न निकले।
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