गणित प्रकाश अध्याय 9 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
फूल को हम किसी भी तरफ से देखें वह हर तरफ से सुंदर, आकर्षक एवं जैसा है वैसा ही दिखाई देता है। तितली के विषय में आपका क्या विचार है? तितली के रंग बहुत आकर्षक हैं। क्या आपको तितली के विषय में कुछ और आकर्षक लगता है?
उत्तर

तितली में जो बात सबसे अधिक आकर्षित करती है, वह यह है कि उसका बायाँ आधा भाग और दायाँ आधा भाग बिल्कुल एक जैसे हैं।

सममिति रेखा
तितली को उसके शरीर की रेखा के अनुदिश मोड़ने पर दोनों पंख एक-दूसरे को पूर्णतया ढक लेते हैं।

यदि चित्र को तितली के शरीर से होकर जाने वाली रेखा के अनुदिश मोड़ें, तो बायाँ पंख ठीक दाएँ पंख पर आ जाता है — वही आकार, वही माप, वही धब्बे। ये दर्पण के आधे भाग हैं।

फूल से अंतर: फूल घुमाने पर वैसा ही दिखता है (घूर्णन), जबकि तितली पलटने पर वैसी ही दिखती है (परावर्तन)। तितली में ठीक एक सममिति की रेखा है और कोई घूर्णन सममिति नहीं।
प्र2.
ऊपर की सभी आकृतियों को देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि आकृति के कुछ भाग दोहराए गए हैं और ये दोहराव एक निश्चित पैटर्न में घटित होते दिख रहे हैं। क्या आप देख सकते हैं कि रंगोली की आकृति में क्या दोहराया गया है?
उत्तर

हाँ। रंगोली में एक चौथाई भाग चार बार केंद्र के चारों ओर दोहराया गया है।

  • लाल पंखुड़ियाँ, हरे पत्ते और छोटी नीली बूँदें — केंद्र के परित 90° घुमाने पर सभी अपने-अपने स्थान पर वापस आ जाते हैं।
  • फिर 90° (अर्थात् 180°), फिर 270° और अंत में 360° घुमाने पर भी रंगोली वैसी ही दिखती है।
रंगोली के सममिति के कोण = 90°, 180°, 270°, 360°

रंगोली में 4 सममिति की रेखाएँ भी हैं — एक ऊर्ध्वाधर, एक क्षैतिज तथा केंद्र से जाती हुई दो तिरछी रेखाएँ।

प्रयास करें: वर्गाकार कागज पर रंगोली का केवल एक चौथाई भाग बनाइए। कागज को दो बार मोड़कर काटिए और खोलिए — पूरी रंगोली स्वयं बन जाएगी।
प्र3.
फिरकी के विषय में आप क्या सोचते हैं? क्या आप देख सकते हैं कि फिरकी के संदर्भ में कौन-सा पैटर्न दोहराया जा रहा है? (संकेत— पहले षटभुज को देखें) क्या आप बता सकते हैं कि षटभुज की प्रत्येक भुजा पर कौन-सी आकृति दोहराई जाती है? प्रत्येक भुजा पर चिपकाई गई आकृति का आकार क्या है? क्या आप इसे पहचानते हैं? जब आप षटभुज की सीमा रेखाओं के साथ आगे की ओर बढ़ते हैं तब आकृतियाँ कैसे बनती हैं?
उत्तर

बीच से शुरू कीजिए। फिरकी के केंद्र में एक सम षट्भुज (छह बराबर भुजाएँ) है और उसकी प्रत्येक भुजा पर एक समचतुर्भुज चिपका है, जो दो समबाहु त्रिभुजों को जोड़कर बना है।

सम षट्भुज की प्रत्येक भुजा पर एक समचतुर्भुज (दो समबाहु त्रिभुज) चिपका है, और सभी एक ही दिशा में झुके हैं।

आकृतियाँ कैसे बढ़ती हैं: षट्भुज की सीमा पर आगे बढ़ने पर हर अगला समचतुर्भुज पिछले समचतुर्भुज को केंद्र के परित 60° घुमाने से प्राप्त होता है। सभी पंखे की पंखुड़ियों की तरह एक ही ओर झुके हैं।

फिरकी के सममिति के कोण = 60°, 120°, 180°, 240°, 300°, 360°  (6 कोण)
ध्यान दीजिए: सभी पंखुड़ियाँ एक ही ओर झुकी हैं, इसलिए दर्पण उन्हें उल्टी ओर झुका देगा। अत: फिरकी में कोई सममिति की रेखा नहीं है, फिर भी वह सुंदर रूप से सममित है — यही घूर्णन सममिति है, जिसे अनुभाग 9.2 में पढ़ा जाएगा।
प्र4.
आप इन सुंदर संरचनाओं में कौन-सी सममितियाँ देखते हैं? (ताजमहल तथा गोपुरम्)
उत्तर

ताजमहल। सामने से देखने पर—

  • बीचोंबीच गुंबद और मुख्य मेहराब से होकर एक ऊर्ध्वाधर सममिति की रेखा जाती है। बायाँ और दायाँ आधा भाग — मेहराब, छोटे गुंबद तथा चारों मीनारें — पूरी तरह दर्पण-प्रतिबिंब हैं।
  • सामने बनी जल-नहर एक दूसरा, क्षैतिज दर्पण जोड़ देती है — पानी में बना प्रतिबिंब इमारत की उलटी प्रतिलिपि है।
  • ठीक ऊपर से देखने पर पूरे परिसर में 4 सममिति की रेखाएँ हैं और वह हर 90° पर स्वयं के ऊपर आ जाता है।

गोपुरम् (मंदिर का प्रवेश-द्वार)।

  • इसमें भी एक ऊर्ध्वाधर सममिति की रेखा है — प्रत्येक मंजिल का बायाँ और दायाँ भाग एक जैसा है।
  • ऊपर की ओर बढ़ते हुए मूर्तियों की वही पंक्ति मंजिल-दर-मंजिल दोहराई जाती है, हर बार थोड़ी छोटी होकर। यही दोहराव गोपुरम् को इतना व्यवस्थित रूप देता है।
Math Talk: कुतुब मीनार, कोणार्क का पहिया, चारमीनार और किसी कोलम के चित्र देखिए। हर एक के बारे में दो प्रश्न पूछिए — “क्या मैं इसे मोड़ सकता हूँ?” और “क्या मैं इसे घुमा सकता हूँ?”
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