प्र1.
क्या उपरोक्त पवन-चक्की ठीक पहले जैसी ही दिखाई देगी, जब उसे 90° से छोटे किसी कोण पर घुमाया जाता है?
उत्तर
नहीं। कागज की पवन-चक्की में चार एक जैसी पंखुड़ियाँ केंद्र के चारों ओर बराबर दूरी पर लगी हैं।
दो पड़ोसी पंखुड़ियों के बीच का कोण = 360° ÷ 4 = 90°
यदि आप उसे 90° से कम — जैसे 30°, 45° या 80° — घुमाएँ, तो हर पंखुड़ी दो पुरानी स्थितियों के बीच रुक जाती है, इसलिए चित्र टेढ़ा दिखता है और मूल स्थिति से मेल नहीं खाता।
केवल 90° पर ही हर पंखुड़ी ठीक अगली पंखुड़ी के स्थान पर पहुँचती है और पवन-चक्की पहले जैसी दिखने लगती है।
90° से कम क्यों नहीं: आकृति के वैसा ही दिखने के लिए एक पंखुड़ी को दूसरी पंखुड़ी पर आना ही पड़ेगा। यह सबसे पहले तभी होता है जब पूरा एक “अंतराल” घूम जाए, और वह अंतराल 90° का है। इसीलिए 90° को पवन-चक्की का न्यूनतम सममिति कोण कहते हैं।