गणित प्रकाश अध्याय 9 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
दी गई आकृति को देखिए, इसमें 4 किरण-संबंधी भुजाएँ हैं। इसकी सममिति के कितने कोण हैं? वे कौन-से हैं? ध्यान दीजिए कि प्रत्येक दो आसन्न केंद्रीय बिंदुकित रेखाओं के बीच का कोण 90° है।
उत्तर

चारों भुजाएँ एक जैसी हैं और आसन्न भुजाओं के बीच का कोण 90° है, इसलिए हर भुजा अगली भुजा का स्थान ले सकती है।

90°
चार किरण-संबंधी भुजाएँ, 90° के अंतर पर। हर चौथाई चक्कर आकृति को स्वयं पर ले आता है।
सममिति के कोण = 90°, 180°, 270°, 360°  →  4 कोण
क्यों: 90° का घूर्णन भुजा 1 को भुजा 2 पर, भुजा 2 को भुजा 3 पर, भुजा 3 को भुजा 4 पर तथा भुजा 4 को भुजा 1 पर ले जाता है — चित्र वैसा ही रहता है। यही बात 180°, 270° और 360° के लिए भी सत्य है।
प्र2.
क्या आप इन किरण-संबंधी भुजाओं के बीच के कोणों को बदल सकते हैं, ताकि प्राप्त आकृति के अभी भी सममिति के 4 कोण हों? इसे खींचने का प्रयास कीजिए।
उत्तर

नहीं — यदि चारों भुजाएँ रखनी हैं तो नहीं। 4 भुजाओं के साथ 4 सममिति कोण पाने का एकमात्र तरीका है कि उन्हें आपस में 90° पर ही रखा जाए।

न्यूनतम सममिति कोण = 360° ÷ 4 = 90°
क्यों: यदि 90° घुमाने पर आकृति वैसी ही दिखती है, तो वह घूर्णन हर भुजा को अगली भुजा पर ले जाएगा। अत: लगातार भुजाओं के बीच के सभी अंतराल बराबर होने चाहिए, और पूरे चक्कर में चार बराबर अंतराल का अर्थ है 90° प्रत्येक। यदि एक अंतराल 80° और दूसरा 100° कर दें, तो चौथाई चक्कर पर भुजाएँ मेल नहीं खाएँगी और केवल 360° बचेगा।

क्या बदला जा सकता है: भुजाएँ स्वयं। उन्हें लंबा, छोटा, मोटा, पंखे की तरह घुमावदार या पत्ती जैसा बनाइए — जब तक चारों एक जैसी हैं और 90° के अंतर पर हैं, आकृति के ठीक 4 सममिति कोण रहेंगे। चार पंखों वाला पंखा और चार पंखुड़ियों वाला फूल बनाकर कागज के कट-आउट से जाँचिए।

प्र3.
आप इस आकृति को किस प्रकार संशोधित करेंगे कि इसके केवल सममिति के 2 कोण हों?
उत्तर

भुजाओं को जोड़ियों में असमान कर दीजिए: दो सम्मुख भुजाएँ एक जैसी रखिए और शेष दो सम्मुख भुजाएँ अलग बना दीजिए।

दो लंबी और दो छोटी भुजाएँ। अब चौथाई चक्कर मेल नहीं खाता — केवल आधा चक्कर ही काम करता है।
सममिति के कोण = 180°, 360°  →  केवल 2 कोण
  • 90° का घूर्णन लंबी भुजा को छोटी भुजा पर लाना चाहेगा — यह विफल हो जाता है।
  • 180° का घूर्णन हर भुजा को उसकी सम्मुख (एक जैसी) भुजा पर लाता है — यह सफल होता है।
दूसरा आसान तरीका: भुजाएँ बराबर ही रखिए, परंतु हर भुजा के सिरे पर एक ही दिशा में मुड़ी हुई छोटी झंडी जोड़ दीजिए (जैसा पुस्तक में दिखाया गया है)। आधा चक्कर तब भी मेल खाएगा, चौथाई चक्कर नहीं।
प्र4.
आइए, नीचे दी आकृति के अनुसार 3 किरण-संबंधी भुजाओं को लेकर प्रयास करें। इसके कितने सममिति के कोण हैं तथा ये कौन-से हैं? इस आकृति की एक प्रति बनाइए और काट लीजिए। इस आकृति पर कट-आउट को घुमाकर इसके घूर्णन कोण निर्धारित कीजिए।
उत्तर

अक्स बनाकर काटिए और उसे छपी हुई आकृति पर धीरे-धीरे घुमाइए। आप देखेंगे कि कोई भी अधूरा घूर्णन मेल नहीं खाता

सममिति का कोण = केवल 360°  →  1 कोण

अत: तीन भुजाएँ होने पर भी इस आकृति में घूर्णन सममिति नहीं है

असफल क्यों: छपी हुई आकृति में तीनों भुजाएँ बराबर दूरी पर नहीं हैं — उनके बीच के कोण अलग-अलग हैं। भुजा 1 को भुजा 2 पर लाने के लिए भुजा 1 और 2 के बीच का कोण, भुजा 2 और 3 के बीच के तथा भुजा 3 और 1 के बीच के कोण के बराबर होना चाहिए। यहाँ ऐसा नहीं है, इसलिए केवल 360° का पूरा चक्कर ही काम करता है।
याद रखिए: 360° हर आकृति का सममिति कोण होता है। किसी आकृति में घूर्णन सममिति तभी मानी जाती है जब उसका कोई सममिति कोण 360° से छोटा हो।
प्र5.
यद्यपि, क्या इस आकृति में कोई ऐसा परिवर्तन किया जा सकता है जिससे इसके 3 सममिति के कोण हो जाएँ? क्या बिंदुकित रेखाओं के बीच के कोणों में परिवर्तन करके ऐसा किया जा सकता है? ध्यान दीजिए कि ∠A को ∠B के साथ, ∠B को ∠C के साथ तथा ∠C को ∠A के साथ अतिव्यापी होना चाहिए। इसलिए ∠A = ∠B = ∠C है। यह कोण क्या होना चाहिए? अब इस आकृति के कितने घूर्णन के कोण हैं तथा ये कौन-से हैं?
उत्तर

हाँ — भुजाओं के बीच के कोणों को इस प्रकार बदलिए कि तीनों बराबर हो जाएँ।

∠A = ∠B = ∠C
∠A + ∠B + ∠C = 360°  (एक पूरा चक्कर)
3 × ∠A = 360°
∠A = 360° ÷ 3 = 120°
120°
तीन बराबर भुजाएँ और आसन्न भुजाओं के बीच 120° — अब आकृति में घूर्णन सममिति है।

आसन्न बिंदुकित रेखाओं के बीच 120° होने पर आकृति के 3 सममिति कोण हो जाते हैं:

120° (एक-तिहाई चक्कर),   240° (120° + 120°),   360° (120° + 120° + 120°)
ठीक यही क्यों: 120° का घूर्णन भुजा A को B पर, B को C पर तथा C को A पर ले जाता है। दो बार करने पर (240°) A, C पर पहुँचता है और तीन बार करने पर (360°) सब कुछ अपने स्थान पर लौट आता है। ध्यान दीजिए कि सभी सममिति कोण न्यूनतम कोण 120° के गुणज हैं।
प्र6.
क्या आप किरण-संबंधी भुजाओं को लेकर ऐसी आकृति बना सकते हैं जिसमें— a. ठीक 5 सममिति के कोण हों? b. 6 सममिति के कोण हों? प्रत्येक आकृति का सममिति का कोण भी ज्ञात करें। संकेत— पहली स्थिति के लिए 5 किरण-संबंधी भुजाएँ लीजिए। दो आसन्न किरण-संबंधी भुजाओं के बीच क्या कोण होना चाहिए?
उत्तर

जितने सममिति कोण चाहिए उतनी ही बराबर भुजाएँ लीजिए और 360° के पूरे चक्कर को उनमें बराबर बाँट दीजिए।

a) ठीक 5 सममिति कोण — 5 बराबर भुजाएँ बनाइए।

दो आसन्न भुजाओं के बीच का कोण = 360° ÷ 5 = 72°
सममिति के कोण = 72°, 144°, 216°, 288°, 360°

b) ठीक 6 सममिति कोण — 6 बराबर भुजाएँ बनाइए।

दो आसन्न भुजाओं के बीच का कोण = 360° ÷ 6 = 60°
सममिति के कोण = 60°, 120°, 180°, 240°, 300°, 360°
5 भुजाएँ, 72° 6 भुजाएँ, 60°
बराबर भुजाएँ केंद्र के चारों ओर बराबर बाँटी गईं: 5 भुजाओं से 72° और 6 भुजाओं से 60°।
सामान्य नियम: n बराबर भुजाओं वाली, बराबर दूरी पर रखी आकृति के n सममिति कोण होते हैं और उसका न्यूनतम सममिति कोण 360° ÷ n होता है। शेष सभी कोण उसी के गुणज हैं।
प्र7.
एक ऐसी किरण-संबंधी भुजाओं से बनी आकृति लीजिए जिसमें ठीक 7 सममिति के कोण हों। इसका न्यूनतम सममिति कोण कितना होगा? क्या इस स्थिति में कोण की माप एक पूर्ण संख्या होगी? यदि नहीं, तो उसे मिश्रित भिन्न में व्यक्त कीजिए।
उत्तर
न्यूनतम सममिति कोण = 360° ÷ 7

360 में 7 का भाग दीजिए: 7 × 51 = 357 तथा 360 − 357 = 3।

360 ÷ 7 = 51 शेष 3  →  5137°

नहीं, यह पूर्ण संख्या नहीं है। न्यूनतम सममिति कोण 5137° (लगभग 51.43°) है।

सातों सममिति कोण इस प्रकार हैं—

5137°,   10267°,   15427°,   20557°,   25717°,   30847°,   360°
पूर्ण संख्या क्यों नहीं: 7, 360 का गुणनखंड नहीं है (360 = 2 × 2 × 2 × 3 × 3 × 5)। जब भी भुजाओं की संख्या 360 का गुणनखंड नहीं होती, न्यूनतम सममिति कोण भिन्न के रूप में आता है। 3, 4, 5, 6, 8, 9, 10, 12 भुजाओं के लिए उत्तर पूर्ण संख्या होता है; 7 या 11 भुजाओं के लिए नहीं।
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